आतंकी को अरेस्ट कराया था अनुराग ने, इनाम मिलने के बदले हो गया नुकसान

गया (पंकज कुमार की रिपोर्ट) : करीब तीन हफ़्ते से युवा पत्रकार अनुराग बसु का साइबर कैफे बंद है. अनुराग ने 13 सितंबर को तौसीफ़ पठान को उसके एक साथी के साथ पकड़ा था. तौसीफ़ की तलाश गुजरात पुलिस को लंबे अरसे से थी. वह 2008 में दो सीरियल बम विस्फोट की आतंकी वारदात में शामिल था. तौसीफ़, साना खां और सरबर खां अभी न्यायिक हिरासत में है और गया जेल में बंद है.

बिहार एटीएस के एसपी सुनील नायक ने गया के सिविल लाइंस में दर्ज तौसीफ़ के खिलाफ प्राथमिकी को पटना एटीएस थाना में स्थानांतरित करने के निर्णय की सूचना गया पुलिस को दे दी है. सूत्रों का दावा है कि पटना एटीएस तौसीफ़ को पुलिस रिमांड पर पहले लेकर पूछ्ताछ करेगी. उसके बाद गुजरात पुलिस की एटीएस तौसीफ़ को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर गुजरात जाएगी.

गौरतलब है कि 13 सितम्बर को तौसीफ़ पकड़ा गया था. गया पुलिस ने अनुराग बसु के साइबर कैफे को मास्टर कंप्यूटर साक्ष्य के लिए जब्त कर थाना ले गई. दुकान में चार कर्मचारी कार्य करते थे. पुलिस कार्रवाई और आतंकवादी की गिरफ्तारी के बाद हड़कंप मच गया.

बंद पड़ा साइबर कैफ़े

वहीं गया पुलिस ने अनुराग के कई बार आग्रह करने के बावजूद उसे मास्टर कंप्यूटर नहीं लौटाया था. सोमवार को गया पुलिस ने अनुराग को मास्टर कंप्यूटर लौटा दिया है. यह जानकारी स्वयं अनुराग ने दी है. लेकिन कर्मचारियों के वापस नहीं लौटने और सुरक्षा को लेकर साइबर कैफे मंगलवार तक बंद था. अनुराग गया में एक मैगजीन भी निकालते हैं.

अनुराग का कहना है कि आतंकवादी को पकड़ने के लिए पुलिस महकमे की तरफ से कोई पुरस्कार या सम्मान तो दूर प्रशंसा के दो बोल तक नहीं बोले गए. उल्टे करीब तीन सप्ताह तक साइबर कैफे बंद रखना पड़ा और अर्थिक नुकसान झेलना पड़ा.

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