पटना के व्यवसायी दम्पति की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत, नहर में ही बन गई जल समाधि

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लाइव सिटीज डेस्क/सासाराम (राजेश कुमार) : पुत्र से मिलने की बेताबी में कार सवार एक दम्पति की नहर में गिरकर दर्दनाक मौत हो गयी. बीती (गुरुवार-शुक्रवार) 12-1 बजे के बीच आरा-सासाराम पथ पर रोहतास जिले के नोखा थाना क्षेत्र के जखिनी नहर पुल के पास हुई इस दुर्घटना में कार चालक बच गया. पेशे से व्यवसायी दम्पति का शव आज बरामद किया गया. मूल रूप से मधुबनी के निवासी मृतक पटना के एक अपार्टमेंट फ्लैट नं 303, R. G. S Green apartment मैनपुरा में रह रहे थे. देवांशी सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नेहरू नगर पटना में कार्यरत थे. ट्रेन में टिकट नहीं मिलने से बाई रोड ही वे दिल्ली में रह रहे अपने पुत्र श्रेय सिंह से मिलने दिल्ली जा रहे थे. 

मिली जानकारी के अनुसार मृतक संजय सिंह आईटी क्षेत्र के व्यवसाय से जुड़े हुए थे. उन्हें अपने पुत्र से मिलने दिल्ली जाना था. गुरुवार की शाम पटना से अपनी फोर्ड कार से सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए निकले थे. वाया सासाराम होकर उन्हें जीटी रोड पकड़ना था. कार वे खुद चला रहे थे. अगली सीट पर उनकी पत्नी सीमा सिंह बैठी थी. पीछे सीट पर उनका चालक ईश्वर पाठक निवासी डोभी गया बैठा था. सही सलामत बचे चालक ईश्वर के अनुसार नोखा और सासाराम के बीच पड़ने वाले जाखिनी नहर पुल से होकर गुजरने के लिए मौजूद दो रास्तों को देख वे समझ नहीं पाए कि किस रास्ते से गुजरे.

फोटो : क्षतिग्रस्त कार

कार की रफ़्तार इतनी तेज थी कि कुछ समझ में आता कि दोनों रास्तों के बीच से होकर गाड़ी नहर के उफनते पानी में समा गयी. कहते है इसे संयोग ही कहे कि कार का पिछला गेट अपने आप खुल गया और वे बाहर फेका गए. परन्तु मालिक लोग उसी में रह गए. रात होने की वजह से कोई मदद नहीं मिल पाया. कुछ देर बाद वहां से थोडी दूर अवस्थित जाखिनी गांव में जाकर रोने लगा. उसकी आवाज सुनकर इक्का दुक्का लोग ही निकले.

सुबह पुलिस के आने पर गोताखोरों की मदद से दम्पति के शव बरामद किये गए जो बह कर कुछ दूर चले गए थे. नहर में डूबी क्षतिग्रस्त कार को भी क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया. कार नंबर BR1AP1234 था. शव घटनास्थल से 7 किमी दूर मिले. घटना की खबर सुनकर पटना से आये उनके रिश्तेदार सुरेन्द्र कुमार सिंह की मौजूदगी में शवों का सासाराम सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ. वे शवों को लेकर पटना रवाना हो गए. उक्त रिश्तेदार इतना बोझिल थे कि कुछ बोल ही नहीं पा रहे थे. 

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