सच ये है : गिरिडीह से समस्तीपुर पढ़ने आया था गणेश, बन गया बिहार टॉपर

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार बोर्ड की 12वीं के नतीजे आज मंगलवार को घोषित किये गये. इसके साथ ही टॉपर्स भी सामने आ गये. सरकार सभी स्ट्रीम के टॉपर्स (नंबर-1) को 1 लाख रुपये का पुरस्कार देने जा रही है.

साल 2016 में बिहार के टॉपर्स फर्जी निकले थे.सो, 2017 में एग्जामिनेशन बोर्ड बहुत सतर्क था. परिणाम हुआ कि पूरे बिहार के नतीजे खराब हुए. पास होने वाले छात्रों से अधिक संख्या फेल होने वालों की है.हाल ये है कि बिहार के टॉपर्स को भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के किसी बड़े कॉलेज में दाखिला नहीं मिलने जा रहा.

 

टॉपर्स का एलान इस तरीके से किया गया. साइंस में सिमुलतला, जमुई की खुशबू कुमारी (86.2 फीसदी), कॉमर्स में कॉलेज ऑफ कामर्स के प्रियांशु जायसवाल (81.86 फीसदी) और आर्ट्स में समस्तीपुर के गणेश कुमार (82.6 फीसदी).

बोर्ड के एलान के बाद लाइव सिटीज की टीम ने टॉपर्स की तलाश शुरु की. साइंस और कॉमर्स के टॉपर आसानी से मिल गये. साइंस की टॉपर खुशबू को तो इस बात का दुख है कि उसे नंबर कम मिले हैं. खुशबू ने आईआईटी(मेन्स) की प्रतियोगिता भी पास कर ली है. अब एडवांस के रिजल्ट का इंतजार कर रही है.

लेकिन जब आर्ट्स के टॉपर की पड़ताल शुरु हुई, तो मुश्किल का दौर प्रारंभ हुआ. हालांकि  बोर्ड के चेयरमैन आनंद किशोर ने नतीजों के एलान के वक्त यह बताया था कि उन्होंने सभी टॉपरों से बातचीत कर बधाई दी है.

खैर आगे यह जानकारी मिली कि आर्ट्स का टॉपर समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड के चकहबीब गांव के रामनंदन सिंह जगदीश नारायण (उच्य माध्यमिक) इंटर कॉलेज का छात्र है. यह स्कूल समस्तीपुर के जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर की दूरी पर सुदूर ग्रामीण इलाके में स्थित है.

स्कूल का पता चला, तो लाइव सिटीज ने समस्तीपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी से बातचीत की. उन्हें भी न तो टॉपर का पता था और न ही स्कूल की जानकारी ठीक से थी. आगे लाइव सिटीज ने स्कूल का पता कर लिया. स्कूल तक पहुंचने को समस्तीपुर से ताजपुर तो आप बस से जा सकते हैं, लेकिन आगे फटफटिया गाड़ी ही मिलेगी. अब आप इस पोस्ट के साथ लगी तस्वीर को देख स्कूल की इमारत का अनुमान स्वंय कर लीजिए. बताने की शायद जरूरत नहीं हैं.

स्कूल का पता करने पर टॉपर गणेश कुमार की तलाश लाइव सिटीज ने शुरू की. इस स्कूल में जिन गांवों के बच्चे पढ़ने जाते हैं, वहां तो कोई गणेश कुमार मिला नहीं. परिणाम इलाके के किसी भी घर में टॉपर का जश्न नहीं था. स्कूल में भी टॉपर गणेश के बारे में ठीक से बताने वाला कोई नहीं मिला. आखिरकार, स्कूल के सेक्रेट्री जवाहर प्रसाद सिंह संपर्क में आये. उन्होंने जो बताया, वह आप जानिए और सच का हिसाब-किताब खुद कर लीजिए.

टॉपर गणेश का अंकपत्र

सेक्रेट्री जवाहर प्रसाद सिंह कहते हैं कि यह सच है कि गणेश उनके ही स्कूल का छात्र है. टॉपर होने से हम सभी खुश हैं.लेकिन जब यह पूछा गया कि गणेश किस गांव का है, तो जवाब गोल-मटोल मिलने लगा.

गांव का नाम नहीं बताया पर यह कहा कि वह स्कूल का नियमित छात्र है.क्लास करने कहां से आता था, जवाब मिला- समस्तीपुर से आता था.मतलब यह कि इस स्कूल में पढ़ने आने के लिए वह रोज 22 किलोमीटर का सफर करता था, जिसमें बस और फटफटिया गाड़ी की सवारी शामिल थी.

आगे की जानकारी और चौंकाती है. असली खबर यह मिलती है कि टॉपर गणेश झारखंड के गिरिडीह के सीरीया गांव का रहने वाला है.

अब इसके बाद वन-लाइनर टॉपर गणेश की स्टोरी कहें, तो यह कहेंगे- गणेश को पूरे गिरिडीह-झारखंड में कोई स्कूल नहीं मिला, समस्तीपुर के सुदूर देहात में स्थित एक स्कूल में पढ़ने को आया और बिहार का टॉपर बन गया.

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