परंपरा के बावजूद बकरे की बलि देने को तैयार नहीं हुए DGP पी के ठाकुर

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सासाराम (राजेश कुमार) : राज्य के पुलिस विभाग के मुखिया DGP पी के ठाकुर मंगलवार को सड़क मार्ग से काशी (वाराणसी) से पटना के रास्ते में थे. वाराणसी (उत्तरप्रदेश) से पटना के लिए जीटी रोड (एनएच 2) से होकर पहले कैमूर फिर रोहतास, भोजपुर जिलों से गुजर कर ही पटना पहुंचा जा सकता है. हर जिले का पुलिस महकमा उनके रास्ते में तैनात था. रोहतास पुलिस भी अपनी पश्चिमी सरहद (खुर्माबाद) में तैनात दिखी. छोटे से बड़े अधिकारी मोबाइल से मिनट-मिनट की खबर ले रहे थे.

इधर आने में अप्रत्याशित विलंब होते देख रोहतास पुलिस के धैर्य की सीमा टूट गयी. पता चला कि सपरिवार यात्रा पर निकले डीजीपी साहेब मोहनिया से रूट बदल कर भभुआ (कैमूर) की ओर चल पड़े है. रास्ते में ही भभुआ से महज 10 किमी दूर भगवानपुर थानाक्षेत्र की पहाड़ी पर स्थित मा मुंडेश्वरी धाम के दर्शन का आकर्षण उन्हें खीच ले गया.

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बता दें कि मा मुंडेश्वरी, अति प्राचीन मंदिरों में एक मानी जाती है जहां मन्नतें पूरी करने के लिए बकरों की बलि दिए जाने की परंपरा रही है. मान्यता है कि फूल-मालाओं से सुसज्जित बकरे पर जैसे ही मंदिर के पुजारी अक्षत (चावल) छींटते हैं, बकरा वहीँ मूर्छित हो जाता है. तब मन्नत पूरी होने की आस जगती है.

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हालांकि डीजीपी तमाम किवदंतियों को सुनने के बावजूद भी बकरे की बलि दिए जाने से इनकार कर गए. वहां के पुलिस महकमें ने बलि के लिए बकरे को पहले से तैयार रखा था. इस बीच मंदिर के प्रधान पुजारी उमेश मिश्र ने वैदिक मंत्रोचारण के बीच डीजीपी और उनकी धर्मपत्नी का विधिपूर्वक पूजा करवाया. पूजा के बाद डीजीपी ने वहां स्थित संग्रहालय को भी देखा. उक्त धाम की भौगोलिक और प्राकृतिक बनावट देख पी के ठाकुर काफी खुश दिखे. उनके परिवार के सदस्यों को भी मा मुंडेश्वरी धाम काफी पसंद आया.

इस मौके पर शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी मो. रहमान, कैमूर की एसपी हरप्रीत कौर, एएसपी जगन्नाथ रेड्डी के अलावे कई थानो की पुलिस मौजूद दिखी. वहां से डीजीपी के काफिले ने कुदरा होते हुए रोहतास जिले की सीमा में प्रवेश किया. सासाराम होते हुए डीजीपी ने आरा-पटना के लिए विदा ले लिया.

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