अब बिहार में होमगार्ड के जवानों को करना होगा यह भी, मिली है नई ड्यूटी

पटना : विधि-व्यवस्था से लेकर चौक-चौराहों पर यातायात व्यवस्था संभालने में महत्वूपर्ण योगदान देने वाले होमगार्ड के जवान अब रेलवे की भी सहायता करेंगे. मानवरहित फाटक से लेकर भीड़भाड़ वाले व्यस्त मार्गों वाले फाटकों पर इनकी सेवाएं ली जायेंगी. इसके लिए रेलवे ने पहल की है. समस्तीपुर रेल मंडल ने गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय को इस बाबत पत्राचार भी किया है. इसको गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय के अधिकारियों ने काम शुरू कर दिया है. सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्दी ही रेल फाटकों पर होमगार्ड नजर आने लगेंगे.

गौरतलब है कि विधि-व्यवस्था, बैंक, वित्तीय संस्थान, प्रदेश सरकार के करेंसी चेस्ट, ईवीएम की सुरक्षा आदि की जिम्मेदारी इन्हीं जवान के पास है. इतना ही नहीं, पिछले तीन सालों से फायर सेफ्टी को लेकर भी इन्हें सक्रिय किया गया है. शॉर्ट टर्म प्रशिक्षण के बाद इन्हें फायर सेफ्टी में भी लगाया गया है. विभागीय आंकड़ों की मानें तो करीब सात सौ जवान लगातार इसी में काम कर रहे हैं.



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गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 54 हजार होमगार्ड हैं. इनमें से 30 हजार जवानों की लगातार सेवाएं ली जा रही हैं.

बता दें कि होमगार्ड के जवान अब राहत कार्य से लेकर सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण अंग बन चुके हैं. किसी भी आपदा की बात हो या बाढ़ राहत की. ये जवान पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर साथ देते हैं. कुछ साल पहले तक इन्हें तटबंधों की सुरक्षा में लगाया जाता था. अब ये एनडीआरएफ की टीम के साथ बाढ़ राहत में अपना योगदान दे रहे हैं. विभाग की ओर से मानदेय के तौर पर इन्हें चार सौ रुपये दिये जाते हैं. अगर स्पेशनल बटालियन के जवान हैं तो 30 प्रतिशत अतिरिक्त मानदेय मिलता है.

जवानों को मानदेय रेलवे के माध्यम से ही मिलेगा

क्रॉसिंग पर होमगार्ड की प्रतिनियुक्ति को लेकर रेलवे का पत्र आया था. अभी समस्तीपुर मंडल ने संपर्क किया है. इसलिए समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत जितने जिले आते हैं, उन जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर दिया गया है. साथ ही संबंधित जिलों के जिला कमांडेंट को भी पत्र लिखा गया है. जवानों की तैनाती जिलाधिकारी व संबंधित जिला कमांडेंट के स्तर से होगी. इसके लिए जवानों को मानदेय रेलवे के माध्यम से ही मिलेगा. यह जवानों के लिए खुशी की बात है. सेवाएं बेहतर होने की वजह से ऐसा मौका मिलने लगा है.
– राजीव रंजन, कमांडेंट, गृह रक्षा वाहिनी, पटना