स्टेट बैंक में खोला गया था ‘फ्रॉड अकाउंट’ , खरीद लिया था गिरोह ने

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पटना/बिहारशरीफ : साइबर क्राइम का जंजाल फैलता ही जा रहा है . टेक्नो-फ्रेंडली गिरोह रोज नये रास्ते तलाश रहे हैं . पुलिस की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही है . अब बात सिर्फ फर्जी दस्तावेज पर मोबाइल कनेक्शन लेने भर की नहीं रह गई है . ताजा खुलासा यह है कि अब बैंकों के अकाउंट बिकने लगे हैं . जितने बड़े बैंक में अकाउंट खोल सकेंगे,कीमत उतनी अधिक मिलेगी . सिर्फ अकाउंट खोल देने के लिए आपको 10 हजार से 50 हजार रुपये तक मिल सकते हैं . आगे फ्रॉड के प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर कमीशन अलग से .

बैंकों में अकाउंट खोल गिरोहों के हाथ बेच देने का बिलकुल नया किस्सा पिटारा नालंदा जिले में खुला है . नालंदा के एसपी कुमार आशीष ने गिरोह के कुछ सदस्यों को पकड़ लिया है . गिरोह के असली बाप को पकड़ने को झारखंड के जामताड़ा में जाना होगा . मामला खुलना इस तरीके से शुरु हुआ कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के चंडी ब्रांच के मैनेजर को किसी खास अकाउंट के बारे में शिकायतें आनी शुरु हुई . शिकायत कई दूर शहरों से आ रही थी और सभी एक जैसी थी . कंप्लेन यह कि वे साइबर क्राइम के बड़े रुप एटीएम फ्रॉड के शिकार हो गए हैं . पता करने की कोशिश की तो मालूम हुआ कि हजम की गई राशि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के चंडी ब्रांच के ख़ास अकाउंट में ट्रांसफर हो रही है .

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मैनेजर ने अकाउंट में दी गई जानकारी की तहकीकात की . शक और गहरा गया . फिर जिले के एसपी कुमार आशीष को पूरे मामले की जानकारी दी गई . स्पेशल ऑपरेशन स्टार्ट हुआ तो परत-दर-परत राज खुलते गए . सबसे पहले खाताधारी नीतीश कुमार को नूरसराय के बुधौल से पकड़ा गया . पूछताछ हुई तो मालूम हुआ कि यह तो मोहरा मात्र है . जाल तो बहुत लंबा है . नालंदा में भी फैल गया है . पुलिस ने नालंदा में जमे गिरोह के दूसरे सदस्य पंकज,पुरुषोत्तम और दीपक पर दबिश बनाई . जब्ती का दौर शुरु हुआ . कई बैंक अकाउंट,और अधिक अकाउंट खोलने के जाली दस्तावेज,1 लाख नकद , एटीएम कार्ड और 20 हजार रुपये का चेक बरामद किया गया .

लगातार चल रही पूछताछ से अब तक यह ज्ञात हुआ है कि इन सबों के पास कई बैंकों में अकाउंट खोलने और उसे गिरोह के बाप जामताड़ा के रब्बानी के हाथों बेच देने का ठेका था . अकाउंट खुलते ही उसे गिरोह को बेच दिया जाता था . बैंक के कद के मुताबिक तुरंत 10 से 50 हजार रुपये मिल जाते थे . बदले में एटीएम कार्ड और दस्तखत किया हुआ चेक बुक सौंप देना होता था . आगे इस अकाउंट के माध्यम से गिरोह जो भी धन राशि फ्रॉड कर हासिल कर लेता,उसका तय कमीशन चुकता कर दिया जाता था . गिरोह में नए सदस्यों को भर्ती करने के लिए भी पैसे मिलते थे .

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