बिहार कला पुरस्‍कार: विभिन्न विधाओं के संस्कृतिकर्मियों को राजकीय सम्मान

पटना: राजधानी पटना के अधिवेशन भवन में आज कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग द्वारा आयोजित बिहार कला पुरस्‍कार समारोह सफलतापूर्व संपन्‍न हो गया. इसमें राज्‍य भर से आये विभिन्‍न विधाओं के 24 संस्कृतिकर्मियों को मुख्‍य अतिथि बिहार के उप मुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी के हाथों सम्‍मानित किया गया और प्रशस्ति पत्र भी दिए गए.

कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत उप मुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी; कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग के मंत्री कृष्‍ण कुमार ऋषि और बिहार सरकार के मुख्‍य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने दीप जलाकर की.


इस दौरान उप मुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पश्चिमी प्रभाव के युग में आज अपनी लोक कलाओं, संस्‍कृति व विरासत को संभाल कर रखने की चुनौतियां हैं. इसलिए तरह के आयोजनों से ही अपने विरासत को हम बचा सकते हैं. हमें डर है कि पश्चिमीकरण के युग में हमारे लोक कलाकारों की प्रतिभा कहीं दब नहीं जाए. इसलिए उनके साथ हमें समन्‍वय बनाकर आगे बढ़ना होगा.

मोदी ने कहा कि हमारी कला एवं संस्कृति में इतनी ताकत है कि कोई भी बाहरी प्रभाव इसको प्रभावित नहीं कर सकता है. इसका उदाहरण रामायण और महाभारत की कथाएं हैं, जो सैंकड़ों वर्ष से आज भी पहले ही की तरह प्रासंगिक है.  मोदी ने कहा कि कला और संस्‍कृति उसी समाज में आगे बढ़ सकती है, जहां शांति और सद्भाव हो. जिस समाज में ऐसा नहीं है, वहां कला का विकास उस तरह से नहीं हो सका है. एक समय राजा- महाराजा कला और कलाकारों को संरक्षण दिया करते थे. आज वही काम बिहार सरकार कर रही है.

बिना राज्‍य के संरक्षण के कला और कलाकार का संवर्द्धन असंभव है. इसलिए जहां राज्‍य सरकार ने सालों भ्‍ार हर जिले में चार बार ऐसे आयोजन करने का फैसला किया है, जिसमें कलाकारों को मंच मिले और उन्‍हें उचित सम्‍मान मिले. राज्‍य सरकार ने कला के विकास के लिए 8 करोड़ 19 लाख रुपये के लागत से दरभंगा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया प्रमंडल के जिला मुख्‍यालयों में प्रेक्षागृह बनाने का निर्णय लिया है. साथ ही मिथिला लोक कला के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास के लिए मिथिला चित्र कला संस्‍थान भी राज्‍य सरकार द्वारा बनाया गया है, जो आर्यभट्ट ज्ञान विवि से संबंद्ध है.


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार के मंत्री कृष्‍ण कुमार ऋषि ने कहा कि कला संस्‍कृति को जन–जन तक ले जाने के लिए विभाग द्वारा बड़े स्‍तर पर काम किये जा रहे हैं. उसके संवर्द्धन के लिए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी सोच से बना बिहार म्‍यूजियम उदाहरण है. पिछले दिनों बिहार आये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संग्रहालय को अनूठा बताया. आज राज्‍य सरकार सभी जिलों में कला के प्रदर्शन और उसके प्रदर्श के लिए साल में चार ऐसे आयोजनों की अनुमति दी है, जो जिला मुख्‍यालयों की स्‍थापना दिवस के कार्यक्रम से अलग होगा.


बतौर अति‍थि बिहार सरकार के मुख्‍य सचिव ने अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि यक्षिणी की प्रतिमा हमारे कला के उत्‍कर्ष का प्रतीक है. राज्‍य सरकार के कला संस्‍कृति विभाग, पर्यटन विभाग, सूचना एवं जन संपर्क विभाग और राजस्‍व विभाग द्वारा साल भर में 100 से ज्‍यादा महोत्‍सव सिर्फ इसलिए मनाए जाते हैं कि बिहार के लोग अपनी सभ्‍यता–संस्‍कृति से जुड़े रहें. हम बिहार के खोए गौरव को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं. बिहार की कलाओं को सहेजने के लिए बिहार म्‍यूजियम, कन्वेंशन हॉल सहित पटना में 25 से ज्‍यादा अत्‍याधुनिक प्रेक्षागृह बनाए गए हैं.

