इंटर कॉपी टेंडर घोटाला : लालकेश्वर व हरिहरनाथ को जमानत, किंगपिन विकास की याचिका खारिज

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पटना (एहतेशाम) : सूबे के बहुचर्चित इंटर कॉपी टेंडर घोटाले में अभियुक्त बनाये गये बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह एवं पूर्व सचिव हरिहरनाथ झा को पटना उच्च न्यायालय ने बडी राहत प्रदान करते हुए जमानत दे दी. वहीं इस मामले के किंगपिन विकास कुमार की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके विरुद्ध जांच में साक्ष्य मिला है. हालांकि वह चाहे तो जमानत के लिए नये सिरे से याचिका दायर कर सकता है.

न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार के एकलपीठ ने लालकेश्वर प्रसाद सिंह, हरिहरनाथ झा एवं विकास कुमार की नियमित जमानत याचिका पर एक साथ सुनवाई करते हुए शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया. गौरतलब है कि पांच अगस्त 2016 को दर्ज 8.5 करोड़ रुपये के मैट्रिक और इंटर के कॉपी घोटाला मामले में पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें पुलिस ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद, पूर्व सचिव हरिहरनाथ झा एवं स्टोर कीपर विकास कुमार समेत सात लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. इन सभी पर गुजरात के व्यापारी ब्रीजल कुमार भरत भाई शाह के साथ जालसाजी, धोखाधड़ी कर साढ़े आठ करोड़ रुपये ठगने का आरोप लगाया गया था.

पुलिस ने पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर, पूर्व सचिव हरिहरनाथ झा, स्टोर कीपर विकास कुमार, राजकिशोर प्रसाद गुप्ता, सदानंद शंकर, अजय कुमार सिंह और रजनीकांत को अभियुक्त बनाया गया था. दरअसल इस मामले का खुलासा स्टोर कीपर विकास कुमार ने पुलिस के समक्ष किया था. विकास ही इस खेल का सरगना था. उसने कहा था कि पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर और पूर्व सचिव हरिहरनाथ झा के मौखिक आदेश पर ठगी का खेल किया गया है. कॉपी टेंडर वाले दस्तावेज पर मेरा और सचिव के रूप में हरिहरनाथ झा का हस्ताक्षर है. मेरे वर्क आर्डर पर ही बिंदिया इंटर प्राइजेज से कॉपियां मंगायी गई थीं.

कॉपी का टेंडर देने के लिए ब्राजील शाह ने मुझे 25 हजार रुपये दिए थे. इस मामले एसआइटी ने औरंगाबाद से इंटर परीक्षा 2016 विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाएं बड़े पैमाने पर बरामद की थीं. इस कांड के वादी ने कहा था कि 28 ट्रक उत्तर पुस्तिकाएं गुजरात से भेजी गई थीं. साढ़े आठ करोड़ का घोटाला करने का मामला कोतवाली थाने में 5 अगस्त, 2016 को दर्ज किया गया था.

शुक्रवार को सुनवाई के क्रम में अदालत को बताया गया कि बिहार बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद व सचिव हरिहरनाथ झा के विरुद्ध सीधे तौर पर कोई साक्ष्य नहीं है. इन लोगों ने किसी भी कार्यानुमति पत्र अथवा एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर नहीं किया है, बल्कि इस मामले का मुख्य किंगपिन विकास कुमार है, जिसने यह पूरा खेल रचा था. उसी ने फर्जी तरीके से कापियों को छापने का आदेश दिया है. साथ ही साथ इन्होंने कार्य के बदले चार लाख रुपये भी अपने एकाउंट में मंगाये थे.