मुंद्रिका सिंह यादव का पार्थिव शरीर पहुंचा अरवल, अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

अरवल (राकेश कुमार) : राजद के प्रधान महासचिव मुंद्रिका सिंह यादव के निधन की खबर से जिले में शोक की लहर फैल गई है. ज्यों ही मुंद्रिका सिंह का पार्थिव शरीर अरवल जिला के सीमा में प्रवेश किया, लोगों का हुजूम अपने चहेते नेता के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा.  हर आंखों में आंसू और दिल में अपने मसीहा को खोने का दर्द साफ दिखाई पड़ रहा था. चाहे वह आम हो या खास हर कोई सदमे में नजर आ रहा था. उनके पैतृक गांव सोनभद्र में मातमी सन्नाटा  पसरा हुआ था.

उनके गांव के ग्रामीण अपने अभिभावक के खोने के गम में  दुखी है. मुंद्रिका सिंह का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था कि सोनभद्र गांव के ग्रामीण कभी भी इन्हें नेता के रूप में नहीं देखे थे, यहां के लिए तो वे माननीय बनने के बाद भी चाचा, भाई और भतीजा ही थे. यही कारण था कि ग्रामीण इस कदर शोकाकुल है जैसे मुंद्रिका बाबू ग्रामीण नहीं  बल्कि घर का एक प्रिय सदस्य हो.

इस गांव के निवासी पत्रकार राजेश चंद्रा ने बताया कि हमारे गांव के लिए यह घटना किसी राजनेता की असामयिक निधन नहीं है, बल्कि घर- घर के अभिभावक की भूमिका में हमेशा हम लोगों को अपार प्यार और स्नेह देने वाले हमारे अपने चाचा की मौत की मनहूस खबर है. इस गांव के लिए इनका समर्पण हमेशा याद किया जाएगा.

ग्रामीण रणजीत महाप्रभु ने बताया कि आज पूरा सोनभद्र गांव आसुओं में डूबा है. इनकी ही देन थी कि कभी सुदूर देहात में गिना जाने वाला यह गांव अब प्रखंड मुख्यालय है. हम लोगों के लिए यह गौरव की बात है की हम उस मिट्टी में जन्मे हैं जहां मुंद्रिका बाबू जैसे नायक पैदा हुए हैं. आज जब उनका पार्थिव शरीर जब हम लोगों का पास आया है तो अपने बुलंद आवाज वाले अभिभावक की खामोश चेहरा देख कलेजा मुंह को आ रहा है.

राजद जिला अध्यक्ष रामाशिष रंजन, युवा जिला अध्यक्ष अलख पासवान, जदयू जिला अध्यक्ष जितेंद्र पटेल, मुखिया संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक रंजन,  भाजपा नेता आनंद चंद्रवंशी, वेंकटेश शर्मा, जयशंकर प्रसाद, भाकपा माले जिला सचिव महानंद, वंशी प्रमुख महाराणा यादव, रालोसपा  नेता पप्पू वर्मा ,सुभाष चंद्र यादव बसपा जिलाध्यक्ष मनोज कुमार यादव समेत हजारों लोगों ने इस दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी .

बता दें कि उनके निधन की खबर पर तो लोगों को यह विश्वास ही नहीं हुआ की उनके रहनुमा अब उनके पास कभी नहीं आएंगे. और इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई हर कोई अपने अपने स्तर से इस सच्चाई से अवगत होना चाहता था.

हालांकि मुंद्रिका सिंह की तबीयत खराब होने को लेकर पहले से ही इस इलाके से काफी संख्या में लोग पटना के पारस हॉस्पिटल में पहुंचे हुए थे. उन लोगों से उनके स्वास्थ्य की पल-पल की जानकारी लोग  फोन पर ले रहे थे.  लोगों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था की अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध  हमेशा मुखर होने वाली यह बुलंद आवाज हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गई है.