कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना मामले में केंद्र से जवाब-तलब

पटना (एहतेशाम) : सूबे में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खोले गये कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के विकास योजना की राशि की उपयोगिता का निर्धारण नहीं होने को लेकर पटना उच्च न्यायालय ने गंभीरता दिखाते हुए केंद्र सरकार से 4 सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश डाॅ अनिल कुमार उपाध्याय के खण्डपीठ ने रंजन कुमार की ओर से दायर लोकहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान को बढ़ावा देनें के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के निर्देशन में देशभर में 750 आवासीय स्कूल खोलने का प्रावधान किया है.  इस योजना का शुभारम्भ 2004 में किया गया. इन विद्यालयों में कम से कम 75 सीटें अनुसूचित जाति व जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्गों की बालिकाओं के लिए आरक्षित होंगी.

बाकी 25 सीटें गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करनेवाले परिवार की बालिकाओं के लिए होंगी. योजना के तहत बिहार में 68 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित किये जा रहे हैं. इनमें केंद्र सरकार द्वारा प्रति छात्रा 25 हजार रुपये देने का प्रावधान किया गया है, परंतु योजना की राशि के सही या गलत मद में खर्च किये जाने की जानकारी नहीं दी जा रही है.

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