डॉन बास्को स्कूल के डायरेक्टर ने कहा, चीनी है मीठा जहर, खाना छोड़ दीजिए

लाइव सिटीज डेस्क : कहते हैं कि जान है तो जहान है. भाग—दौड़ भरी जिंदगी, आधुनिक जीवन शैली, खानपान की चीजों में रासा​यनिक मिलावट, खानपान में परहेज की कमी और व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में तनाव ने जिंदगी को पहले से परेशानी भरा बना दिया है. स्वाद में मिठास देने वाली चीनी ने तो इसे और भी बदतर बना दिया है.

‘स्टूडेंट आॅक्सीजन मूवमेंट’ से जुड़े लोग चीनी के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ‘क्विट शुगर कैंपेन’ चला रहे हैं और लोगों से चीनी का प्रयोग छोड़ने एवं अगर जरूरत महसूस हो तो चीनी के बदले गुड़ अपनाने की सलाहियत दे रहे हैं. कैंपन के सिलसिले में स्टूडेंट आॅक्सीजन मूवमेंट में शामिल लोग पटना के फेमस डॉन बॉस्को स्कूल पहुंचे और स्कूल के डायरेक्ट अल्फ्रेड डी जी रोजारियो से इस संबंध में मदद मांगी.

डॉन बॉस्को स्कूल पटना का विख्यात स्कूल है और रोजारियो की पहचान सुविख्यात शिक्षाविद की है. रोजारियो इस मूवमेंट के मकसद से कुछ इस कदर प्रभावित हुए कि स्वयं उन्होंने और उनकी पूरी फैमिली ने चीनी का सेवन न करने का निर्णय ले लिया और इस कैंपेन के समर्थन में उमर आए. रोजारियो कहते हैं कि चीनी एक मीठा जहर है और हमलोगों ने इसे खाना छोड़ दिया है. अब जब कुछ मीठा खाने की जरूरत महसूस होती भी है तो हमलोग गुड़ खा लेते हैं.


स्कूल के प्रबंधन में रोजारियो का हाथ बंटा रहे उनके पुत्र एरिक जॉन डी रोजारिया भी चीनी और चीनी से बनी चीजें खाना बंद कर चुके हैं. वह कहते हैं, ‘जानकारी के अभाव में मेरे परिवार के लोग चीनी और चीनी से बनी चीजें खाने में कोई परहेज नहीं करते थे, लेकिन जब बॉडी पर इसके बैड इफेक्ट के बारे में पता चला तो हमलोगों ने तत्काल इससे दूरी बना ली. अब कभी मीठा खाने की इच्छा होती भी है तो हमलोग थोड़ी मात्रा में गुड़ का इस्तेमाल कर लेते हैं.’

डॉन बास्को स्कूल के डायरेक्टर अल्फ्रेड जी डी रोजारियो ने स्टूडेंट आॅक्सीजन मूवमेंट के क्विट शुगर कैंपेन पर प्रसन्नता प्रकट की और इसे भरपूर समर्थन देने की बात कही है. उन्होंने कहा कि हम चाहेंगे कि इस कैंपेन के जरिये स्कूली बच्चों को चीनी के हानिकारक प्रभावों के बारे पता चले और बच्चे चीनी और चीनी से बने सामानों को खाना छोड़ दें. यह उनके स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है.  अल्फ्रेड जी डी रोजारियो ने कहा कि हमारे स्कूल में दस हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं. हम इन बच्चों को और इन बच्चों के माध्यम से इनके परिवार के करीब 50 हजार लोगों तक चीनी के जहरीले प्रभाव, इसके सेवन से होने वाली बीमारियों के बारे में बताएंगे और चीनी के बदले गुड़, मिश्री और शहद का सेवन करने को प्रेरित करेंगे.

स्टूडेंट आॅक्सीजन मूवमेंट के कन्वेनर विनोद सिंह के आग्रह को स्वीकार करते हुए रोजारियो ने इस मुहिम को अपना समर्थन देने की बात कही और कहा कि डॉन बास्को स्कूल इस अभियान के साथ हैं और हमारे स्कूल के बच्चे और उनके परिवार भी इस अभियान में शामिल होकर चीनी से दूर रहने का संकल्प लें, स्कूल की ओर से इसकी कोशिश की जाएगी. उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए इसे जन अभियान बनाने की कोशिश करने की भी बात कही.

सच में, हेल्दी इंडिया के लिए क्विट शुगर कैंपेन को न सिर्फ समर्थन देने की, बल्कि अपनी सेहत के लिए चीनी को गुडबाय कहने की भी जरूरत है.