सिपाही बहाली मामले में हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा है जवाब

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पटना हाई कोर्ट

पटना (एहतेशाम अहमद) : वर्ष 2009 में दस हजार सिपाही की बहाली में बरती गयी अनियमितता पर पटना उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार को अभ्यर्थियों का मास्टर चार्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी एवं न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद की खण्डपीठ ने बिहार सरकार की ओर से दायर एलपीए (याचिका) पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को बताया गया कि वर्ष 2009 में बिहार में 10 हजार सिपाहियों की बहाली हेतु सिपाही केन्द्रीय चयन बोर्ड द्वारा विज्ञापन निकाला गया था. इसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन भरा. जिसके बाद मास्टर चार्ट से एक गुणा पांच के अनुपात में अभ्यर्थियों को शारीरिक परीक्षण के लिए बुलाया गया था. इस सम्बंध में दिनांक 04 अगस्त 2010 को गृह आरक्षी विभाग द्वारा निर्गत प्रपत्र के आलोक में अभ्यर्थियों को बुलाया गया.

आर्यभट्ट विवि के प्रो. वीसी बहाली मामले में जवाब-तलब

आर्यभट्ट विश्वविद्यालय पटना में प्रतिकुिलपति प्रो. सय्यद मोहम्मद करीम की नियुक्ति को चुनौती देने वाली लोकहित याचिका पर पटना उच्च न्यायालय ने विवि के कुलपति कार्यालय को चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है.

मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डाॅ. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने उदय शंकर की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि आर्यभट्ट विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति की नियुक्ति प्रावधानों का उल्लंघन कर किया गया है. उक्त नियुक्ति हेतु न तो विज्ञापन ही प्रकाशित किया गया है और ना ही अन्य प्रावधानों का अनुपालन किया गया है.

सरकारी अस्पतालों में दवा एक्सपायरी व चोरी मामले में राज्य सरकार को जवाब देने का निर्देश

पीएमसीएच सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं के एक्सपायरी होने व अस्पताल की दवाएं बाजार में बिक्री किये जाने के मामले को पटना उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से छह सप्ताह के भीतर यह बताने का निर्देश दिया है कि इस मामले में उसने अबतक क्या कार्रवाई की है.

मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डाॅ. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने विकासचन्द्र उर्फ गुड्डू बाबा की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को बताया गया कि पीएमसीएच की बारह लाख की दवाएं बाजार में बिक्री होते पकड़ी गयी है. वहीं राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले में कार्रवाई की जा रही है.

ट्रैफिक व्यवस्था पर राज्य सरकार व पीएमसी से जवाब-तलब

राजधानी पटना की बिगड़ी हुई ट्रैफिक व्यवस्था से आमजनों को होने वाली परेशानियों के मद्देनजर पटना उच्च न्यायालय ने गंभीरता दिखाते हुए मामले में हो रही कार्रवाई के सम्बंध में चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए राज्य सरकार व पटना नगर निगम को जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डाॅ. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने पीआईएल फोरम की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी पटना की ट्रैफिक व्यवस्था दिन ब दिन बिगड़ते जा रही है. हर जगह जाम का नजारा आम है और इसका एकमात्र कारण सरकार के विभागों में आपसी सामंजस्य का अभाव है.
यातायात के सुचारू परिचालन में लगे हुए ट्रैफिक पुलिस के जवान सिर्फ वीआईपी लोगों की सेवा में लगे हुए हैं. बाकी समय राजधानी पटना के आमजन ट्रैफिक जाम में बिलबिलाते रहते हैं.

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मामले में जवाब-तलब

सूबे के असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों को सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा प्रदान नहीं किये जाने के मामलें पर पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डाॅ. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने वेटरन फोरम फार ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया है.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों को सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा प्रदान करने हेतु वर्ष 2008 में ही कानून बना दिया गया है. परंतु बिहार सरकार द्वारा इस कानून के अनुपालन हेतु अभी तक बोर्ड का गठन नहीं किया गया है. जिस कारण असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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