जेपी नारायण: आजादी के बाद भी रहा सत्ता से संघर्ष, एक आंदोलन से हिला दी थी इंदिरा सरकार

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लाइव सिटीज डेस्क: स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत की राजनीति में जिन महान नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभायीं, उनमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण का नाम प्रमुख है. आज जेपी नारायण का जन्मदिन है. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान वे ब्रिटिश शासकों की हिरासत में रहे, तो दशकों बाद आजाद हिंदुस्तान की सरकार ने उन्हें आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया. देश और देश की जनता के उत्थान के लिए समर्पित जेपी ने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों को मान दिया.

आजादी के बाद वे बड़े-बड़े पद हासिल कर सकते थे, पर उन्होंने गांधीवादी आदर्शों के अनुरूप जीना चुना. जब उन्हें लगा कि सत्ता निरंकुशता और भ्रष्टाचार से ग्रस्त हो रही है, तो वे फिर कूद पड़े संघर्ष के मैदान में. जयप्रकाश नारायण को आजादी के बाद जनआंदोलन का जनक माना जाता है. 1973 में देश में महंगाई और भ्रष्टाचार का दंश झेल रहा था. इससे चिंतित हो उन्होंने एक बार फिर संपूर्ण क्रांति का नारा दिया. इस बार उनके निशाने पर अपनी ही सरकार थी. सरकार के कामकाज और सरकारी गतिविधियां निरंकुश हो गई थीं. गुजरात में सरकार के विरोध का पहला बिगुल बजा. बिहार में भी बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया.

हिल गई थी इंदिरा सरकार

वह इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे. 1974 में ही पटना में छात्रों ने आंदोलन की शुरुआत की. यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा, इस शर्त पर जेपी ने उसकी अगुवाई करना मंजूर किया. गिरते स्वास्थ्य के बावजूद जेपी इस आंदोलन से जुड़े और यह आंदोलन बाद में बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बनकर उभरा और आखिर में जेपी के कारण ही यह आंदोलन ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन बना. इस आंदोलन से केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था.

जेपी छात्र आंदोलन से ही निकले बिहार की राजनीति के दिग्गज

राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के सुशील मोदी, ये तीनों जेपी आंदोलन में विद्यार्थी नेता के रूप में उभरे और बुलंद मुक़ाम हासिल किया. सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आए थे. आपातकाल के बाद वहीं लौट गए. लालू और नीतीश ने बिहार से होते हुए केंद्र की सियासत में भी अपना सिक्का जमाया. राम विलास पासवान जेपी आंदोलन में शामिल नहीं हुए लेकिन आपातकाल के विरोध में जेल जाने वालों में उनका भी नाम आता है.

1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जेपी हुए गिरफ्तार

इसके बाद देश में जो सरकार विरोधी माहौल बना और इंदिरा गांधी का सत्ता में रहना मुश्किल होने लगा तो 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जिसके अंतर्गत जेपी सहित 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई. जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई. 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया.

मरणोपरांत ‘भारत रत्न’से सम्मानित

11 अक्टूबर, 1902 को जन्मे जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे. वे समाज-सेवक थे, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से भी जाना जाता है. 1999 में उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था. पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है. दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’भी उनके नाम पर है. लोकनायक जयप्रकाश जी की समस्त जीवन यात्रा संघर्ष तथा साधना से भरपूर रही.

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बोल की लब आज़ाद हैं तेरे, बोल जबां अब तक तेरी है

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