50 की उम्र वाले शिक्षकों को जबरिया रिटायर कराएगी बिहार सरकार

पटना: भाजपा के साथ नई सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेहद सख्त मूड में हैं. उनका जायका तो तभी खराब हो गया था, जब इस साल बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के नतीजों में फेल होने वाले छात्रों की संख्या पास होने वाले छात्रों से बहुत अधिक थी. कहा गया कि सरकार ने कदाचार रोका, इसलिए रिजल्ट खराब हो गया. हजारों स्कूल ऐसे निकले, जहां से एक भी छात्र परीक्षा में पास नहीं हुए थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तभी कहा था कि यह चुनौती है और इसे वे अवसर के रूप में बदलेंगे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था की आज समीक्षा की. साथ में मंत्री कृष्णनंदन वर्मा और शिक्षा विभाग के अधिकारी थे. चीफ सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद रहे. घंटों चली इस बैठक के बाद यह निर्णय किया गया कि जिन स्कूलों ने बेहद खराब रिजल्ट दिए हैं, उन स्कूलों के वैसे सभी शिक्षकों को ज​बरिया रिटायर करा दिया जाएगा, जिन्होंने 50 साल की उम्र पूरी कर ली है. निकम्मे अधिकारी भी हटाए जाएंगे. दूसरे सभी शिक्षकों की समीक्षा भी होगी.

बैठक में यह निर्देश दिया गया कि​ शिक्षा विभाग सुनिश्चित करे कि सितंबर तक सभी स्कूली बच्चों को किताब मिल जाए, मालूम हो कि ​किताब छापने का टेण्डर ही अभी हुआ है, जबकि शैक्षणिक सत्र के कई माह गुजर चुके हैं. बिना किताब की पढाई हो रही है. बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन जिलों के रिजल्ट ​अधिक खराब हुए हैं, उनके ​डीईओ पर भी कार्रवाई होगी.

सरकार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की सुविधा को अधिक आसान करने के लिए सोसायटी बनाएगी. इसके साथ ही एजुकेशन लोन मिलने में परेशानी न हो , इसके लिए बैंक की जगह सोसायटी बनेगी. स्कूलों में पायलट आधार पर अंग्रेजी, ​गणित और साइंस के लिए स्मार्ट क्लास बनेंगे. वैसे शिक्षक भी हटा दिए जाएंगे, जो पात्रता परीक्षा में तीन बार फेल हो चुके हैं.