अभी भी PMCH में तड़प रही है बिहार की ‘निर्भया’, आरोपियों के लिए मांग रही फांसी

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फाइल फोटो

पटना (शिल्पी सिंह) : पटना के PMCH के सर्जिकल आईसीयू वार्ड में बेड नंबर 8 पर पर पड़ी बिहार की ‘निर्भया’ अभी अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ रही है. हालांकि खबर है कि उसकी अस्मत तार-तार करने और फिर मरने के लिए ट्रेन से फेंक देने वाले तीन आरोपी पकड़े गए हैं. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. इधर PMCH में भी डॉक्टर दिनरात एक कर उसके जख्मों को भरने में लगे हैं.

इस बीच एक सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि इलाज से बिहार की ‘निर्भया’ के शरीर के जख्म शायद भर भी जाएं, लेकिन उसके मन-मस्तिष्क में जो घाव दरिंदों ने दिए हैं, क्या उसपर कोई मरहम-पट्टी कारगर हो पाएगी? शायद कभी नहीं ! इन्हीं सवालों से घिरी लाइव सिटीज रिपोर्टर ने PMCH जाकर निर्भया की कहानी समझने की कोशिश की है. आप भी जानिये…

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क्या हुआ था

आइए जानते हैं कि क्या हुआ था इस बच्ची के साथ. 15 जून की रात थी. रात के 11 बजे का वक्त रहा होगा. पीड़िता रूबी कुमारी (काल्पनिक नाम) उम्र- महज़ 16 साल, उस समय शौच के लिए घर से बाहर निकली थी. यह रोज की ही तो बात थी इसलिए डर जैसी कोई बात थी नहीं. उसे अपने साथ होने वाली किसी भी अनहोनी की जरा भी आशंका नहीं थी. बता दें कि आज भी उसके घर में शौचालय नहीं है. इस कारण से उसे और उसके घर वालों को शौचादि से निवृत्त होने के लिए बाहर ही जाना पड़ता है.

पीड़िता ने बताया कि उसे मृत्युंजय कुमार उर्फ भोथी एवं संतोष कुमार ने अपहृत कर लिया तथा वहीं पास में एक खेत में ले जाकर गैंग रेप किया. वह भयवश और मदद की आस में चिल्लाने लगी तो उन दरिंदो ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया. इसी दौरान आसपास छिपे उसके दूसरे साथी भी आ गए. पीड़िता ने बताया कि उसके साथ जिन सात-आठ हैवानों ने दरिंदगी की है उन में से दो को वह पहचानती है क्योंकि दोनों उसके पड़ोसी ही हैं.

उसकी भाभी ने बताया 

पीड़िता की भाभी जूली कुमारी ने बताया कि चूंकि वह रविवार का दिन था. टीवी पर क्रिकेट मैच आ रहा था. घर के सभी लोग मैच देखने में व्यस्त थे. किसी को इतना ध्यान नहीं रहा कि इस समय वह कहां है. रात के 2-3 बजे के करीब हमलोग टीवी देखने के बाद जब हम लोग उठे तो उसके कमरे पर नज़र पड़ी. जब उसे कमरे में नहीं देखा तो हमलोगों ने खोजबीन शुरू की. 2-3 घंटे की खोजबीन के बाद वह किउल स्टेशन के पास बेहोश हालत में मिली. तत्काल उसे डॉ. अशोक कुमार के पास लेकर गये जहां से उसे सदर हॉस्पिटल, लखीसराय रेफर कर दिया गया.

कैसे पहुंची किउल स्टेशन

जूली कुमारी ने बताया कि गैंग रेप के दौरान लड़की बेहोश हो गयी थी. इसके बाद उसे मार देने के ख्याल से दरिंदे मृत्युंजय कुमार उर्फ भोथी एवं संतोष कुमार उसे निकटवर्ती वंशीपुर स्टेशन पर ले गए. वहां दरिंदों ने उसे बांका—इंटरसिटी की एक बोगी में चढ़ाकर फिर से गैंग रेप किया. इसके बाद लड़की को किउल स्टेशन पर ट्रेन से नीचे फेंककर अपराधी भाग गए.

