GANGS OF CBSE (2) : स्टिंग में खुलासा, खुली ठेकेदारी है स्कूलों की, पता सबों को है

पटना : बिहार बोर्ड के इंटर आर्ट्स के टॉपर गणेश के फर्जीवाड़ा का खुलासा करने के बाद लाइव सिटीज बिहार के स्कूलों के गोरखधंधे की लगातार पड़ताल कर रहा है. लाइव सिटीज की स्पेशल रिपोर्टिंग टीम (SRT) को प्रारंभिक पड़ताल में ही पता चला कि सीबीएसई के स्कूलों का धंधा BSEB के स्कूलों की तुलना में बहुत बड़ा है. कोई 500 करोड़ रुपयों का सालाना बाजार है. पटना वाले श्रीवास्तव जी ‘किंग ऑफ़ किंग्स’ हैं.



लाइव सिटीज की स्पेशल रिपोर्टिंग टीम का आज बुधवार का टास्क कुछ दूसरा था. लेकिन सुबह-सुबह पटना के हिंदी के बड़े अखबार में छपे जैकेट विज्ञापन (ख़बरों के मुख्य पृष्ठ से भी पहले का पृष्ठ) ने तत्काल नया टास्क निर्धारित कर दिया. यह विज्ञापन एक स्कूल का था. साथ में, कोचिंग का विज्ञापन भी लगा था. एडमिशन का ऑफर था. कई नंबर छपे थे. अब टीम के अंडरकवर रिपोर्टर ने तय किया कि मामला ताजा है, पहले इसकी पड़ताल ही कर लेते हैं.

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फैसले के बाद टीम ने जरुरी तैयारी की. सभी साक्ष्य भी रखने थे. अंडरकवर टीम के रिपोर्टर ने खुद को छपरा का निवासी बना लिया. वे दो बच्चों के बाप बने. दोनों बच्चों का दाखिला 11वीं कक्षा में कराना है. स्कूल ऐसा चाहिए, जहां दाखिला लेने के बाद कभी क्लास न होता हो और न जाने की जरुरत हो. भूमिका के रूप में यह भी बताने को तय किया गया कि दोनों बच्चों को कोचिंग लेने कोटा (राजस्थान) जाना है. अब आगे आप पढ़िये किन नंबरों पर किन स्कूलों ने क्या कीमत बताई और क्या ऑफर दिए.

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यह नंबर अखबार के विज्ञापन में छपा था. विज्ञापन होली क्रॉस स्कूल का था. सीबीएसई से मान्यता प्राप्त बताया गया था. फोन स्कूल में रिसीव होता है. कोई रितु मैडम बात कर रही हैं. अंडरकवर रिपोर्टर उन्हें दोनों बच्चों के दाखिले की बात बताता है. मैडम कहती हैं – 30 हजार रुपया एडमिशन फी है. दाखिला कराने आनेवाले पहले 40 को 50 प्रतिशत की रियायत मिलेगी. मंथली फी 2700 रूपये होगा. लेकिन मैडम को जब यह बताया जाता है कि दोनों बच्चों को क्लास नहीं अटेंड करना है, तो रितु मैडम कहती हैं – अच्छा, आप FLYING एडमिशन दिलाना चाहते हैं. मेरे स्कूल में तो नहीं होता, लेकिन हो जायेगा. कैसे, कहती हैं – लाइन पर रहें, दूसरे से बात कराती हूं. दोनों साल के 30 हजार रूपये लगेंगे.

रिपोर्टर लाइन पर ही है. वह दूसरे से कुछ फुसफुसाती हैं. फिर कहती हैं – FLYING स्टूडेंट्स के एडमिशन के लिए आपको बोरिंग रोड के कृष्णा अपार्टमेंट के सामने कैरियर अचीवर्स में जाना होगा. इस कोचिंग का विज्ञापन आपने आज स्कूल वाले विज्ञापन में भी देखा है. वहां आपको विशाल पारितोष मिलेंगे, जो सारा काम करा देंगे. जब रिपोर्टर यह पूछ्ता है कि कौन से स्कूल से फॉर्म भरवाएंगे, तो बताया जाता है कि पार्क माउंट स्कूल.

स्टिंग 1 का निष्कर्ष – होली क्रॉस स्कूल दाखिले का सौदा 30 हजार रूपये में करा रहा है. स्कूल जाने की कोई जरुरत होगी ही नहीं. सीधे परीक्षा में शामिल होना है. सीबीएसई के गाइडलाइन्स के मुताबिक़ ऐसे स्कूलों की मान्यता बहाल नहीं रह सकती, लेकिन धंधा चालू है.

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छपे विज्ञापन में होली क्रॉस स्कूल के पाटलिपुत्र ब्रांच का लैंडलाइन नंबर भी छपा था. लैंडलाइन की प्रामाणिकता अधिक होती है, इसलिए अंडरकवर रिपोर्टर ने यहां भी फोन घुमाया. फोन किसी सुरभि मैडम ने रिसीव किया. मैडम ने कहा – हमारा स्कूल अब FLYING स्टूडेंट्स का एडमिशन नहीं लेता, लेकिन व्यवस्था तो है न. वह कहती हैं कि जब हमारे स्कूल को सीबीएसई की मान्यता नहीं मिली थी, तो पार्क माउंट स्कूल की फ्रेंचाइजी थी. वहीँ से फॉर्म भर देते थे. आपके बच्चों का भी काम हो जाएगा.