पुरस्‍कार समारोह में अतिथियों का स्‍वागत करते हुए कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव चैतन्‍य प्रसाद ने कहा कि आज का दिन बिहार की अस्मिता, पहचान और सांस्‍कृतिक परंपरा के लिए खास दिन है. आज से करीब 100 साल पहले 19 अक्‍टूबर 1917 को बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान के रूप में विश्‍व विख्‍यात चंवरधारिणी यक्षिणी की पाषाण मूर्ति दीदारगंज पटना से मिली थी. इसके प्राप्‍त होने के सौ साल बाद इस दिन को माननीय मुख्‍यमंत्री द्वारा बिहार कला दिवस की शुरूआत की गई. चंवरधारिणी यक्षिणी की प्रतिमा बिहार के कला ज्ञान का प्रतीक है.

बिहार के सौंदर्यबोध की साक्षी रही चंवरधारिणी यक्षिणी की प्रतिमा महिलाओं के प्रति बिहार के सम्‍मान का भी प्रतीक है. विभाग के अपर सचिव आनंद कुमार, निदेशक सत्‍यप्रकाश मिश्रा, अतुल वर्मा, उप सचिव तारानंद वियोगी, विभा सिन्‍हा, संजय कुमार, मीडिया प्रभारी रंजन सिन्‍हा मौजूद थे.

बिहार कला पुरस्‍कार 2017-18

राष्‍ट्रीय सम्‍मान (2017-18)

डॉ. शारदा सिन्‍हा (प्रदर्श कला)

परेश मैती (चाक्षुष कला)

लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्‍मान (2017-18)
किरण कांत वर्मा (प्रदर्श कला)

प्रो. श्‍याम शर्मा (चाक्षुष कला)

चाक्षुष कला के क्षेत्र में पुरस्‍कार

राधा मोहन पुरस्‍कार

बिरेंद्र कुमार सिंह  (वरिष्‍ठ)

अमृत प्रकाश  ( युवा)

कुमुद शर्मा पुरस्‍कार (समकालीन महिला)

संजु दास (वरिष्‍ठ)

निम्‍मी सिन्‍हा  ( युवा)

सीता देवी पुरस्‍कार (लोक कला)

रविंद्र नाथ गौड़ (वरिष्‍ठ)

ममता भारती  ( युवा)

दिनकर पुरस्‍कार (चाक्षुष कला लेखन)

ज्‍योतिष चंद्र शर्मा (वरिष्‍ठ)

सुनील कुमार  ( युवा)

प्रदर्शन कला के क्षेत्र में पुरस्‍कार
पं. रामचुतर मल्लिक पुरस्‍कार (शास्‍त्रीय गायन)

डॉ. रेखा दास (वरिष्‍ठ)

संतोष कुमार ( युवा)

भिखारी ठाकुर (रंगमंच)

मिथिलेश राय (वरिष्‍ठ)

बुल्‍लू कुमार  ( युवा)

विंध्‍यवासिनी देवी पुरस्‍कार (लोक गायन)

सत्‍येंद्र कुमार संगीत (वरिष्‍ठ)

श्‍वेत प्रीति ( युवा)

रामेश्‍वर सिंह कश्‍यप पुरस्‍कार (प्रदर्शन कला, लेखन)

उदय कुमार (वरिष्‍ठ)

राजन कुमार सिंह ( युवा)

विस्मिल्‍ला खां पुरस्‍कार (वाद्य वादन)

डॉ.विश्‍वनाथ शरण सिंह‍ (वरिष्‍ठ)

मो. सलीम ( युवा)

अम्‍बापाली पुरस्‍कार (नृत्‍य)

अंजुला कुमारी (वरिष्‍ठ)

यामिनी ( युवा)