बिहार के गोरेलाल गानों की धुन पर अपनी नाक से बजाते हैं बांसुरी, लोग बुलाते हैं बांसुरी बाबा

लाइव सिटीज डेस्क : बांसुरी एक ऐसा वाद्ययंत्र है, जिसका उल्लेख रामायण से महाभारत तक की कथाओं में मिलता है. श्रीकृष्ण के इस पसंदीदा वाद्ययंत्र को बजाना बड़े ही हुनर का काम है. हम जब भी बांसुरी की बात करते हैं तो हमारे जेहन में हरि प्रसाद चौरसिया का नाम अपने आप उभर आता है, लेकिन यहां हम उनकी नहीं बल्कि बांसुरी के एक दूसरे उस्ताद की बात कर रहे हैं.

जी हां, हम बात कर रहे हैं गोरेलाल कव्वाल की. बांसुरी के ये ऐसे फनकार हैं, जो मुंह से नहीं बल्कि नाक से बांसुरी बजाते हैं. बिहार के लखीसराय जिले के बडहिया प्रखंड का सुदूर टाल क्षेत्र के गिरधरपुर पंचायत के मनोहरपुर गांव का गोरेलाल कव्वाल उर्फ बांसुरी बाबा कला और अद्भुत प्रतिभा के धनी हैं. गोरेलाल कव्वाल नाक से बांसुरी बजाकर लोगो को अचंभित कर देते हैं. कई सुरों व गानों की धुन पर जब वे नाक से बांसुरी बजाते है तो लोग उन्हें देखकर दांतो तले उंगली दबा लेते हैं.

क्या कहते हैं गोरेलाल कव्वाल

गोरेलाल कव्वाल की मानें तो बचपन से उनकी गीत-संगीत मे रुचि थी. मुंह से बांसुरी बजाते लोगों को देख उन्होंने कुछ अलग करने की बात सोचकर नाक से बांसुरी बजाने की कला सीखने मे लग गए और विगत कई वर्षों से इस कला से सबको चकित कर रहे हैं. गरीबी के चलते अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अपने गांव मनोहरपुर मे ही चाय – नाशता का दुकान खोल अपने जिंदगी मजे से जी रहे हैं.

अद्भुत प्रतिभा से अपने इलाके का नाम रौशन कर रहे हैं

स्थानीय भारती प्रसाद की मानें तो गोरेलाल भले ही पढ़े लिखे नहीं हैं लेकिन अद्भुत प्रतिभा से अपने इलाके का नाम रौशन कर रहे हैं. गोरेलाल तबला, हारमोनियम, नाल बजाने मे महारत हासिल है.

अपने गीत-संगीत का प्रर्दशन छोटे-छोटे शहरो मे कई बार कर चुके हैं

फिलहाल गोरेलाल अपने गीत-संगीत का प्रर्दशन छोटे-छोटे शहरो मे कई बार कर चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी प्रतिभा को उचित मुकाम नहीं मिल पाया. सरकारी मदद मिले तो शायद गोरेलाल की प्रतिभा देश मे निखर पाए.

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