बांझपन की दोषी सिर्फ महिला नहीं, पुरुषों की भी है समस्या, आयुर्वेद में करायें सफल इलाज

लंबे समय तक साथ रहकर भी यदि किसी दंपत्ति को चाहकर भी संतान पैदा नहीं होती है तो ऐसी स्थिति को निसंतानता (infertility)कहते हैं. बांझपन एक आम समस्या है. भारतीय परिवेश में यदि कोई स्त्री विवाहोपरांत दो वर्ष में गर्भवती नहीं हो पाती तो परिवार की दूसरी स्त्रियां उसका जीना दूभर कर देती है. इस समस्या से मुक्ति पाने के लिये जब महिलाओं को चिकित्सकों के यहां जाना पड़ता है, तो उन्हें अनेक वैज्ञानिक परीक्षणों से गुजरना पड़ता है.

हमारे यहां पर बांझपन की बारंबारता 5-7% दम्पतियों में है.इस स्थिति का कारण व दोष पति या पत्नी व दोनों में ही हो सकता है. परीक्षण व अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि एक तिहाई केसेज (30-35%) में दोष पति में और एक तिहाई (30-35%) केसेज में पत्नी व शेष एक तिहाई (30-40%) में दोष दोनों में होता है. अतः हर केस में सिर्फ पत्नी में दोष मानकर जांच करना सही नहीं है. पति-पत्नी दोनों में कारण जानने हेतु जांच साथ-साथ मे करनी चाहिये.

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पुरुषों में कारण –

असामान्य शुक्राणु : उत्पादन एवं विकास –

  • संतान उत्पत्ति के लिए पुरुषों में आवश्यक मूल बीज शुक्राणु होते हैं और उनका उत्पादन और विकास टेस्टिस में होता है. टेस्टिस एक जोड़ा अंग है, अर्थात एक दाएं और एक बांये तरफ होता है. वृषण धड़ के अग्रिम निचले भाग के ब्राह्म चर्म व कनेक्टिव टिशू से बनी ढीली थैलुनुमा अंग दोनों तरफ लटकते हैं, जिसे स्क्रोटेम कहते हैं. यह अंग पेट के बाहर रहने के कारण इसमें तापमान शरीर के अन्य भाग के तापमान से 2 डिग्री कम रहता है, जो शुक्राणु उत्पादन के लिए आवश्यक है.
  • बहुत दिनों तक परिवार नियोजन के साधनों या ओषधियों को प्रयोग में लाने से भी बांझपन की संभावना बढ़ जाती है.
  • पुरुष लिंग का जन्मजात अपूर्ण विकास, अत्यधिक मानसिक तनाव, संभोग इच्छा व शक्ति की क्षीणता, शुक्राणु नली का ट्यूबरक्लोसिस रोग, मधुमेह/डायबिटीज, कुपोषण से शुक्राणु कम बनते हैं. शिश्न की विकृतियों से संभोग में बाधा उत्पन्न होती है. अतः गर्भ स्थापित होने का प्रश्न ही नहीं उठता.
  • नपुंसकता में संभोग क्रिया संपादित करने में असमर्थता होती है अथवा शिश्न के योनि में प्रविष्ट होने के बाद ही वीर्य स्खलन हो जाता है. ऐसी स्थिति में वीर्य स्त्री की योनि की पश्च तोरिनिका (posterior fornix) में जमा नहीं होता, जिससे स्पर्म गर्भाशय ग्रीवा नली से होकर ऊपर चढ़कर गर्भाशय में और फिर डिम्बवाहिनियों के पाशवीर्य शिरों तक नही पहुंच पाते. अतः गर्भाधान नही होता और पुरुष बांझ होता है.
  • शुक्राणुओं की गतिशीलता – शुक्राणुओं को गर्भाशय ग्रीवा से चलकर गर्भाशय को पार करते हुए डिम्बवाहिनि (फैलोपियन ट्यूब्स) में पहुंचना होता है. जहां पर यह डिम्ब (ovum) को गर्भित करता है. अतः स्पर्मस् को चलायमान या गतिशील होना चाहिए. सामान्यतः 80 प्रतिशत शक्राणु गतिशील होते हैं. यदि वीर्य की प्राप्ति के 3 घंटे के अंदर किये गए परीक्षण में 60 प्रतिशत से भी कम शुक्राणु चलायमान पाए जाते हैं तो भी संतानोत्पत्ति नहीं होती. यद्यपि केवल एक ही स्पर्म डिम्ब को गर्भित करता है.

