अस्पताल ने नहीं दिया वाहन, बेटे ने खुद ढोई मां की लाश

पूर्णिया : बिहार के पूर्णिया में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है. एक अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से शव को शववाहन की जगह बाइक पर ही लादकर ले जाना पड़ा. खबरों के मुताबिक सुशीला देवी नामक एक महिला को उनके परिवार वालों ने पूर्णिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया था.

परिवार वालों की शिकायत है कि इलाज के दौरान जब महिला कि मौत हो गई तो अस्पताल प्रशासन ने शव को ले जाने के लिए परिजनों को शववाहन तक उपलब्ध नहीं करवाया. परिवार वालों के सामने भी विवशता थी. महिला के परिजनों के मुताबिक, जब उनलोगों को शव ले जाने के लिए शव वाहन नहीं मिला तो उन लोगों ने दोपहिया पर ही शव को बांध दिया और शव का अंतिम संस्कार करने के लिए अपने गांव श्रीनगर ले आए. जब इस मामले के बारे में सिविल सर्जन से पूछा गया तो उन्होंने इस मामले से सीधे अपना पल्ला झाड़ लिया और चुप्पी साध ली. बहुत कुरेदने पर भी उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से साफ़ इन्कार कर दिया.

अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही को काफी गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच करने के लिए एक समिति गठित कर दी है और समिति से आने वाले सोमवार तक अपनी रिपोर्ट सुपुर्द करने को कहा है. इस घटना से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी काफी आहत हुए हैं. उन्होंने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉ. एस के वर्मा को आज निलंबित कर दिया एवं तीन लोगों को स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी कर इस मामले के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है.

इस मामले में स्पष्टीकरण सदर अस्पताल पूर्णिया के सिविल सर्जन डॉ. एमएम वसीम, अस्पताल के मैनेजर एवं डीपीएम से पूछा गया है. मानवता को मर्माहत कर देने वाली इस घटना से ओडिसा के उस घटना की यादें ताजा कर दी है जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत पत्नी का शव कंधे पर लादकर कई किलोमीटर पैदल अपनी गांव की ओर चल पड़ा था. पूर्णिया की इस घटना को चिकित्सा जैसे प्रोफेशन को शर्मसार कर देने वाला बताया जा रहा है.

राजेश कुमार झा की रिपोर्ट