दिलीप ने शनिवार को पत्नी से कहा था – बच्चा सब के ठीक से रखना

पटना (मनोज प्रियदर्शी की रिपोर्ट) : दानापुर के लोग उस वक्‍त सन्‍न रह गए जब अमरनाथ यात्रियों से भरी बस के खाई में गिरने की खबर सामने आई. लोगों के होश तब और उड़ गए, जब मरने वालों में दानापुर के लोगों का नाम सामने आया. थोड़ी देर में ही मीडियाकर्मियों की गाड़ियां पहले दानापुर सदर बाजार के बर्तन विक्रेता दीनानाथ साव के दुकान पर पहुँची. फिर उन्हें लेकर बाजार से थोड़ी दूर पर स्थित भट्ठा रोड की ओर दौड़ी.

बता दें कि जम्मू -श्रीनगर मार्ग पर अमरनाथ दर्शन को जा रही बस खाई में गिर गई. जिसमें बिहार के चार यात्रियों की मौत हो गई. इसकी खबर ने बिहार में सिहरन पैदा कर दीलोगो को एकबारगी लगा कि यह भी आतंकी हमला तो नहींलेकिन कुछ देर बाद जब अपडेट आया कि संतुलन खोने से बस खाई में गिर गयी और उसमे बिहार के तीन यात्रियों की मौत की सूची जारी हुईकुछ देर में ही तीनों का घर दानापुर बताया गया तो अचानक भट्ठा रोड के दीना नाथ साव के घर से जोरजोर से रोने और चित्कारने की आवाजे गूंजने लगी.

दिलीप की पत्नी

मीडियाकर्मियों से पता चला कि दीनानाथ के दोनों बेटों पवन और दिलीप की इस हादसे में मौत हो गई है. खबर पहुँचते ही घर में पवन की पत्नी रिंकी और दिलीप की पत्नी भी रिंकी अपने छह छोटे बच्चों से लिपट रोने लगी. किसी को इन बातों पर विश्वास नहीं हो रहा थादोनों की माँ राजकुमारी देवी सामने बैठी अपनी बहुओं और पोते-पोतियों को बड़ी हिम्मत से संभालने की कोशिश में लगी थी. एक पल के लिए तो ऐसा लगा कि जैसे पूरे परिवार को लकवा मार दिया हो. जैसे-जैसे इलाके के लोगों को खबर मिल रही थी, वो भी घर के बाहर जुटने लगे थे. दोनों के छोटे भाई गोविंदा और रमेश हादसे की जानकारी जुटाने में लगे थे. साथ ही ये पता करने में लगे थे कि घटनास्थल तक वो कैसे पहुंच सकते हैं.

पवन की पत्नी और बच्चे

उधर रिंकी को किसी अनजाने डर ने आज शाम 5 बजे ही अनहोनी के संकेत दे डाले थे. दरअसल दिलीप ने कल रात साढ़े नौ बजे फोन कर बताया कि वे सभी बस से जम्मू से निकल चुके हैं और उसी रात करीब 2 बजे अमरनाथ पहुँच जाएंगे. दिलीप 12 जुलाई की शाम अपने सगे भाई पवन और दानापुर बाजार के ही आधा दर्जन व्यापारी मित्रो के साथ निकला था. 25 या 26 तारीख तक लौटने की बात पत्नी को बताया था. लेकिन बाबा बर्फानी के दर्शन की राहें उसकी अंतिम यात्रा का संजोग बिछाये बैठी थी. सो उसका आभास भी होना लाजिमी था.

शायद इसलिए ही दिलीप ने पत्नी रिंकी से माता-पिता का हाल जानने के बाद कहा था कि बच्चा सब के ठीक से रखना. शनिवार रात के बाद आज शाम 5 बजे दिलीप ने कॉल करने का पत्नी से वादा किया था. वादाखिलाफी से बेचैन पत्नी ने 7 बजे तक कॉल का इंतजार किया और उसके बाद जब कॉल किया तो दिलीप की तरह मोबाइल भी खामोश हो चुका था.

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