अभी ‘प्रॉडिकल साइंस’ को भूल नहीं पा रहा है बिहार बोर्ड, मार्कशीट में भी लिख दिया

पटना : साल 2016 में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) द्वारा ली गई इंटर परीक्षा में रूबी राय ने आर्ट्स केटेगरी में टॉप किया था. बाद में एक चैनल के रिपोर्टर के साथ इंटरव्यू के दौरान उसने एक सब्जेक्ट के नाम के उच्चारण में गलती क्या की, हंगामा भड़क उठा. रिपोर्टर ने फिर उससे उक्त विषय से संबंधित कई सवाल किये, जिसका उचित जवाब रूबी राय नहीं दे सकी थी. फिर तो टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक में रूबी राय को एक अलग ही नाम दे दिया गया. अगर आपको वो नाम अभी भी याद हो, तो रूबी राय को ‘प्रॉडिकल गर्ल’ कहा जाने लगा.


रूबी राय को ‘प्रॉडिकल गर्ल’ बुलाये जाने के पीछे वजह थी कि उसने अपने सब्जेक्ट का नाम का उच्चारण ‘प्रॉडिकल साइंस’ किया था. जो कि शुद्ध रूप से ‘पॉलिटिकल साइंस’ होता है. अंग्रेजी में इसकी स्पेलिंग Political Science’ लिखी जाती है. आप सब यह सोच रहे होंगे. यहां हम पॉलिटिकल साइंस और इसकी स्पेलिंग की चर्चा क्यों कर रहे हैं. इसके पीछे वजह है, और बहुत मजेदार है. जानने के बाद आप न सिर्फ अपना सर पीटेंगे बल्कि बिहार बोर्ड को मन ही मन, सभ्य समाज की बोलचाल में इस्तेमाल नहीं किये जाने वाले विशेषणों से अलंकृत भी करेंगे.

वजह हम आपको बतायेंगे, लेकिन उससे पहले थोड़ा फ़्लैशबैक में चलते हैं. इस साल 2017 में बिहार बोर्ड (BSEB) ने हर साल की तरह इंटर की परीक्षा ली. 30 मई को बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने इंटर परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था. बोर्ड द्वारा दी गई शुरूआती जानकारी के अनुसार आर्ट्स में समस्तीपुर के गणेश कुमार, तो साइंस में जमुई की खुशबू कुमारी ने टॉप किया था.

इसके बाद लाइव सिटीज के इन्वेस्टीगेशन में हुए खुलासे से आप सबने जाना कि आर्ट्स टॉपर गणेश ने किस तरह अपनी उम्र छिपाकर परीक्षा दी थी. हमने यह भी बताया था कि समस्तीपुर का वह स्कूल, जहां से गणेश ने परीक्षा दी थी, म्यूजिक विषय में बेहिसाब अंक देकर स्टूडेंट को फर्स्ट डिवीज़न दिलाने की गारंटी लेता है. इसके बाद बोर्ड ने गणेश पर कार्रवाई की और अगली बार से परीक्षा में किसी भी तरह की कमी न रहे, इसके लिए नए फ्रेमवर्क भी बनाए. हमें भी उम्मीद है कि लगातार सामने आ रहे फर्जी टॉपर प्रकरणों के बाद बोर्ड अगले साल सावधानीपूर्वक इम्तिहान आयोजित करेगा.

लेकिन, इस सबके बीच अब बिहार बोर्ड की एक और बड़ी लापरवाही निकल कर सामने आई है. यह ऐसी लापरवाही है जिससे बिहार बोर्ड से परीक्षा दिए छात्रों को हर साल दो-चार होना पड़ता है. हम बात कर रहे हैं बोर्ड द्वारा परीक्षा के बाद स्टूडेंट्स को वितरित किये जाने वाले मार्कशीट और सर्टिफिकेट्स में प्रिंटिंग की गलतियों की. हर साल कई ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें बोर्ड द्वारा दिए गए कागजातों में स्टूडेंट्स का खुद का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि इत्यादि में गलतियां सामने आती हैं.

अब साल 2017 की परीक्षा के बाद बिहार बोर्ड ने जो मार्कशीट और सर्टिफिकेट्स वितरित किये हैं, उनमें कुछ ऐसी ही गलतियां सामने आ रही हैं. लेकिन इस बार की गलतियां रोचक हैं. वजह हम बताएं, इससे पहले याद कर लीजिये – रूबी राय के ‘प्रॉडिकल साइंस’ को. बिहार बोर्ड ने इस साल जो सर्टिफिकेट्स और मार्कशीट इशू किये हैं, उनमें ‘पॉलिटिकल साइंस’ की ही स्पेलिंग गलत लिखी हुई है. उसी पॉलिटिकल  साइंस विषय की, जिसके गलत उच्चारण की वजह से बिहार बोर्ड की देश भर में इतनी भद्द पिटी. है न मजेदार!

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ऊपर आप पहली तस्वीर देखें. ये गोपालगंज जिले के एक परीक्षार्थी की है. लाइव सिटीज को मिली इस मार्कशीट में आप साफ़ तौर पर देख सकते हैं कि विषय के कॉलम में ‘Political’ की स्पेलिंग को ‘Poliitcal’ लिखा गया है. अब नीचे दूसरी तस्वीर देखें –

ये एक दूसरी परीक्षार्थी का प्रोविजनल सर्टिफिकेट है. इसमें भी परीक्षार्थी द्वारा लिए गए विषय की जगह पर गौर करें. यहाँ भी ‘Political’ की स्पेलिंग को ‘Poliitcal’ लिखा गया है. अब सवाल यह है कि बिहार बोर्ड के परीक्षार्थी जब इन कागजातों के दम पर देश भर के संस्थानों में अपनी क्षमता बताने जायेंगे, तो उन्हें किस तरह हंसी का पात्र बनना पड़ेगा. यहां हम ये भी स्पष्ट कर दें कि परीक्षार्थी  द्वारा बोर्ड को आवेदन  कर इनमें सुधार करवाया जा सकता है. लेकिन फिर भी, अगर इतने हंगामे के बाद भी बिहार बोर्ड मार्कशीट की प्रिंटिंग में इस तरह की गलतियां करेगा, तो इसका खामियाजा कौन भुगतेगा?