शराब से भी बड़ी मुसीबत बनकर उभरी है कफ सिरप की तस्करी…!

Cough_Syrup

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार में अप्रैल 2016 से लागू हुई पूर्ण शराबबंदी और बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगाई गई फटकार ने पुलिस को फिर से नए दबाव में ला दिया है. पुलिस और प्रशासन अब शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस अधिक सतर्कता से जुटे हुए हैं.

लेकिन नशे के कारोबारियों ने शराब पर बढ़ते शिकंजे को रोकने के लिए नशे का स्वरूप ही बदल दिया है. बिहार—बांग्लादेश की सीमा पर अब अवैध रूप से कफ सीरप की तस्करी शुरू हो चुकी है.

शराबबंदी के बाद से नशे के सौदागरों ने शराब की बजाय कोडीन कैमिकल पर आधारित कफ सीरप की बांग्लादेश सीमा पर तस्करी शुरू कर दी है. मुख्य बात यह है कि भारत से कफ सीरप बांग्लादेश भेजा जा रहा है और वहां पर महंगे दामों पर बिक भी रहा है.

लेकिन राजधानी पटना से महज 400 किमी दूर स्थित पूर्वी बिहार का किशनगंज जिला भारत—बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है. सीमा प्रहरियों का मुख्य लक्ष्य इस वक्त सीमा की सुरक्षा के साथ ही छोटी शीशीयों में होने वाली कफ सीरप की तस्करी को रोकना ही है.

कफ सीरप में मुख्यत: फैंसिडिल की ही प्रमुखता से तस्करी की जा रही है. कफ सीरप की बिहार में तस्करी के पीछे मुख्य कारण इसमें मौजूद तत्वों का मिश्रण है. जिसके सेवन से बिल्कुल शराब के नशे जैसी तरावट आती है.

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किशनगंज में तैनात बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि हम सीमा पर कड़ी चौकसी रख रहे हैं. क्योंकि किशनगंज बांग्लादेश से होने वाली तस्करी का प्रमुख मार्ग है. हमें हाल ही में बड़ी संख्या में कफ सीरप की खेप जब्त की है.

कफ सीरप भारत से बांग्लादेश तस्करी करके ले जाया जाता है और वहां पर ऊंचे दामों में बेचा जाता है. उदाहरणत: फेंसिडिल की एक बोतल जिसकी कीमत भारत में 100 रुपये है, बांग्लादेश के कई हिस्सों में 300 रुपये से लेकर 700 रुपये तक बेचा जाता है.

कोडीन कैमिकल पर आधारित कफ सीरप फेंसिडिल और कोरैक्स, 344 उन दवाओं में शुमार हैं जिनकी बिक्री पर पिछले साल फरवरी में भारत ने प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन अभी भी चोरी छिपे इन्हें दवा दुकानकार न सिर्फ बेच रहे हैं बल्कि कई कंपनियां इस फैसले पर प्रतिबंध की मांग को लेकर कोर्ट का रुख भी कर चुकी हैं.

बीएसएफ के अधिकारी ने बताया कि कफ सीरप की अधिकतर खेप हिमाचल प्रदेश से ही आती है. गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश देश में दवा निर्माण का मुख्य हब है. खुफिया सूत्रों की सूचना के आधार पर हिमाचल से आ रहे कफ सीरप से लदे हुए कई ट्रकों को जब्त किया गया है.

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अभी हाल ही में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई आधिकारिक उच्चस्तरीय वार्ता में कफ सीरप की तस्करी का मामला भी उठा था. यह मामले खासतौर पर तबसे बढ़ गए हैं जबसे भारत में कोडीन आधारित कफ सीरप पर रोक लगाई गई है. तस्कर अक्सर तस्करी के लिए भारत और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाके में रहने वाले ग्रामीणों का इस्तेमाल करते हैं.

स्थानीय नागरिक तमाम छोटे रास्तों से होकर तस्करी के लिए पैडलर का काम करते हैं. तस्करी बेहद सधे और शातिराना तरीके से की जाती है. स्थानीय लोग तारबंदी वाली सीमा के करीब बैठकर कफ सीरप से भरे हुए झोलों को उस तरफ फेंक देते हैं. तमाम गश्त और निगरानी की बावजूद तस्करी अभी भी सुरक्षाबलों का सिरदर्द बनी हुई है.

किशनगंज में कफ सीरप का काला कारोबार शराब की तस्करी से भी बड़ा है. बिहार के मुस्लिम बहुल किशनगंज और अररिया जिलों में शराबबंदी से परेशान नशेबाजों ने अब कफ सीरप का सेवन शुरू कर दिया है.

सूत्र बताते हैं कि अररिया में कई दवा दुकानों पर छापेमारी और जाब्ते की कार्रवाई के बाद भी कफ सीरप के सेवन पर रोक नहीं लग पा रही है. कफ सीरप का काला कारोबार आने वाले दिनों में सुरक्षा कर्मियों के लिए शराब से भी बड़ा सिरदर्द बनने वाला है.

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