स्त्रियों के कारण –

योनि के रोग – योनि के बहुत से रोग, जैसे – योनि द्वार का तंग होना, योनि शोथ, कृच्छमैथुन, योनिस्राव की अम्लता बढ़ जाने से भी गर्भधारण नहीं कर सकते हैं.

  • गर्भाशय ग्रीवा के विकार, गर्भाशय के विकार, डिम्बवाहिनियों के विकार, डिम्बग्रंथियों के रोग, पिट्यूटरी थायरॉइड, मानसिक कारण आदि कारणों से उत्पन्न बंध्यता को प्राथमिक विकृतजन्य बंध्यता कहते हैं.

स्त्रियों में सामान्य कारण एक दृष्टि में –

1. ओवम उत्पत्ति दोष
2. विभिन्न अन्तःग्रंथियों की विकृति दशायें जैसे – थाइराइड ग्रंथि की क्षीणता.
3. ओवरी की विकृति दशायें
4. जीर्ण रोग
5. मधुमेह
6. फैलोपियन ट्यूब में अनेक कारणों से रुकावट
7. गर्भाशय और उसके आसपास के चिरकारी शोथ
8. गर्भाशय की अनेक विकृतियां
9. ग्रीवा व योनि की रचनात्मक विकृतियां
10. ढलती आयु व मानसिक तनाव
11. पति पत्नी में असंयोज्यता आदि कारणों से भी बांझपन रोग होता है.

चिकित्सा – स्त्री में बंध्यता की चिकित्सा निम्न प्रकार से की जाती है

  1. सामान्य स्वास्थ्य में सुधार लाना.
  2. उन स्त्रियों में डीमबोत्स्रजन को प्रेरित करना, जिनमे बंध्यता का कारण डिम्ब का उत्सर्जन नहीं होता है.
  3.  शल्यक्रिया के द्वारा डिम्बवाहिनियों के अवरोधन को दूर करना.
  4. अन्य कारकों की चिकित्सा करना जो बंध्यता को उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी होते हैं.

सामान्य स्वास्थ्य में सुधार लाना –

  • भोजन में पौष्टिक आहार, जैसे – दूध,मांस,मछली,अंडा,दालों आदि का तथा टॉनिक का सेवन कराके स्त्री के सामान्य स्वास्थ्य में सुधार लाना चाहिए.
  • रक्त की कमी में स्त्री को लोहयुक्त भोज्य पदार्थों, जैसे – पालक, पत्तागोभी आदि सब्जियों तथा सेब आदि फलों का सेवन करने का परामर्श देकर एवं लौह टॉनिक निर्धारित करके रक्त की कमी को दूर करना चाहिए.
  • यदि स्त्री में मोटापा हो तो उसे दूर करने का उपाय सुझाने चाहिये. साथ ही कोई जीर्ण संक्रमण अथवा कृमि रोग है, तो उसे हरसंभव दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए.
  • बंधत्व के लिए महिला के साथ-साथ पुरुष भी बराबर के हिस्सेदार होते हैं. इसलिए चिकित्सा प्रारंभ करने के पूर्व दोनों की गहन जांच परीक्षण अनिवार्य है. जिस किसी में रोग का कारण समझ में आ जाये उसी तरह चिकित्सा की शुरुआत करें. आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में बांझपन का सफल इलाज है.

इससे जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए पटना के जाने-माने सेक्स रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरेन्दु पाण्डेय (बी.ए. एम.एस) से संपर्क किया जा सकता है. उनका कांटेक्ट नंबर है : 9431072749/9835081818. उनके क्लिनिक का पता है : मनोरमा मार्केट, बंगाली अखाड़ा, डी एन दास लेन, लंगर टोली, पटना-4, बिहार. आप इनकी वेबसाइट www.sexologistinpatna.com पर जाकर भी काफी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर सकते हैं.

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