बीबीसी बिहार बोले में JDU की साफ़ बात – धारा 370 और राम जन्म भूमि के एजेंडे के साथ नहीं

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार 15 मार्च को बीबीसी हिन्दी सेवा के ‘बोले बिहार’ कार्यक्रम में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने बिहार और लोकसभा चुनाव से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा की.  बीबीसी का यह मंच परिचर्चा में शामिल होने वाले नेताओं और विषय के लिहाज़ से काफ़ी दिलचस्प रहा. इसमें जनता दल यूनाइटेड, कांग्रेस, राजद, भाजपा के नेताओं और सीपीआई के युवा नेता कन्हैया कुमार से तीखे सवाल पूछे गए. परिचर्चा के एक सत्र में राष्ट्रीय जनता दल के नेता अब्दुल बारी सिद्धीक़ी ने अपनी ही पार्टी के नेता तेजस्वी यादव के बारे में कहा, “मैं कहूंगा कि तेजस्वी को सत्ता विरासत में मिली थी.”

जब उनसे पूछा गया कि युवाओं को राजनीति में मौक़ा क्यों नहीं मिल रहा है, तो सिद्दीक़ी ने कहा,“जो युवा अनुभव के साथ नहींआते वे बोझ बन जाते हैं”. इसके बाद जब उनसे पूछा गया क्या तेजस्वी बोझ हैं? तो अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने कहा, “मैं कहूँगा कि तेजस्वी को सत्ता विरासत में मिली थी.”

कन्हैया कुमार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया कुमार ने इस लोकसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी और बिहार में बनने वाले महागठबंधन में उनकी अपनी पार्टी की भूमिका पर साफ़ साफ़ कुछ नहीं कहा लेकिन कहा कि नरेंद्र मोदी के विरोध करने वाले एकजुट होकर नरेंद्र मोदी को हरा सकते हैं और ये बात कई बार जाहिर हो चुकी है.

उनसे जब बीबीसी की भारतीय भाषाओं की प्रमुख रूपा झा ने यह सवाल पूछा कि आपकी सोशल मीडिया टाइमलाइन मोदी विरोध से भरी पड़ी रहती है आख़िर नरेंद्र मोदी से आपको क्या दिक्कत है? कन्हैया कुमार ने कहा, “मुझे नरेंद्र मोदी से कोई दिक्कत नहीं है. जिस पद मोदी बैठे हुए हैं, उस पद की गरिमा का ख़याल है. मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं है. मेरी लड़ाई संविधान के मूल्यों को स्थापित करने को लेकर है.”

बीबीसी हिंदी की वरिष्ठ संवाददाता सरोज सिंह के साथ हुई बातचीत में अब्दुल बारी सिद्दीक़ी के साथ कांग्रेस की रंजीत रंजन और जनता दल यूनाइटेड के राजीव रंजन शामिल हुए.

अब्दुलबारी सिद्दीक़ी ने कहा,“बिहार लंबे समय से पिछड़ा राज्य है, उसकी लगातार उपेक्षा हो रही है. मुझे लगता है कि जब तक बिहार से पीएम नहीं होगा तब तक इस राज्य की हालत नहीं बदलेगी”.

कांग्रेस की रंजीत रंजन ने राहुल गांधी पर नरम हिंदुत्व के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा- बीते पचपन सालों में जवाहर लाल नेहरू से सोनिया गांधी तक मंदिर गईं लेकिन मीडिया ने उन्हें नहीं दिखाया. अब राहुल गांधी मंदिर जा रहे हैं तो मीडिया उन्हें दिखावा बता रही है.

वहीं जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा- हम भाजपा के धारा 370 और राम जन्म भूमि के एजेंडे के साथ नहीं है, राज्य में कानून का शासन है और हिंदुत्व के नाम हिंसा को अंजाम नहीं दिया जा सकता.

बीबीसी हिंद के संपादक मुकेश शर्मा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की भूमिका पर चर्चा की. इस मुद्दे पर शामिल परिचर्चा में राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह और जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता अजय आलोक ने हिस्सा लिया.

