बहुत ‘अनमोल’ है राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की गाय का दूध, लग रही है इतनी बोली…

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सासाराम (राजेश कुमार) : दूध के दाम लगभग एक समान होते है. आम तौर पर गाय के दूध से भैंस के दूध का मूल्य अधिक होता है. पर गाय के दूध की बोली लगने लगे तो अचरज तो होगा ही. उसमें जिसे मिल जा रहा है, वह अपने को सौभाग्यशाली समझ रहा है. हाल के दिनों में दूध की लगने वाली बोली का केंद्र बना है रोहतास के जिला मुख्यालय सासाराम में स्थित श्री कृष्ण गोशाला.

सन 1972 में तब के समाजसेवी स्व. हजारीमल रुंगटा ने 4 एकड़ भूमि मुहैया कराकर इस गोशाले की स्थापना की थी. उस वक्त इसे गोरक्षिणी का नाम दिया गया था. इसके पीछे भाव था परवरिश के बिना छोड़ दी जाने वाली लावारिस गायों की सेवा का. तब खुद के संसाधान से संचालित उक्त स्थान को जिले के किसानों से गाय का चारा (भूसा-पवटा) आसानी से उपलब्ध हो जाया करता था. रुंगटा साहब के निधन के बाद इसकी कमिटी बनाकर श्री कृष्ण गोशाला का नाम दे दिया गया.

कमिटी में स्थानीय एसडीओ अध्यक्ष, चयनित सचिव और अन्य पद धारकों के जिम्मे इसका संचालन होने लगा. काफी दिनों तक सचिव के रूप में इसका संचालन स्व. शिव नारायण सिंह यादव ने किया. तब से चन्दा और थोड़ा बहुत सरकारी मदद से यह गोशाला संचालित होता है. वर्तमान में इसके सचिव बिजेंद्र सिंह और कोषाध्यक्ष संदीप कनोडिया है. करीब 50 गायें है. उनमे गिनती के ही दुधारू है.

हाल के महीनों में पटना राजभवन से एकाएक इस गोशाले के पदधारकों को बुलाकर राजभवन की बीमार दो गायों को ले जाने की जिम्मेदारी मिली. संदीप कनोडिया के अनुसार कहा गया कि इन गायों का दूध तत्कालीन महामहिम रामनाथ कोविंद जी पिया करते थे. उनके राष्ट्रपति बन जाने के बाद ये गायें गंभीर रूप से बीमार हो गयी.

अब इनकी सेवा की आवश्यकता समझते हुए इन्हें श्री कृष्ण गोशाला को सौंपा जा रहा है. कागजी कार्रवाई पूरी कर वे गायों को यहाँ ले आये. गायों को कई जगह घाव हुए थे. खाना नहीं खाने से टूट सी गयी थी. कहते है, सेवा भाव से दो महीने तक उनकी सेवा की गयी. पशुपालन विभाग के स्थानीय चिकित्सों का वांछित सहयोग मिला. अब वे स्वस्थ हो गयी है. थोड़ा बहुत दूध भी दे रही है.

बताते हैं, गोशाला के प्रावधान में गायों का दूध और गोबर की बिक्री का प्रचलन होने से दूध के ग्राहक आने लगे. ग्राहकों को जैसे ही इस बात का पता चला कि इसका दूध वर्तमान में राष्ट्रपति पीते थे. फिर तो ग्राहकों के बीच दूध की बोली लगने लगी. स्थिति यह है कि प्रतीक के तौर पर होने वाले दूध की बोली 50-60 रु प्रति किलो पहुँच जाती है.

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