Good News : 2009 से पहले पीएचडी करनेवाले भी अब बन सकेंगे लेक्चरर

लाइव सिटीज डेस्क : वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करनेवालों के लिए खुशखबरी है. अब वे भी लेक्चरर बन सकते हैं. यह सब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के पीएचडी रेगुलेशन-2009 में संशोधन किये जाने से संभव हुआ है. वहीं यूजीसी के इस संशोधन पर पटना यूनिवर्सिटी ने भी अपनी सहमति दे दी है. इससे वैसे अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा अवसर है, जिन्होंने 2009 के पहले पीएचडी कर ली है.

दरअसल यूजीसी के नये नियम पीएचडी रेगुलेशन-2009 की वजह से हजारों पीएचडी युवाओं को झटका लगा था. वे लेक्चरर बनने से वंचित हो गये थे. ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या बिहार में 11 हजार के आसपास है. अब नये संशोधन से इन अभ्यर्थियों को फायदा होगा.

 

यूजीसी द्वारा वर्ष 2016 की नयी गाइडलाइन जारी कर दी गयी. इस पर पटना यूनिवर्सिटी ने भी अपनी सहमति दे दी है. इससे वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करने वाले अभ्यर्थी भी अस्सिटेंट प्रोफेसर या लेक्चरर बन सकते हैं. हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गयी हैं. वैसे अभ्यर्थियों के लिए शोध से संबंधित दो रिसर्च पेपर को मैग्जीन में पब्लिश कराना होगा. शर्त यह भी है कि कम से कम एक रिसर्च पेपर फेमस न्यूज पेपर या मैग्जीन में पब्लिश हो.

इतना ही नहीं, शर्त के मुताबि​क संबंधित पीएचडी होल्डर को अपने शोध के आधार पर मिनिमम दो कॉन्फ्रेंस या सेमिनारों में अपना प्रजेंटेशन देना होगा. इसके आधार पर यूनिवर्सिटी की ओर से वैसे अभ्यर्थियों को सपोर्टिंग सर्टिफिकेट दिया जायेगा. सपोर्टिंग सर्टिफिकेट पाने वाले अभ्यर्थी नेट, एसईटी, एसएलईटी आदि के नहीं रहने पर भी वे अस्सिटेंट प्रोफेसर, लेक्चरर समेत अन्य समकक्ष पदों की बहाली के लिए वैलिड हो जायेंगे. बता दें कि ऐसे पीएचडी अभ्यर्थियों की संख्या केवल बिहार में 11 हजार के आसपास है. गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पटना यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल ने इस रेगुलेशन को बैठक में पास किया था.

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