11 की उम्र में ही दुर्गेश करने लगा था क्राइम, पटना के बड़े डॉक्टरों की किडनैपिंग से की शुरुआत

पटना : खूनी खेल का माहिर खिलाड़ी कुख्यात दुर्गेश शर्मा सलाखों के पीछे तो चला गया. लेकिन इसके क्राइम की स्टोरी अभी खत्म नहीं हुई है. लोगों की जान से खेलना इसके लिए तो आम बात बन गर्इ् थी. जिले का मोस्ट वांटेड अपराधी बनने के पीछे दुर्गेश की कई स्टोरीज हैं. महज 11 साल की उम्र में ही दुर्गेश शर्मा ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था.

बात साल 2001 की है. अपराध की दुनिया में कदम रखते ही इसने बुद्धा कॉलोनी से पटना के एक बड़े डॉक्टर को किडनैप किया था. बाद में 13 लाख रुपए वसूल करने के बाद डॉक्टर को छोड़ दिया था. ये दुर्गेश की पहली आपराधिक वारदात थी. दुर्गेश का दूसरा आपराधिक वारदात भी किडनैपिंग था. इस बार उसने पटना के एक और बड़े डॉक्टर भगत सिंह को किडनैप किया था.

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खुद से की थी संतोष सिंह की हत्या

संतोष सिंह पटना का एक कुख्यात अपराधी था. इसके जरिए ही दुर्गेश ने अपराध की दुनिया में कदम रखा था. एक तरह से कहें तो संतोष की उंगलियों को पकड़ कर ही दुर्गेश ने आपराधिक दुनिया में चलना सीखा था. लेकिन बाद में दुर्गेश ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया था. अपने हाथों से उसकी हत्या कर दी थी. इस बात का खुलासा गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ में दुर्गेश ने किया.

संतोष की हत्या के पीछे के कारणों का भी उसने खुलासा किया. पुलिस की मानें तो संतोष सिंह ने सालों पहले दुर्गेश शर्मा के राइट हैंड रहे बिरजू राय की हत्या कर दी थी. उस दौरान वो पटना से बाहर रह रहा था. लेकिन वो पटना आया. फिर 15 दिनों तक पटना में रहा. इसके बाद उसने संतोष सिंह की हत्या की.

रविकांत तो फ्रेंड था

दुर्गेश से डीएसपी लॉ एंड आॅर्डर डा. मो. शिब्ली नोमानी ने लंबी पूछताछ की थी. पूछताछ के दौरान 16 जनवरी 2016 की सुबह गोली मारकर मौत के घाट उतारे गए सोनाली ज्वेलर्स के मालिक रविकांत की हत्या के पीछे का कारण क्या था? पुलिस टीम ये जानना चाहती थी. इस हत्या में अपना हाथ होने से दुर्गेश ने इनकार कर दिया. पुलिस अधिकारियों के सामने उसने रविकांत प्रसाद को अपना फ्रेंड बताया. गैंग में शामिल करमू राय को सुबह में ही शराब पीने की आदत थी. पुलिस को दिए बयान में दुर्गेश ने बताया कि शराब पीने के लिए करमू ने रविकांत से रुपए मांगे थे. नहीं देने पर ही उसने रविकांत की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

विधायक के सरकारी आवास से हुई थी गिरफ्तारी

साल 2001 से 2003 के बीच दुर्गेश कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था. उस दौरान भी वो पटना पुलिस के टॉप टेन के अपराधियों की लिस्ट में आ चुका था. पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए वो फरार चल रहा था. लेकिन उस दौरान पटना पुलिस की टीम ने उसे पकड़ ही लिया था. वो भी उसकी गिरफ्तारी उस टाईम जोगबनी से विधायक रहे जाकिर अनवर के पटना स्थित सरकारी आवास से हुई थी. वहां उसके साथ कई दूसरे अपराधी भी मौजूद थे. विधायक के सरकारी आवास में अपराधियों को देख पुलिस के भी होश उड़ गए थे.

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रिमांड पर लेकर इन मामलों में होगी पूछताछ

दुर्गेश शर्मा के द्वारा अंजाम दिए गए आपराधिक वारदातों की फेहरिस्त तो काफी लंबी है. जिसकी लिस्ट पटना पुलिस ने तैयार कर ली है. सबसे पहले पुलिस की लिस्ट में हाईकोर्ट के फर्जी बेल पेपर पर जेल से बाहर निकलने और फिर फरार हो जाने का मामला है. इसके बाद संतोष सिंह, मधु सिंह, चांदमारी राय, जर्दा व्यवसायी और रविकांत प्रसाद की हत्या और सब्जी व्यापारियों से रंगदारी वसूलने का मामला है. इसके अलावे भी कई आपराधिक मामले हैं, जिसमें दुर्गेश मोस्ट वांटेड अपराधी था. सोमवार को पटना पुलिस ने कोर्ट में तीन दिनों की रिमांड की अर्जी दाखिल कर दी है. कोर्ट का आॅर्डर मिलते ही पुलिस की टीम दुर्गेश को रिमांड पर लेकर एक-एक कर सारे मामलों में पूछताछ करेगी.

पटना से हर महीने पहुंच रही थी रंगदारी की रकम

पटना पुलिस के सामने दुर्गेश ने अपने खिलाफ दर्ज सारे आपराधिक मामलों को सही बताया है. उसने कब, कैसे और किस वारदात को अंजाम दिया इसकी पूरी डिटेल अब पुलिस के पास आ चुकी है. असम के तिनसुकिया में उसने किराए पर एक घर ले रखा था. बाकरगंज की रहने वाली कविता सिंह से कुछ साल पहले लव मैरेज किया था. अब इसका 11 साल का एक बेटा भी है. मां—बाप सहित अपनी पूरी फैमिली को वो तिनसुकिया में रखता था.

दुर्गेश की मां वहां एक प्राइेवट स्कूल में टीचर है. उसी स्कूल में उसका बेटा भी पढ़ाई करता है. वहीं इसके दो बहन और बहनोई भी रहते हैं. दुर्गेश को वहां सेटल कराने में दोनों बहनोईयों ने काफी मदद की थी. भले ही वो पटना में नहीं था. लेकिन उसके गुर्गे हर महीने रंगदारी के 60 हजार रुपए पटना से भेज दिया करते थे. अब दुर्गेश दमा और शूगर जैसी बीमारियों का पेशेंट बन चुका है.

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