किन तकलीफों का कर रही है सामना

PMCH के सर्जिकल वार्ड की नर्स ने बताया कि उसके शरीर की कई हड्डियां टूट गई थीं. प्राइवेट पार्ट में जख्म की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसमें दो दर्जन से अधिक टांके लगाए गए हैं. उसकी बच्चेदानी फट चुकी है. उसे लगातार ब्लड और स्लाइन  चढाया जा रहा है. उसकी हालत पहले से बेहतर बतायी जा रही है, भविष्य क्या होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है.

क्या चाहती है पीड़िता 

पीड़िता ने लाइव सिटीज से बातचीत में बताया कि उसने सरकार तथा प्रशासन से आरोपियों को फांसी की सजा दिलवाने की मांग की है. उसने कहा कि मुझे नहीं पता कि अब मेरा क्या होगा! लोग मुझे किस नज़र से देखेंगे ! वह भयभीत है और बार-बार उसके मन में यह बात आ रही है कि क्या मैं फिर से पहले की तरह की जिंदगी जी पाउंगी. पीड़िता ने सुबकते हुए कहा कि मेरे लिए न सही, दूसरों के लिए सही इन दरिंदो को फांसी की सजा दिलवा दीजिये. मेरी यह बात सरकार तक पहुंचा दीजिये. किसी ओर लड़की के साथ अब ऐसा न हो.

परिजनों की है गुहार

उसका किसी के साथ न तो कोई दोस्ती थी और न ही दुश्मनी. फिर किसी ने ऐसा क्यों किया उसके साथ? पुलिस अभी तक कुछ भी नहीं कर पाई है. करेगी भी क्या, हमलोग साधारण आदमी हैं. हमारे पास कोई पावर तो है नहीं. हमलोग गरीब हैं. हमलोगों की शिकायत पर पुलिस ने दो लोगों को पकड़ तो लिया है पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है.

पीड़िता के छोटे भाई मनीष कुमार ने कहा कि पुलिस पूरे मामले को लव अफेयर का रंग देने में लग गई है. लखीसराय के एसपी के अनुसार यह गैंग रेप का मामला नहीं है. लड़की के जख्मों को वे परिवार वालों की पिटाई के कारण हुआ बता रहे हैं जबकि ऐसा नहीं है. ऐसे जख्म  पिटाई के कारण नहीं हो सकते हैं. क्या प्राइवेट पार्ट के जख्म भी पिटाई के कारण हुए हैं?

पीड़िता की भाभी जूली कुमारी कहती हैं कि हॉस्पिटल में हमलोगों को कोई कागज़ या रिपोर्ट दिखाया नहीं जाता है. लोग रोज बस वायदे कर के जाते हैं. उन्होंने बताया कि पीड़िता की मां का स्वास्थ्य ख़राब रहता है. जब से ऐसा हुआ है वह बहुत सीरियस है. सरकार ऐसा करने वालों के लिए क्यों नहीं तुरंत कोई सजा तय करती है?

उन्होंने कहा कि इस केस में मेरे दो भाई मिथुन और धर्मवीर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. वह निर्दोष है. संतोष ने अरेस्ट होने के बाद पुलिस को मेरे भाई का नाम बताया. बातचीत में जूली कुमारी ने बताया कि मेरी शादी के बाद मेरे भाई और मेरे ससुर के बीच थोड़ी गरमा-गरमी रहती थी. इसी वजह से मैं अपने मायके भी नहीं जाती थी. लेकिन मेरा भाई जरा भी दोषी नहीं है. वह बिलकुल बेकसूर है.

पुलिस को जमीनी स्तर तक जाकर खोजबीन कर सच्चाई का पता लगाना होगा.