कृषि समन्वयकों की बहाली का रास्ता साफ, 30 मई तक परिणाम प्रकाशित करे बीएसएससी: हाई कोर्ट

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पटना (एहतेशाम) : सूबे में करीब 3600 कृषि समन्वयकों की बहाली का रास्ता गुरुवार को साफ हो गया. पटना उच्च न्यायालय ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग को त्रुटियों को दूर करते हुए हर हाल में 30 मई तक अंतिम परिणाम प्रकाशित करने का निर्देश बिहार कर्मचारी चयन आयोग को दिया है. साथ ही साथ अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं करने पर बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि क्यों नहीं उनके विरुद्ध अदालती आदेश की अवमानना का वाद चलाया जाए. न्यायाधीश ज्योतिषरण की एकलपीठ ने रणधीर भारद्वाज एवं अन्य कई ओर से दायर याचिका पर एकसाथ सुनवाई पूरी करते गुरुवार को उक्त निर्देश दिया.



गौरतलब है कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा गत वर्ष 3600 कृषि समन्वयकों की बहाली हेतु विज्ञापन निकाला गया था. परंतु अंतिम रूप से बनाये गये मेधा सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने का मामला प्रकाश में आया था. जिसके बाद याचिकाकर्ता एवं अन्य ने धांधली का आरोप लगाते हुए पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा कर न्याय की गुहार लगायी थी. याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया कि इस परीक्षा का मेरिट लिस्ट जारी किए जाने में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गयी.

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उन्होंने उदाहरण पेश करते हुए अदालत को बताया था कि चयनित अभ्यर्थियों की सूची में 13 निर्धारित आयु सीमा से अधिक उम्र के हैं और यहां तक 60 साल के अभ्यर्थियों का नाम मेरिट लिस्ट में शामिल है. इसमें यह भी वर्णित नहीं है कि किस अभ्यर्थी ने कितना अंक प्राप्त किया. अदालत को यह भी बताया गया था कि चयन प्रक्रिया में बिहार के बाहर के अभ्यर्थियों को भी आरक्षण का लाभ दिया गया है. बीएसएससी ने गत वर्ष 6 दिसंबर को 3599 कृषि समन्वयक के पद पर बहाली के लिए मेरिट लिस्ट जारी किया गया था.

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याचिकाकर्ताओं का कहना था की बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने पूरी मनमानी और दलाली करते हुए सभी गलत और फर्जी लोगों को गलत तरीके से चयन किया है. इस बहाली में पैसे का पूरा खेल हुआ है और इसकी जांच होनी चाहिए. इस फर्जीवाड़ा के कारण 500 कृषि समन्वयक जो संविदा पर तीन साल से अधिक से कार्यरत है उन्हें नियमित नियुक्ति से बाहर कर दिया गया था.