गगनभेदी नारों के बीच पंचतत्व में विलीन हुए शहीद कृष्णा कुमार पांडेय

सासाराम (राजेश कुमार) : देश के लिए शहीद हुए सीआरपीएफ के जांबाज शहीद कृष्णा कुमार पांडेय का पार्थिव शारीर बुधवार को उसके पैतृक गाँव भ्रन्दुआ (चेनारी) में पंचतत्व में विलीन हो गया. गत रविवार दोपहर छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों का सामना करते हुए कृष्णा वीरगति को प्राप्त किया था.

मंगलवार की देर रात उसका शव रोहतास जिले के चेनारी प्रखंड के भ्रन्दुआ गांव लाया गया था.

महज 28 वर्ष की आयु में दुनिया से विदा लेने वाले कृष्णा पांडेय के प्रति संवेदना व्यक्त करने वालों का उमड़ा जनसैलाब देख कर थोड़ी देर के लिए यकीन हो गया कि अभी भी लोग है, जिनके लिए राष्ट्र सबसे बड़ा है. “जबतक सूरज चाँद रहेगा, कृष्णा तेरा नाम रहेगा” के गगन भेदी नारे लगाने वाले हजारों की तादाद में जुटे लोगों की आँखे नम, दिल में कसक और नक्सलियों के कायराना कार्रवाई का बदला लेने का जज्बा चेहरे पर साफ़ झलक रहा था.

प्रशासनिक तालमेल के बीच आज सुबह से ही शहीद के शव यात्रा की तैयारियां चल रही थी. इस मौके पर कौन आ रहा है, कौन नहीं आ रहा है, भीड़ का बड़ा हिस्सा इसी पर नजर रखे हुए था. लोगों का आना शुरू हुआ तो सबसे पहले स्थानीय विधायक ललन पासवान पहुंचे. फिर सासाराम के सांसद छेदी पासवान आकर शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने में जुट गए.

उस वक्त चेनारी का पुलिस प्रशासन मौजूद था. प्रखंड स्तरीय अधिकारी परिजनों को बता रहे थे कि थोड़ी देर रुक जाइए सासाराम से डीएम-एसपी चल दिए है. पर जनसैलाब का रुख देख शव यात्रा उनके आने के पहले ही निकाल दी गई.

अंतिम पड़ाव पर पहुँचने पर डीएम अमिनेश कुमार पराशर, एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों, डीआईजी मो रहमान आये और पुष्प चढ़ा कर अपनी तथा राज्य सरकार के तरफ से श्रद्धा अर्पित किये.

महागठबंधन के जिले से विधायक और मंत्री में से किसी का इस मौके पर नहीं आना काफी अखर रहा था. मौके पर पहुंचे सांसद और विधायक दोनों एनडीए घटक के ही थे.

उक्त शहीद के शव के साथ आये सीआरपीएफ के गारद में शामिल जवानो की आँखे नम थी. शहीद के पार्थिव शरीर को चिता पर रखने से पूर्व उन्हें गार्ड ऑफ़ आनर दिया गया. सैनिक सम्मान की तरह शस्त्रों के साथ पूरी औपचारिकता निभायी गयी.

शहीद कृष्णा को मुखाग्नि उनके भाई ने दी. कृष्णा कुमार पांडेय को महज 10 माह की एक बच्ची ही है.

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