‘अपनी योजनाओं में बिहार का हिस्सा बढ़ाए केंद्र, सड़कों की देखरेख पर खर्च भी बाटें’

SUMO-DELHI11
केंद्रीय वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेते बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार के डिप्टी सीएम सह फाइनेंस मिनिस्टर सुशील कुमार मोदी ने आज गुरुवार को देश की राजधानी दिल्ली में सभी स्टेट्स के फाइनेंस मिनिस्टर्स की मीटिंग में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने बिहार की ओर से केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी. बजट पूर्व इस मीटिंग की अध्यक्षता सेंट्रल फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने की. डिप्टी सीएम ने इस दौरान देश का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल की जगह 1 जनवरी से शुरू करने की मांग भी रखी.

बैठक के बाद सुशील मोदी ने बताया कि उन्होंने मुख्य तौर पर पांच मांगें केंद्र के सामने रखी हैं. इनमें वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल की जगह 1 जनवरी से प्रारंभ करने, केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश बढ़ाने, सभी तरह की सामाजिक पेंशन योजना की राशि में 500 रुपये की बढ़ोत्तरी करने, आयकर की सीमा बढ़ाने व आपदा राहत कोष से संबंधित सुझाव दिए हैं.

SUMO-DELHI

मोदी ने इस दौरान आयकर की सीमा 2.5 लाख से बढ़ा कर 3 लाख करने, 80सी के तहत आयकर छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ा कर 2 लाख करने, आयकर से छूट के लिए 10 लाख की ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ा कर 20 लाख करने तथा बिहार में चल रही रेल परियोजनाओं व प्रधानमंत्री पैकेज की योजनाओं को समय से पूरा करने के लिए आगामी बजट में पर्याप्त आवंटन करने का सुझाव भी दिया है. उन्होंने केन्द्र प्रायोजित योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास व सड़क योजना व जीविका आदि में केन्द्रांश बढ़ाने के साथ ही सड़कों की देखरेख पर खर्च बांटने का भी सुझाव दिया.

मोदी ने कहा कि अब तक जो 100 प्रतिशत राशि राज्य को खर्च करनी पड़ती है, उसके लिए 60:40 का केन्द्रांश-राज्याश होना चाहिए. बाढ़-सुखाड़ व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हर साल जुझने वाले बिहार के लिए उन्होंने आपदा प्रबंधन कोष को दोगुना करने, 14वें वित आयोग की अनुशंसा के आधार पर केन्द्र व राज्य के अंषदान को वर्तमान 75ः25 की जगह 90ः10 करने का सुझाव दिया.

वित्त मंत्री अरुण जेटली 2018-19 के आगामी बजट के संबंध में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ पूर्व-बजट बैठक की अध्यक्षता करते हुए

उन्होंने आगे सुझाव दिया कि केन्द्रीय करों का हिस्सा, जो राज्यों को अब तक प्रत्येक महीने की पहली तारीख को मिलती थी, उसे अब केन्द्र तीन महीने पर 15 तारीख को देने का निर्णय करने जा रही है. उससे बिहार जैसे राज्यों को वेतन-पेंशन के भुगतान में काफी परेशानी होगी. इसलिए पहले की तरह राज्यों को केन्द्रीय करों का हिस्सा प्रत्येक महीने की पहली तारीख को देने की व्यवस्था को कायम रखा जाय.

सुशील मोदी ने राजद को लिया आड़े हाथों, लालू प्रसाद पर भी मारा ताना
UP में DGP के बाद अब EC भी बिहारी, IAS मनोज के हाथ चुनावों की कमान

About Anjani Pandey 572 Articles
I write on Politics, Crime and everything else.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*