सुरभि मैडम कीमत 25 हजार रूपये बताती हैं. यह पूछने पर कि और तो कुछ नहीं देना पड़ेगा, कहती हैं – नहीं-नहीं, बस प्रैक्टिकल के समय नंबर बढ़वाने के लिए 3-4 हजार रूपये और खर्च करने होंगे. वह आश्वस्त करती हैं कि बच्चों को 11वीं कक्षा का एग्जाम देने भी नहीं आना होगा. सीधे बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे. कोई परेशानी नहीं होगी. पार्क माउंट स्कूल दानापुर के नेउरा में है. हां एडमिशन फॉर्म के 500 रूपये भी लगेंगे.

स्टिंग 2 का निष्कर्ष – धंधे का सौदा 30 हजार से घटकर 25 हजार पर आ गया. छूट इतनी अधिक मिल रही है कि 11वीं की परीक्षा में भी शामिल होने को नहीं आना पड़ रहा. प्रैक्टिकल में नंबर्स बढ़वा देने की गारंटी भी मिल रही है. अब बड़ा सवाल यह कि क्या इस खुले धंधे का पता सीबीएसई को नहीं है?

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पटना में जब पड़ताल शुरु हुई, तो होली मिशन स्कूल का नाम हर किसी ने लिया. इसके खुलासे तो कई किश्तों में होंगे. बहरहाल, अंडरकवर रिपोर्टर ने आज सुबह इनका नंबर इनके स्कूल की वेबसाइट से प्राप्त किया. जब नंबर लगाया गया, तो वह देर तक पीं-पीं करता रहा, लेकिन लगा नहीं. आगे और कोशिश होती, उसके पहले उधर से ही फोन आ गया. इसका मतलब यह था कि नंबर उनके पास पहुंच गया था.

कॉल करनेवाले से बातचीत शुरु हुई. पहले वे स्टूडेंट्स का 10th का CGPA जानते रहे. फिर स्कूल का ठिकाना बताया. कहा – आ जाइये पटना. FLYING स्टूडेंट्स का एडमिशन लेना है, हो जायेगा. कोई दिक्कत नहीं है. 22 हजार रूपये लगेंगे. क्लास करने नहीं आना होगा. हां बोर्ड के समय प्रैक्टिकल में शामिल होना होगा. यहां यह भी बताया गया कि 11वीं की परीक्षा में भाग लेना है. आगे और कुछ जानने-समझने की कोशिश की जाती है, लेकिन फोन काट दिया जाता है.

स्टिंग 3 का निष्कर्ष – होली मिशन ने अबतक का बेस्ट प्राइस 22 हजार रूपये बताया है. क्लास के बारे में कोई फ़िक्र नहीं करनी है. नहीं आये तो क्या हुआ. स्कूल के रिजल्ट को बताकर प्रभावित करने का प्रयास अलग से किया गया. लेकिन जब इतने सहज तरीके से FLYING एडमिशन हो रहे हैं, तो बाकी खेल आप समझ गए होंगे. कुछ नई जानकारी फिर कभी.

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इस नंबर को तलाशने में अंडरकवर टीम को थोड़ी मेहनत करनी पड़ी. यह नंबर जानना इसलिए आवश्यक था, क्योंकि होली क्रॉस स्कूल में हुई बातचीत में पार्क माउंट स्कूल का जिक्र आया था. पार्क माउंट स्कूल से जुड़े इस नंबर को सीबीएसई से जुड़े पोर्टल और गूगल बाबा की मदद से प्राप्त किया गया.

कॉल करने पर फोन तुरंत रिसीव हुआ. अंडरकवर टीम ने फिर से पुरानी बातें दोहराई. यहां से भी जवाब मिला – कोई परेशानी नहीं है. दोनों बच्चों का एडमिशन हो जायेगा. क्लास बिलकुल नहीं करने आना होगा. 28 हजार रूपये प्रति छात्र लगेंगे. रियायत की कोई बात की गई, तो कहा गया – संभव नहीं है. और कोई खर्चा तो नहीं पड़ेगा – जवाब मिला, सब छपरा से ही जान लीजियेगा क्या, पटना आ जाइये, सबकुछ देख लेंगे. इस साल भी कई सौ लड़के परीक्षा में शामिल कराये गए थे, किसी को कोई तकलीफ नहीं हुई.

लेकिन इस स्कूल के बारे में थोड़ा और जान लें. पिछले साल 2016 में बोर्ड के जब नतीजे आये थे, तो बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट विनायक विजेता का एक पोस्ट वायरल हुआ था. पोस्ट कह रहा था कि यह स्कूल नाजायज पैसे की उगाही के लिए सर्टिफिकेट नहीं दे रहा है. विजेता की बेटी बोरिंग रोड के स्कूल में पढ़ती थी, जिसका फॉर्म यहां से भरा गया था. पोस्ट पर जब हंगामा खड़ा हुआ, तो बुलाकर सर्टिफिकेट दिया गया था.

स्टिंग 4 का निष्कर्ष – पार्क माउंट स्कूल का धंधा चोखा है. कई वर्षों से चला आ रहा है. ऐसा हो नहीं सकता कि धंधे की जानकारी पटना में सीबीएसई के रीजनल ऑफिस को न हो, लेकिन वह आंख मूंदे है, कारण जो भी हो.

आज की पड़ताल में बस इतना ही. फिर नई जानकारियों के साथ लाइव सिटीज की स्पेशल रिपोर्टिंग टीम मिलती है अगले पोस्ट में.

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