बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा, कायम की नई नज़ीर

नवादा(पंकज सिन्हा): आज फादर्स डे है. हर इंसान इस मौके पर सिर्फ अपने पिता को याद कर रहा है. लेकिन बिहार की चार बेटियों ने इस मौके पर जो किया वह पूरे इलाके के लिए जिन्दगी भर की नज़ीर बनकर रह गया है. ज़िले के कौआकोल में नारी सशक्तिकरण और बेटे-बेटियों के बीच भेदभाव मिटाने की मिसाल पेश करते हुए बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक पहुंचाया. बेटियों ने पुरुष अधिकार क्षेत्र वाले काम को करके साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी हालात में बेटों से कम नहीं हैं.


बताते चलें कि कौआकोल के बिझो गांव निवासी कैलाश महतो के दो बेटे और 4 बेटियां हैं. दोनों बेटे बाहर नौकरी करते हैं. शुक्रवार को कैलाश महतो की 61 वर्षीय पत्नी राजकुमारी देवी की अचानक मृत्यु हो गई. चूंकि बेटे बाहर थे और उन्हें आने में विलंब था. शव को ज्यादा दिनों तक रखा नहीं जा सकता था. इसीलिए चारों बेटियों ने माँ की अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक पहुंचाया. बेटियों के द्वारा किए गए इस कार्य की इलाके में खूब चर्चा हो रही है.

राजकुमारी देवी की बेटी पुष्पा, कंचन, पूजा और राजश्री ने समाज के सामने वह काम कर दिखलाया, जो आज तक बेटों का विशेषाधिकार समझा जाता था. बेटियों ने कहा कि संतान हम भी हैं, तो कंधा हम भी देने में सक्षम हैं. समाज की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए बेटियों ने भी मां के मोक्ष के लिए भगवान से प्रार्थना की. हालांकि क्रिया कर्म के बाद बाहर रहने वाले बेटे भी आ पहुंचे. बेटों को यह मलाल उम्र भर सालता रहेगा कि वह अपनी मां की अर्थी को कंधा नहीं दे सके.

लेकिन बेटों को संतोष इस बात का भी है, उनकी बहनों ने वह किया जिसकी हिम्मत जुटाना किसी बेटे के लिए असंभव सरीखा था.