शिवानंद तिवारी ने मौजूदा बिहार सरकार और केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाती. ऐसा लगता है कि सरकार का विश्वास लोकतंत्र और संविधान में नहीं है. सरकार एक तबके को टार्गेट कर रही है, पाकिस्तान भेज रही है. इससे समाज में तनाव पैदा हो रहा है. इस सरकार को हटाया जाना चाहिए.”

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वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेशसिंह ने कहा कि केंद्र सरकार, बिहार सरकार के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. उन्होंने कहा, केंद्र सरकार उसे उसका हिस्सा नहीं दे रही है. पटना यूनिवर्सिटी की हालत ख़राब है, मुख्यमंत्री गिड़गिड़ाते रहे लेकिन पीएम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की बात अनसुनी कर दी. किसानों का धान नहीं ख़रीदा जा रहा है, बंद पड़ी चीनी मिलें नहीं खुल रही हैं. राष्ट्रीय नीतियाँ यहाँ लागू नहीं होती हैं.”

वहीं जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा, सब को सत्ता चाहिए, अपने परिवार और घर भरने के लिए चाहिए. कांग्रेस विरोध कर के लालूजी की पार्टी ने राजनीति चमकाई, अब उन्हीं की गोद में जा बैठे हैं. बिहार के किसानों की बात हो रही है लेकिन यह देखना चाहिए कि बिहार के किसान आत्म हत्या नहीं करते.”

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इससे पहले बिहार के अधिवेशन भवन में जनता दल यूनाइटेड के नेता और बिहार विधानसभा के स्पीकर विजय चौधरी ने बीबीसी के कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा, पत्रकार प्रजातंत्र में पुरोहित की भूमिका निभाते हैं, वही चुनाव के अनुष्ठान संपन्न कराते हैं.

उन्होंने इसके बाद नोटा के प्रावधान पर सवाल उठाते हुए कहा, एक बड़ी गड़बड़ी है नोटा, चुनाव इलेक्शन होता है, रिजेक्शन नहीं. नोटा को हटाया जाना चाहिए. मतदाता का शिक्षण होना चाहिए, उन्हें अच्छे उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करना चाहिए.

बीबीसी हिंदी के रेडियो संपादक राजेश जोशी ने सीपीआई-एमएल की मीना तिवारी और भारतीय जनता पार्टी की अमृता राठौर और वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर ने हिस्सा लिया. राजेश जोशी ने बिहार की राजनीति में महिलाओं की भूमिका और राजनीतिक दलों में उनकी प्रतिनिधत्व पर सवाल उठाए.

बीबीसी हिंदी के पंकज प्रियदर्शी ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री विनोद नारायण झा, राष्ट्रीय जनता दल के महासचिव आलोक मेहता और जनता दल यूनाइटेड की अंजुम आरा शामिल हुईं. बिहार के अच्छे दिन कब आएंगे, इस मुद्दे पर विनोद नारायण झा ने कहा, नीतीश कुमार के नेतृत्व और बीजेपी के साथ से बिहार लगातार बढ़ रहा है. हालांकि आलोक मेहता ने कहा कि इस सरकार में समाज में सबको सही भागीदारी और हिस्सेदारी नहीं मिल रही है.

बीबीसी हिंदी के इकबाल अहमद ने बीजेपी के संजय पासवान, जेडीयू के अशोक चौधरी और कांग्रेस के शकील अहमद खान ने राजनीति में मुसलमान और दलित क्या सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गए हैं, के मुद्दे पर बातचीत की.

बीबीसी हिंदी की ओर इस परिचर्चा के विभिन्न सत्रों को एक साथ सोशल मीडिया से कंपेयर सर्वप्रिया सांगवान ने किया. इस परिचर्चा में पटना यूनिवर्सिटी, पटना वीमेंस कालेज और एमिटी यूनिवर्सिटी के मास कम्यूनिकेशन के छात्र छात्राएं शामिल हुए.

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