बोले नीतीश कुमार – महान है यह धरती जहां महायज्ञ में जुटे हैं एक करोड़ श्रद्धालु…

आरा (पुष्कर पांडेय/सोनू सिंह की विशेष रिपोर्ट चंदवा यज्ञ नगरी से): सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आरा में यज्ञ स्थली पर मौजूद थे. उन्होंने स्टेज पर से विश्व के सुपर पावर परम श्रद्धेय परम पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज एवं संतों को नमन करते हुए प्रसन्नता जतायी कि देश के कोने—कोने से संत-महात्मा पधारे हैं. संत श्री जीयर स्वामी जी महाराज द्वारा इस धार्मिक उत्सव का आयोजन किया गया है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया.

उन्होंने कहा कि मैंने भोजपुर के जिलाधिकारी से पूछा था कि इस माह आयोजन में इस महायज्ञ में कुल कितने लोग शामिल हुए हैं? उन्होंने बताया कि अभी तक करीब एक करोड़ श्रद्धालु शामिल हो गए हैं. यह बड़े ताज्जुब की बात है कि बिहार की आबादी 12 करोड़ भी नहीं पहुंची और एक कुटिया में रहने वाले संत के सानिध्य में एक करोड़ लोग इस महा आयोजन में शामिल होने पहुंचे हुए हैं. यह धरती किसी प्रकृति और जीव में फर्क नहीं करता है. यह यज्ञ सभी के लिए है. उन्होंने कहा कि इस योग्य भूमि से मुझे एक ही संदेश लेकर जाना है और आप लोग भी एक ही संदेश लेकर जाएं.

परम पूज्य भाष्यकार श्री रामानुजाचार्य जी महाराज का एक ही संदेश था किसी भी जीव से घृणा नहीं करनी चाहिए. हर इंसान के साथ प्रेम करना चाहिए. यह ज्ञान की भूमि है. भगवान बुद्ध को ज्ञान मिला. महावीर का जन्म और निर्वाण भी यहीं हुआ. यह जैन की भूमि है. गुरु गोविंद सिंह का जन्म यही हुआ और परम पूज्य श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य स्वामी जीयर महाराज का जन्म भी यही हुआ. 1008 यज्ञ कुंड यहां बनाया गया है, यह बड़ी बात है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी से आगे बढ़कर पूर्ण नशाबंदी की ओर बिहार बढ़ रहा है.

परम पूज्य त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने इतने बड़े महायज्ञ का आयोजन किया है. उन्होंने आगे कहा कि इतना बड़ा आयोजन कभी नहीं हुआ था और मुझे नहीं लगता कि कभी होगा और यदि हुआ तो जीयर स्वामी जी महाराज के नेतृत्व में ही होगा. मैं यहां श्रद्धा निवेदित करने आया हूं. परम पूज्य श्री रामानुजाचार्य जी महाराज सहस्त्राब्दि की 1000 वीं जयंती के उपलक्ष्य में हम लोग यहां उपस्थित हुए हैं. यह कोई साधारण बात नहीं है.

परम पूज्य श्री रामानुजाचार्य जी महाराज ने 1000 साल पहले जो उन्होंने संदेश दिया था, उनका यह संदेश 1000 साल बाद इतने लाखों लोगों तक पहुंचा. यह कोई साधारण बात नहीं है. श्री रामानुजाचार्य जी महाराज ने 1000 साल पहले जो अपनी भक्ति से अपने ज्ञान से अर्जुन गुरु—शिष्य परंपरा शुरू हुई और जो गुरु— शिष्य परंपरा शुरू हुई उसमें रामानुजाचार्य जी महाराज भी हुए और उसी शिष्य परंपरा में हुए सूरदास और कबीर दास जी. रामानुजाचार्य जी महाराज ने जो धर्म के बारे में बात बताया है, वह कितनी बड़ी बात है.

उन्होंने कहा कि जीवों में कोई फर्क नहीं करना चाहिए. मानवों में फर्क नहीं करना चाहिए. प्रकृति की देन है हमारे इस दुनिया में बहुत से लोगों के मन में भ्रम पैदा हो जाता है कि यह जो पृथ्वी है वह मनुष्य के लिए है लेकिन स्वामी रामानुजाचार्य ने बताया कि किसी में फर्क नहीं, किसी मानव मानव में फर्क नहीं है. त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य परम पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज ने कुटिया में रहकर जो संदेश दिया है कि देश के कोने-कोने से लोग यहां पधारे हुए हैं. भोजपुर की धरती महान धरती है.

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