गरुड़ कमांडो ज्योति को मरणोपरांत मिला अशोक चक्र सम्मान, भरी रोहतास जिले की टीस

सासाराम (राजेश कुमार) : महज दो महीने पूर्व रोहतास के बदिलाडीह गाँव के तेज नारायण सिंह के कंधे पर उनके जवान बेटे ज्योति प्रकाश निराला की अर्थी उठी थी तो गाँव ही नहीं पूरा जवार सिहर उठा था. हजारों की जमा भीड़ की आँखें स्वतः नम हो गयी थीं. गाँव में मौजूद जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी भी रो पड़े थे. कश्मीर के बांदीपोरा सीमा पर हुए मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराने के बाद शहीद हुए वायुसेना का के गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला को देश के 69 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर मरणोपरांत सेना का सर्वोच्च “अशोक चक्र” सम्मान मिलने की खबर मिलते बदिलाडीह को कौन कहे जिले के हर गाँव के लोगों की मानों शौर्यमयी खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. सरकार के इस निर्णय ने एक तरह से लोगों की टीस को मानो भर दिया हो.

पिछले 17-18 नवम्बर को देश की सीमाओं की रक्षा में अपनी जान न्योछावर करने वाले इस तेजनारायण सिंह के एकलौता पुत्र ज्योति प्रकाश निराला का पार्थिव शरीर जब गाँव में पहुंचा था, तो हर जुबान पर मुठभेड़ में आतंकियों के खात्मा करने वाले ज्योति की वीरता की गाथा थी. आज वीरता के मिले सम्मान की बातें चर्चा की केंद्र बिंदु बनी हुई है.

शहीद के परिजन

मिली जानकारी के अनुसार सम्मान के लिए हुए चयन की सरकारी स्तर पर चार दिनों पहले शहीद के परिवार को मिली सूचना के बाद उसकी पत्नी अपने 3 वर्षीया पुत्री जिज्ञासा और पिता तेजनारायण सिंह के साथ दिल्ली ले जाया गया जहां उन्हें सेना के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति के हांथो सम्मान ग्रहण करना था.

दिल्ली ले जाकर उन्हें एक पांच सितारा होटल में ठहराया गया है. दिल्ली में ठहरे शहीद के परिजनों से आज मिले काराकाट के पूर्व विधायक राजेश्वर राज ने फोन पर बताया के शाहीद के परिजन ज्योति को मिले सर्वोच्च सैनिक सम्मान को अपने पति और बेटे की शहादत को मिला उचित सम्मान बताते हैं. उनकी पत्नी अपनी एकलौती बेटी को भी सेना में अफसर बनाना चाहती है. ताकि देश की रक्षा में अपनी सेवाएँ दे सके.

शहीद को मिले सम्मान राष्ट्रपति के हाथो ग्रहण करती पत्नी

गाँव के युवक धर्मेन्द्र का मानना है कि, पैसों की बदौलत शोहरत जुटाने वाले हमारे शहीद दोस्त के सामने धुल हैं. दुःख की बात है कि कम उम्र में उसने साथ छोड़ दिया. पर उसकी शहादत का लोगों और सरकार ने जो सम्मान दिया वह सबको नसीब होने वाला कहाँ. उन्होंने कहा कि सरकार के इस सम्मान के निर्णय से युवाओं में देश की रक्षा के लिए हस्ते-हँसते जान न्योछावर करने का जज्वा तो जागेगा.

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