फर्जी सर्टिफिकेट का खेल : सरगना पर चला मनु महाराज का डंडा

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पटना/लाइव सिटीज डेस्क : एक मर्डर केस के सिलसिले में पटना पुलिस के हत्थे चढ़े भवानी शंकर पांडेय की वजह से बिहार के विभिन्न जिलों में चल रहे कई मामलों में नया मोड़ आ सकता है. कई आरोपियों पर फिर से कानून का शिकंजा कस सकता है. वजह है भवानी शंकर पांडेय द्वारा कई संगीन मामले के आरोपियों को बना कर दिया गया फर्जी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट. इन फर्जी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट्स की वजह से कई आरोपी खुद को नाबालिग साबित कर कानून के सामने सजा से बच निकलने में सफल हो रहे हैं. लेकिन अब इस पर भी एसएसपी मनु महाराज का डंडा चल पड़ा है.

पटना पुलिस का मानना है कि साल 2011 से 2013 के बीच भवानी शंकर पांडेय ने लगभग 100 से अधिक फर्जी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट बेच कर आरोपियों/अपराधियों को कानून से बचने में मदद की है. पुलिस का कहना है कि इन स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के माध्यम के अपराधी अपने को किशोर साबित कर आसानी से कानून की गिरफ्त से बचने में सफल रहे हैं. कानूनन एक किशोर को मात्र 3 साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा जा सकता है.

पटना एसएसपी मनु महाराज ने मीडिया को बताया है कि 62 वर्षीय भवानी शंकर पांडेय ने ये फर्जी सर्टिफिकेट्स तब जारी किए जब वो पटना के शास्त्री नगर स्थित ओम शिव पार्वती मध्य विद्यालय का हेडमास्टर था. महाराज ने कहा कि अपराधियों को फर्जी सर्टिफिकेट देने के बदले पांडेय ने उनसे 50 हजार रुपये तक की कीमत वसूली है. एक कमरे में चलनेवाले इस स्कूल की मान्यता साल 2013 में खत्म कर दी गई थी.

भवानी शंकर पांडेय को पुलिस ने इसी साल 24 मई को संतोष कुमार सिंह की शिकायत पर गिरफ्तार किया था. संतोष कुमार सिंह एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट सौरभ कुमार के पिता हैं, जिनकी हत्या साल 2015 में हुई थी. मामले में आरोपी ने खुद को किशोर साबित करने के लिए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट पेश किया था. यह सर्टिफिकेट पांडेय द्वारा ही निर्गत किया गया था. संतोष सिंह ने आरोपी द्वारा पेश सर्टिफिकेट की वैधता को कोर्ट में चुनौती दी थी.

पांडेय की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद ही दहेज हत्या पीड़ित एक परिवार ने दावा किया था कि आरोपी ने कानून से बचने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट के माध्यम से खुद को घटना के वक़्त किशोर साबित करने की कोशिश की थी. उक्त आरोपी के पास से अलग-अलग दस्तावेज मिले हैं, जिनमें उसकी साल 1988 से लेकर 1998 के बीच 4 जन्मतिथि बताई गई हैं.

एसएसपी मनु महाराज ने आगे बताया कि पांडेय ने रंजीत कुमार को भी फर्जी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट दिया है, जो मार्बल ट्रेडर रामचंद्र झा मर्डर केस में आरोपी हैं. कम से कम दो और आरोपी पिंकू जायसवाल और माखन गोप जो 21 से अधिक मामलों में अभियुक्त हैं, वो भी इन सर्टिफिकेट के जरिये खुद को किशोर साबित कर बेल पाने में सफल रहे हैं. मनु महाराज ने हालांकि इस बात से इनकार किया कि इन दोनों को पांडेय ने ही सर्टिफिकेट उपलब्ध कराये थे.

सूत्रों की मानें तो इस फर्जी सर्टिफिकेट मामले के तार पिछले माह 17 मई को बेतिया कोर्ट परिसर में हुए कुख्यात बबलू दुबे हत्याकांड से भी जुड़ रहे हैं. इस हत्या के सिलसिले में पुलिस की पकड़ में आया एक संदिग्ध फर्जी सर्टिफिकेट की बदौलत रिमांड होम में रह रहा था. अब पटना पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पांडेय ने बिहार से बाहर के अपराधियों को फर्जी सर्टिफिकेट बेचा है या नहीं.

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