बिहार पुलिस मुख्यालय के आदेश का एसोसिएशन ने किया विरोध, वापस लेने की मांग

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार पुलिस मुख्यालय के द्वारा जारी आदेश पर पुलिस एसोसिएशन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह पुलिस मुख्यालय को पत्र में लिखा है कि आग्रह पूर्वक कहना है कि देश समाज में ख़ाकी रंग एक परिवार का रूप है. पुलिस मुख्यालय के आदेश के तहत अब योग्यताओं का महत्व की चर्चा नहीं करते हुए वर्ग के आधार पर पोस्टिंग होगी इस तरह का निर्गत आदेश से कनिय पुलिस कर्मी हतप्रभ हैं.

मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मी का एक ही जाति (वर्ग ) ख़ाकी होता है. क़ानून की रक्षा और जनता की सुरक्षा मुख्य कर्तव्य होता है. योग्यता, कर्मठता और अनुभव पोस्टिंग का आधार होता है. ऊंच प्राथमिकता देते हुए पोस्टिंग का यह आधार होना चाहिए. जो भी पुलिसकर्मी क़ानून के राज के लिए इस मापदंडो पर खारा उतरता है उसकी पोस्टिंग हर थानो में होती आ रही है और होनी भी चाहिए. यह आदेश पुलिसकर्मियों के एक ख़ाकी रंग में रंगे पुलिसकर्मी के कार्य भावना को प्रभावित करेगा. बिहार पुलिस विभाग बेहतर पुलिसिंग के लिए प्रयोगशाला बन गया है. नित्य भांति – भांति के आदेश निकलते रहते है. परंतु उक्त आदेशों की समीक्षा भी हमेशा होनी चाहिए कि उक्त आदेश से बेहतर पुलिसिंग में क्या बदलाव आया या नही आया.



बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि क्या यह आदेश केवल थानेदार या थाने पर लागू होगा. क्या यह नियम जिले के या पुलिस विभाग के वरीय विभिन्न पदों पर भी लागू होगा. बिहार पुलिस एसोसीएशन का सुझाव और माग है कि इस तरह के आदेश से पुलिस विभाग को बचना चाहिए. ख़ाकी रंग में सभी देश – बिहारी के पुलिसकर्मी एक परिवार के रूप में एक दूसरे के प्रति प्रेम – भाईचारा और अटूट पुलिस परिवारिक बंधन के गांठ में बंधे हैं. अटूट बंधन इस तरह वर्ग आधार पर पोस्टिंग से पुलिसकर्मी परिवार मानसिक रूप से कमजोर होगा.

मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रेम एकता के साथ ख़ाकी का एक स्वरूप है जो क़ानून की रक्षा और जनता की सुरक्षा के लिए अपना खून – पसीना बहा कर जान की बाज़ी लगा देते है. पुलिसकर्मी ख़ाकी पहन कर क़ानून की रक्षा और जनता की सुरक्षा के लिए संकल्प – सपथ लिए है. उस सपथ पथ पर हमेशा चलते हुए अपना कर्तव्य धर्म निभाते है. ख़ाकी रंग पुलिस परिवार की ख़ूबसूरती है और पुलिस विभाग के मूल पहचान है.