हड़ताल पर गए संविदा वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक अच्छी और एक बुरी खबर

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अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताली कर्मी

पटना : बिहार सरकार ने सूबे में हड़ताल पर गए संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को फरमान सुना दिया है. सभी को शनिवार तक हड़ताल ख़त्म कर काम पर वापस लौटने को कहा गया है. अन्यथा इनकी संविदा को समाप्त कर सेवा खत्म कर दी जायेगी. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने गुरूवार को यह जानकारी दी है. इस दौरान उन्होंने सभी कर्मियों को यह आश्वासन भी दिया कि सरकार उनकी कई मांगें मानने के लिए तैयार है. महाजन ने बुधवार को एक पत्र जारी कर सभी जिलों के जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को इनपर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

महाजन ने आज बताया है कि बिहार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत मात्र 17 हजार स्वास्थ्य कर्मी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं. उन्होंने कर्मियों को राहत देते हुए कहा कि जो कर्मी 3 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हैं उनके मानदेय में 10 प्रतिशत वृद्धि और जो कर्मी 5 वर्ष सेवा पूर्ण कर चुके हैं उनके मानदेय में 15 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी. इसके साथ ही कर्मियों को अतिरिक्त कार्य करने पर अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.



स्वास्थ्य विभाग ने संविदा पर कार्यरत कर्मियों द्वारा उन्हें स्थायी करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया. कहा कि कर्मियों को किसी भी हालत में स्थायी नौकरी नहीं दी जाएगी, क्योंकि NHM पर 60 प्रतिशत राशि भारत सरकार और 40 प्रतिशत राशि बिहार सरकार खर्च करती है. उन्होंने कहा कि संविदाकर्मियों की संविदा अवधि को विस्तार कर 3 वर्ष तक किया जाएगा. साथ ही 60 की जगह 65 वर्ष तक संविदा कर्मियों की सेवा ली जाएगी.

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गौरतलब है कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संविदा पर बहाल कर्मी पिछले 3 दिनों से अपने लिए ‘समान काम-समान वेतन’ की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं. लेकिन अब बिहार सरकार ने इनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय ले लिया है. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन ने इससे संबंधित आदेश भी बुधवार को सभी जिलों के जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को जारी कर दिया था. सोमवार 4 दिसंबर से हड़ताल पर गए इन कर्मियों में संविदा पर बहाल नर्सिंग स्टाफ, एकाउंटेंट्स, लैब तकनीशियन और हेल्थ मैनेजर आदि शामिल हैं. इन सभी की नियुक्ति नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत की गई थी.