बिहार सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी रेट पर ही बिकेगा बालू, नहीं होगी कालाबाजारी

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लाइव सिटीज डेस्क : बालू की कालाबाजारी रोकने के लिए बिहार सरकार अब पूरी तरह एक्टिव हो गई है. राज्य में बालू की बढ़ती कीमत और कालाबाजारी को रोकने के लिए मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और सभी जिलों के डीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) की. उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि पूरे राज्य में बालू सरकार की तरफ से निर्धारित रेट पर ही बिकेगा. सभी जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गठित मॉनीटरिंग कमेटी को पूरी तरह से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है और बालू की कीमत, कालाबाजारी समेत अन्य मनमानी पर निरंतर नजर रखने के लिए कहा गया है. ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और इसकी जानकारी मुख्यालय को भी देने के लिए कहा गया है.

मॉनीटरिंग सीधे डीएम की देखरेख में

उन्होंने पटना, सारण और वैशाली जिलों के डीएम को दोनों महत्वपूर्ण पुलों जेपी सेतु और गांधी सेतु को जाम मुक्त रखने के साथ निर्धारित मानक के अनुरूप ही गाड़ियों का परिचालन कराने के लिए कहा. सभी डीएम को अपने-अपने जिलों में बालू विक्रेता के साथ बैठक कर उनकी समस्या जानने और इसे जल्द दूर करने के लिए भी कहा गया है. बालू महंगा नहीं बिके, इसके लिए चुस्त मॉनीटरिंग की व्यवस्था सीधे डीएम की देखरेख में सभी जिलों में की जायेगी.

बालू को यूपी ले जाने पर प्रतिबंध

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में कहा गया है कि यूपी के लिए बालू का निर्यात नहीं किया जायेगा. इसके लिए ई-चालान बंद कर दिया गया है. यूपी बालू ले जाने के लिए ई-चालान निकालने पर रोक लगा दी गयी है. बिहार में बालू की मांग को पूरा करने के लिए ऐसा किया गया है. साथ ही यूपी से सटे सभी सीमावर्ती जिलों के खनन पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे इस बात की हमेशा चौकसी बनाये रखे कि कोई बालू लदा ट्रक उनके जिले से पार नहीं हो. अगर कोई ट्रक पार होता है, तो संबंधित जिले के खनन पदाधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

उत्तर बिहार में महंगा है बालू

वीसी में समीक्षा के दौरान यह बात सामने आयी कि उत्तर बिहार में इन दिनों बालू पांच से सात हजार रुपये प्रति सीएफटी बिक रहा है. इसका मुख्य कारण ट्रांसपोर्टेशन महंगा होना है. जेपी सेतु और गांधी सेतु से वाहन जाने की अनुमति नहीं होने से बालू लदे सभी ट्रक या ट्रैक्टर छपरा सेतु से जाते हैं. इसमें दो दिन तक का समय लग जाता है. इससे उत्तर बिहार में बालू की किल्लत होने के साथ-साथ कीमत भी बढ़ गयी है. इसे दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने कई ठोस निर्देश दिये. सभी जिलों के डीएम को इसकी निरंतर मॉनीटरिंग करने को कहा गया है.

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