तोमर की फर्जी डिग्री मामले में वीसी, प्रिंसिपल व चुनाव आयोग से मांगा जवाब

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पटना (एहतेशाम) : दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री और आम आदमी पार्टी के विधायक जितेन्द्र सिंह तोमर की LLB की तथाकथित फर्जी डिग्री को तिलक मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा रद्द किये जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय के कुलपति, प्राचार्य तथा चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश चक्रधारीशरण सिंह की एकलपीठ ने जितेन्द्र सिंह तोमर की ओर से दायर रिट याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

गौरतलब है कि दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने बिहार में स्थित तिलक मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (टीएमबीयू) ने उनकी एलएलबी की डिग्री हासिल की थी. जिसके बारे में यह जानकारी मिली की वह डिग्री फर्जी है. इस बाबत टीएमबीयू के यूनिवर्सिटी सिंडीकेट ने परीक्षा बोर्ड के निर्णय के बाद विश्वविद्यालय द्वारा आप विधायक और दिल्ली के पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की एलएलबी की डिग्री रद्द कर दी गई. तोमर पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने गलत माइग्रेशन प्रमाणपत्र के आधार पर टीएमबीयू में दाखिला लिया था.

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पूर्व में टीएमबीयू के सिंडिकेट, अनुशासन समिति ने डिग्री रद्द करने की अनुशंसा की थी. टीएमबीयू ने राजभवन से अनुमति मांगी और अनुमति के बाद मामला सीनेट में रखा गया था. विश्वविद्यालय ने मामले में दोषी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई थी.

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री रहे तोमर को पिछले साल दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. तोमर पर आरोप था कि उनकी डिग्री फेक है. तोमर को मंत्री पद से तब इस्तीफा भी देना पड़ा था जब 2015 में यह मामला मीडिया की हेडलाइन बनी थी. मामले में भागलपुर के तिलकामांझी विश्वविद्यालय के कर्मचारी के विरुद्ध दिल्ली की पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज की थी.

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आरोपियों में बड़े नारायण सिंह, रजी अहमद, राजेंद्र प्रसाद सिंह, जनार्दन प्रसाद यादव, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, अनिल कुमार सिंह, निरंजन शर्मा, सदानंद राय, अनिरुद्ध दास, आर.आर. पोद्दार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राम अवतार शर्मा और रामाशीष पुरभे शामिल थे. जिन्हें दिल्ली की एक अदालत ने बाद में जमानत दे दी. दिल्ली पुलिस ने तोमर व दूसरों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी व आपराधिक साजिश व अन्य प्रासंगिक धाराओं में आरोप लगाए हैं. तोमर को 9 जून, 2015 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 23 जुलाई, 2015 को जमानत मिली थी.