BSEB : मुश्किल में लाखों मैट्रिक स्टूडेंट्स, गलत कॉपी चेकिंग मामले में 2 अधिकारी निलंबित

पटना : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले आन्दोलन पर अड़े परीक्षकों को मैट्रिक-इंटर की कापियों की चेकिंग के लिए किसी तरह मनाया गया, तो उसके बाद अब मैट्रिक की कॉपी चेकिंग में परीक्षकों को गलत ‘आंसर की’ दिए जाने का मामला सामने आने से बोर्ड की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि मामला सामने आने के बाद सोमवार की देर शाम बोर्ड ने इसकी जिम्मेदारी 2 अधिकारियों पर लाद कर उन्हें निलंबित कर दिया है. लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि इस बीच जिन विद्यार्थियों की कॉपी की मार्किंग कर दी गयी है, उनका क्या होगा?



सोमवार को हुई कार्रवाई

मैट्रिक की कॉपी चेकिंग के लिए बोर्ड द्वारा परीक्षकों को गलत आंसर की दिए जाने का मामला मीडिया में आने के बाद बोर्ड की भी नजर इस गलती पर गयी. इसके बाद सोमवार शाम बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने लापरवाही बरतने के मामले में 2 प्रशाखा पदाधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है.

फाइल फोटो

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कॉपी जांचने के लिए शिक्षकों को BSEB ने एक मॉडल आंसर शीट दिया था. इस मॉडल आंसर शीट में सभी सवालों के सही जवाब लिखे होने चाहिए थे, जिससे कॉपी जांचने वाले शिक्षक छात्रों की कॉपियों में लिखे उत्तरों के मिलान कर सही नंबर दे सकें. बोर्ड की ओर से जारी स्कोरिंग उत्तर पुस्तिका में गणित में 2, सामाजिक विज्ञान में 3 और विज्ञान में 7 सवालों के जवाब गलत हैं. वहीं सामाजिक विज्ञान में स्कोरिंग में सवाल 28 और 30 के सामने अंक नहीं दिए गए हैं. जबकि सवाल 28-29 एक-एक और 30 चार अंक के सवाल होते हैं. उत्तर पुस्तिका के ऊपर मार्किंग पैटर्न में भी भी गलतियां बताई जा रही हैं.

LPG का इस्तेमाल घरेलू गैस के रूप में नहीं होता

10वीं के भौतिकी ग्रुप B बहुवैकल्पिक सवाल संख्या 4 में पूछा गया था कि निम्नलिखित में से किसका उपयोग खाना बनाने वाले ईंधन में नहीं होता है? बोर्ड की ओर से दिए गए स्कोरिंग उत्तरपुस्तिका में जवाब दिया गया है, LPG. जबकि एलपीजी का इस्तेमाल घरेलू गैस के रूप में होता है. इस तरह के और भी सवाल हैं, जिनका जवाब गलत है. कॉपी का मूल्यांकन कार्य भी समाप्त होने हो है लेकिन न तो बोर्ड को इसके बारे में जानकारी हुई और न ही कॉपी जांचने वालों ने इसपर आवाज उठाई.

मिडिल स्कूल शिक्षकों ने जांची हैं कापियां

गौरतलब है कि अपनी मांगों को लेकर बहुत दिनों तक मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने की वजह से बोर्ड ने मिडिल स्कूल के शिक्षकों को कॉपी जांच में लगाया गया था. इस बात की काफी आलोचना भी हुई थी. अब यह भी कहा जा रहा है कि मूल्यांकन के समय गलत जवाबों पर ध्यान नहीं देने का कारण मिडिल स्कूल के शिक्षकों द्वारा कॉपी जांचना भी है. जिन्होंने 10वीं के बच्चों को पढ़ाया ही नहीं, बोर्ड ने उन्हें कॉपी मूल्यांकन के कार्य में लगा दिया.

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