सोशल : लालू-राबड़ी शासन की कड़वी यादें ताजा कर रही BJP, बता रही है बिहार के गद्दार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार भाजपा ने सोशल मीडिया में राजद पर हमला करने का नया तरीका खोज निकाला है. पार्टी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ‘लालू-राबड़ी शासनकाल की कड़वी यादें’ नाम से सीरीज चला रही है. इस सीरीज में आज शनिवार की रात तक कुल छह ट्वीट किये गए हैं. भाजपा ने इस सीरीज के लिए हैशटैग तय किया है Traitors Of Bihar (बिहार के गद्दार). कई ट्वीट में राजद सुप्रीमो लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की तस्वीरों के साथ नब्बे के दशक में बिहार के आपराधिक इतिहास के आंकड़े दिए गए हैं. आगे एक-एक कर देखिये भाजपा के ये छह ट्वीट.

पहले ट्वीट में भाजपा ने लिखा है – लालू-राबड़ी शासनकाल ने बिहार को न सिर्फ विकास से दूर रखा, बल्कि अपराध व भ्रष्टाचार को संरक्षण देकर इसे रसातल में पहुंचा दिया. बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए अतीत से सबक लेना जरूरी है. हम बताएंगे कुछ ऐसी बातें, जो आपको जानना चाहिए.

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दूसरा ट्वीट : 2000 से 2005 तक पांच वर्षों में 18 हजार से अधिक हत्याएं हुईं. यानी 15 वर्षों में 50 हजार से ज्यादा लोग बेमौत मार दिये गये थे. हत्याएं सांसदों-विधायकों के इशारे पर भी होती थीं. सांसद शहाबुद्दीन के आतंक को कौन भूल सकता है!

तीसरा ट्वीट : डॉक्टर, इंजीनियर, बिजनेसमैन अपहर्ताओं के खास निशाने पर थे. ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक 1992 से 2004 तक बिहार में अपहरण के 32,085 मामले सामने आये. कई मामलों में फिरौती देने के बाद भी बंधकों को मार दिया गया.

चौथा ट्वीट : तब बिहार का चप्पा-चप्पा दिनदहाड़े अपहरण, हत्या, बलात्कार, नरसंहार, चोरी-डकैती और भ्रष्टाचार से त्रस्त था. नौकरशाहों और अपराधी गिरोहों के साथ सांठगांठ कर राजद के प्रमुख नेताओं ने इसे खुला संरक्षण दिया था.

पांचवां ट्वीट : अपराधियों द्वारा अपहरण का कारोबार तो फल-फूल रहा ही था, पुलिस भी जुल्म ढाने लगी थी. 1994 से 2005 के बीच पुलिस हिरासत में 86 मौतें हुई. यह आंकड़ा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का है. इन मौतों के लिए किसे जिम्मेदार माना जाये?

छठा ट्वीट : मई 2003 में दिल्ली में इंडिया टुडे की ओर से हुए सम्मेलन में ‘विकास में अव्वल’ राज्यों को पुरस्कृत किया गया. इसमें बिहार को हर मामले में फिसड्डी बताया गया था. सम्मेलन में मौजूद लालू प्रसाद ने गुस्से में कहा, यह एक साजिश है.

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