‘शिक्षा मंत्री को अपने विभाग का पता नहीं, शिक्षकों को गुमराह कर रहे हैं’

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बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा

पटना : बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने आज मंगलवार 28 नवंबर को एक बार फिर शिक्षकों से बातचीत करने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि नियोजित शिक्षकों के ‘समान काम, समान वेतन’ मसले पर सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले बिहार सरकार शिक्षक संगठनों से बात करेगी. शिक्षा मंत्री ने यह बयान आज बिहार विधानपरिषद में एक सवाल के जवाब में दिया है. हालांकि उनके इस बयान को विरोधाभासी बताया जा रहा है.

शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने यह बयान आज विधानपरिषद में MLC नवल किशोर यादव के सवाल के जवाब में दिया है. यादव के सवाल के जवाब में मंत्री वर्मा ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले बिहार सरकार सभी शिक्षक संगठनों से बात करेगी. उन्होंने कहा कि शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों से बात करने के बाद ही राज्य सरकार इस मामले में आगे बढ़ेगी. बता दें कि बीते 31 अक्टूबर के दिन पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी नियोजित शिक्षकों को सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन का निर्धारण करने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय ले लिया था.

आज मंगलवार को शिक्षा मंत्री के ताजा बयान के बाद जो विरोधाभास सामने आ रहा है, वो ये कि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन सोमवार 27 नवंबर को ही हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने दिल्ली जा चुके हैं. विभाग ने इस आशय का एक आदेश भी जारी किया है. इस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि विभाग के प्रधान सचिव को नियोजित शिक्षकों के ‘समान कार्य के बदले समान वेतन के पटना हाईकोर्ट के निर्देश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में विशेष अवकाश याचिका (SLP) दायर करने सोमवार के अपराहन में जाना है. वे गुरुवार 30 नवंबर के पूर्वाहन तक वापस पटना लौटेंगे. इस दौरान आर एल चोंग्थू, शिक्षा विभाग के सचिव, प्रधान सचिव के पदभार में रहेंगे.

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शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश

इस संबंध में माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्री पर सदन के साथ ही बिहार के सभी नियोजित शिक्षकों और जनता को भी गुमराह करने का आरोप लगाया है. संघ के सचिव पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि जब उनके ही विभाग के प्रधान सचिव सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पहले ही दिल्ली रवाना हो चुके हैं, तो फिर अब बातचीत का क्या औचित्य है. उन्होंने कहा – शिक्षा मंत्री के इस बयान का अर्थ है कि उनके विभाग में क्या हो रहा है, यह उन्हें ही पता नहीं है. क्या विभाग में बिना उनकी सहमति के निर्णय लिए जा रहे हैं?

गौरतलब है कि सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले के बाद सोमवार 6 नवंबर को माध्यमिक शिक्षक संघ ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट फाइल कर दिया था.

 

 

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