एलेक्‍शन स्‍ट्रेटजिस्‍ट प्रशांत किशोर ने कर ली है पॉलिटिक्स में एंट्री, एक नज़र में देखिए इनका सफ़र

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लाइव सिटीज डेस्क: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर आखिर एक बार फिर नीतीश कुमार के साथ आ गये हैं. चुनाव में जीत की गारंटी बने प्रशांत किशोर ने अब सीधे राजनीति में एंट्री ले ली है. वह नीतीश की मौजूदगी में जेडीयू में शामिल हो गए हैं. खास बात यह है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहली बार जनता दल यूनाइटेड की कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हो रहे हैं. बैठक में वह नीतीश कुमार के साथ ही बैठे हैं. जदयू के अन्य नेताओं ने इस पर अपनी ख़ुशी जाहिर की है.

नीतीश कुमार ने पहले ही दिया था हिंट

माना जा रहा है कि नीतीश कुमार दो महीने पहल ही अनौपचारिक रूप से पार्टी के नेताओं को इस बात से अवगत करा चुके थे कि प्रशांत किशोर अब जदूय का दामन थामेंगे और अपने अनुभवों से चुनावों नीतीश को जीताने की भूमिका भी निभाएंगे. ऐसा कहा जाता है कि वह नीतीश कुमार ही हैं, जिन्होंने प्रशांत किशोर को कुर्ता-पायजामा पहनाया. पहली बार जब कुर्ता पायजामा प्रशांत ने पहना था, तभी कायास लगा लिये गये थे, कि प्रशांत अगर राजनीति में आएंगे तो उनका पड़ाव नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ही होगा.

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प्रशांत किशोर के बारे में

प्रशांत किशोर का जन्म साल 1977 में बिहार के बक्सर जिले में हुआ. प्रशांत के पिता डॉ. श्रीकांत पांडे पेशे से चिकित्सक हैं और बक्सर में मेडिकल सुपरिटेंडेंट भी रह चुके हैं. वहीं मां इंदिरा पांडे हाउस वाइफ हैं. प्रशांत किशोर के बड़े भाई अजय किशोर पटना में रहते हैं और उनका खुद का कारोबार है. प्रशांत किशोर की दो बहनें भी हैं. पिता डॉ. श्रीकांत पांडे सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद बक्सर में ही अपनी क्लिनिक चलाते हैं.

प्रशांत किशोर ने पटना से हाई स्कूल तक की पढ़ाई पूरी. इंटरमीडिएट की पढ़ाई उन्होंने पटना के प्रतिष्ठित साइंस कॉलेज से की. प्रशांत किशोर दो भाई और दो बहने हैं. उन्होंने गुवाहाटी के जाह्नवी दास से शादी की जो खुद भी पेशे से डॉक्टर हैं और दोनों को बेटा भी है. हालांकि प्रशांत किशोर ने कभी भी खुलकर अपने निजी जीवन की चर्चा नहीं की.

सियासी पारी का आगाज़

इंटरमीडिएट के बाद प्रशांत किशोर ने हैदराबाद के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने अफ्रीका में यूएन हेल्थ एक्सपर्ट के तौर पर काम किया. नौकरी छोड़कर 2011 में प्रशांत किशोर भारत लौटे हैं और पांच सालों तक चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाने के बाद अब खुद सियासी पारी का आगाज़ कर रहे हैं.

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बता दें कि प्रशांत किशोर 2014 में भारतीय जनता पार्टी, 2015 में राजद-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन और 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के लिये काम कर चुके हैं. एक समय चुनाव में जीत की गारंटी बन चुके प्रशांत किशोर उस समय चर्चा में आए थे जब 2014 के चुनाव प्रचार में बीजेपी के प्रचार को उन्होंने ‘मोदी लहर’ में बदल दिया था. उसके बाद उनके बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मतभेद की खबरें आईं और उन्होंने साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (आरजेडी+जेडीयू+कांग्रेस) के प्रचार की कमान संभाल ली और इस चुनाव में बीजेपी को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा.

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बोल की लब आज़ाद हैं तेरे, बोल जबां अब तक तेरी है

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