एडमिशन का फर्जीवाड़ा : सर्टिफिकेट किसी का, उसपे नाम व फोटो किसी दूसरे का

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पटना (अमित जायसवाल) : फर्जीवाड़ा का एक बड़ा खेल पटना के अंदर चल रहा था. सर्टिफिकेट किसी और का होता था. लेकिन उस पर नाम और फोटो किसी और का रहता था. इस फर्जीवाड़ा के जरिये विशाखापट्टनम के कॉलेजों में बीएड, एमटेक और एमबीए जैसे कोर्स की पढ़ाई करने वाले बिहार सहित दूसरे स्टेट के स्टूडेंट्स का एडमिशन कराया जाता था.

एडमिशन के इस खेल में स्टूडेंट्स की जाति भी बदल दी जाती थी. स्टूडेंट्स किसी भी जाति के हों, लेकिन विशाखापट्टनम के कॉलेजों में उनका एडमिशन SC-ST कोटे से कराया जाता था. पटना में फर्जीवाड़ा का ये खेल लंबे समय से चल रहा था. इस बात की गुप्त जानकारी एसके पुरी के थानेदार अरविंद कुमार को मिली. थानेदार और उनकी टीम ने रामकृष्णा पथ में चल रहे ऑफिस में बुधवार को छापेमारी की.

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अस्सिटेंट प्रोफेसर सहित 3 अरेस्ट
जिस वक्त पुलिस टीम ने छापेमारी की, उस दौरान वहां फर्जीवाड़े का खेल चल रहा था. 20-25 की संख्या में फॉर्म भरे हुए थे. उसमे नाम और फोटो किसी और का था .  पुलिस टीम ने पूरे मामले की जांच की तो असलियत सामने आई. एडमिशन फॉर्म के साथ लगाया गया सर्टिफिकेट किसी दूसरे का निकाला. ये असलियत तब सामने आई , जब पुलिस टीम ने एक कैंडिडेट के  मोबाइल नम्बर पे कॉल किया और उससे एडमिशन के बारे में पूछा तो वो हैरत में पर गया. फिर फर्जीवाड़ा का सारा खेल सामने आ गया. मौके से विशाखा ग्रुप ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर श्रीनिवास राव, गया के रहने वाले मो. अरशद अली और सीवान के रहने वाले भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया.


इसके लिए होता है खेल

फर्जीवाडा के इस खेल के पीछे शातिरों की एक बड़ी प्लानिंग है. दरअसल, हैदराबाद और विशाखापत्तनम के कॉलेजों में SC-ST कोटे में स्टूडेंट्स का एडमिशन फ्री होता है. दूसरी ओर बिहार सरकार की तरफ से SC-ST कोटे के स्टूडेंट्स को पढ़ाई के लिए सब्सिडी दी जाती है. पकड़े गए शातिर दोनों तरफ से एडमिशन के नाम पे मोटी कमाई कर रहे थे. साथ ही एडमिशन करवाने वाले कैंडिडेट से बड़ी रकम भी वसूल कर रहे थे.


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