बिहार का एक अगरबत्ती विक्रेता जिसने अपनी 3 बेटियों की शिक्षा के लिए बेच डाला पैतृक घर

लाइव सिटीज डेस्क : ऐसे समय में जब कई लड़कियां अभी भी स्कूल की शिक्षा से वंचित हैं, 52 वर्षीय बैद्यनाथ प्रसाद शाह की कहानी लाखों लोगों के लिए किसी उदाहरण से कम नहीं है. बिहार में मोतिहारी के रहने वाले अगरबत्ती बेचने वाले बैद्यनाथ प्रसाद ने अपनी तीन बेटियों को शिक्षा प्रदान करने के लिए अपना घर तक बेच डाला.



जब बैद्यनाथ ने अपना घर बेचा था तो उनकी सबसे बड़ी बेटी रूपा केवल 14 साल की थी. रूपा अब सिविल जज बनने के लिए पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रही है, और राज्य की लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 173 वां रैंक हासिल किया है. रुपा नई दिल्ली में सादिक नगर के केन्द्रीय विद्यालय की छात्रा है. रूपा अकेली ऐसी लड़की है जिसने 29वीं बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगी परीक्षा को सफलतापूर्वक पास किया है.

बैद्यनाथ प्रसाद की छोटी बेटियां रुची और लक्ष्मी भी अपने पिता का सिर गर्व के साथ ऊंचा किया है. इनकी दूसरी बेटी रूची, वर्ष 2014 में चीन में एक डॉक्टर बन गईं.और सबसे छोटी बेटी लक्ष्मी, नई दिल्ली में बिहार भवन में कार्यरत है, और हाल ही में National Eligibility Test में एक lecturer के रूप में नियुक्ति हुई है.

बैद्यनाथ प्रसाद अगरबत्ती बेचकर लगभग 15,000 रुपए प्रति माह कमा लेते थे. और साल 2014 तक नई दिल्ली में अपना कारोबार को जारी रखने में कामयाब रहे. लेकिन घर की स्थिति सही न होने के कारण औपर आर्थिक रूप से कमजोर बैद्यनाथ प्रसाद ने अपनी बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. उन्होंने बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए अपने पैतृक घर तक को बेच डाला.

रुपा खुद को भाग्यशाली मानती है क्योंकि उसने एक ऐसे पिता के यहां जन्म लिया जिन्होंने अपनी बेटियों को शिक्षा प्रदान करने के लिए अपनी संपत्ति छोड़ तक को बेच डाला. अब वह वो सब कुछ करना चाहती है जो वह अपने पिता के लिए कर सकती हैं, और वह अब अपनी पैतृक संपत्ति को खरीदने के लिए योजना बना रही है जिसे उसके पिता को मजबूरन बेचना पड़ गया था.

बैद्यनाथ द्वारा इतना बड़ा बलिदान और उनकी बेटियों की सफलता ने अन्य लोगों के लिए एक उदाहरण पेश किया है जो लोग अपनी बेटियों को देनदार मानते हैं.