बबलू दुबे हत्याकांड में कुणाल का ऑडियो टेप हुआ वायरल

बेतिया : बबलू दूबे की हत्याकांड से  पर्दा उठना अभी बाकी है. लेकिन इस हत्या की जिम्मेदारी कुणाल सिंह नाम के व्यक्ति खुद ही ले रहे हैं. दरअसल कुणाल ने पत्रकारों को फोन कर खुद बताया कि उन्होंने ही बबलू दुबे को मरवाने की साजिश रची थी. दरअसल बेतिया में एक ऑडियो क्लीप बहुत तेजी से वायर हो रहा है.
इस ऑडिया क्लीप में कुणाल नाम का शख्स इस हत्याकांड की जिम्मेवारी ले रहा है. वायरल ऑडियो क्लीप में क्या बातचीज हुई है. आप भी उस ऑडिया क्लीप में कुणाल पत्रकारों से क्या बात कर रहा है आप नीचे पढ़ सकते हैं..
कुणाल सिंह- आप……मीडिया से बोल रहे हैं क्या
पत्रकार -जी हां, बोलिये.
कुणाल- मैं कुणाल सिंह बोल रहा हूं,पीपराकोठी थाना कुड़िया कंगली जिला पूर्वी चंपारण से बोल रहा हूं.
पत्रकार०-हां हां बोलिये
कुणाल -सर, अभी-अभी जो घटनाक्रम आप सुने हैं बेतिया में, उसके पीछे हम ही लोग हैं. उसके पीछे बहुत सारे कारण हैं. बहुत सारी वजह है.जिसको आप लिख सकते हैं. न्यूज में आप दे सकते हैं.
केडिया अपहरण का पैसा नहीं मिला. केडिया अपहरण में 50% के सहयोगी थे कुणाल सिंह और राहुल मुखिया. सबसे अहम वजह यही थी. लगभग सैकड़ों लड़कों का जिंदगी बर्बाद किया था .
बहला-फुसलाकर कर के उनको पढ़ने-लिखने की उम्र में दलदल में धकेला गया. उनका करियर बर्बाद हो गया. कितनों के माता-पिता अपने बच्चों के वजह से नाखुश रहते थे.
पत्रकार-हां वो तो होगा ही.
कुणाल- यह समाज का गुनाहगार और गद्दार था.इसको समाज में रहने का कोई हक नहीं था.
पत्रकार- अच्छा तो आपने क्यों मारा, आखिर इसका कोई कारण होगा ना ?
कुणाल- जी हां, हम लोग इसलिए मारे क्योंकि हम लोगों का पैसा उसने बेईमानी किया. एक रुपया भी हम लोगों को उस पैसा में से नहीं दिया गया.
न राहुल मुखिया को एक रुपया दिया गया ना हमको मिला एक रुपया
पत्रकार- राहुल मुखिया कौन है
कुणाल- राहुल सिंह
पत्रकार-और आपका नाम ?
कुणाल-मेरा नाम कुणाल सिंह….
पत्रकार-कुणाल सिंह, हां..
कु०- ये समाज के गुनहगार, गद्दार थे उन्हें रहने का कोई हक नहीं था. इसलिए उन्हें…..
पत्रकार- केडिया अपहरण कांड में कितना रूपया पचाए थे
कुणाल- केडिया अपहरण कांड में …मांगा तो गया था बहुत ,लेकिन क्या उठाए थे और क्या लिए थे,इसकी जानकारी हम लोगों को नहीं है,और ना लगने दिए हम लोगों को और ना एक रुपया हम लोगों के हाथ लगने दिए.
पत्रकार-अच्छा.
कुणाल-यह लड़ाई है…जो कोई भी आएगा ,वह बख्शा नहीं जाएगा ..अन्याय का लड़ाई है..
पत्रकार- अंजनी ठाकुर गिरोह का भी नाम आ रहा है.
कुणाल-नहीं नहीं… ऐसा नहीं है.खुद जान ही जाएंगे धीरे-धीरे आप.. क्ल्यू आपको मिल ही जाएगा..
पत्रकार -हां वो तो मिल ही जाएगा.
कुणाल- प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा हूं, इसलिए आपको फोन कर रहा हूं ,बहुत गरीबों का शोषण किया था. हत्या का मुख्य वजह यही था.गरीबों का शोषण करके उसको बहलावे फुसलावे में लाके उसका रुपया ठग लेता था.
उनके खाने पर आफत ला दिया था. कई स्टूडेंट्स का कैरियर बर्बाद कर दिया था. नेपाल पुलिस को पैसा देकर नेपाल चला जाता था… अपना सहयोगी जिस को देखता था कि मेरे लिये खतरा होने वाला है.उसको मरवा देता था. कहीं से यह शोभनीय बात नहीं है.. इतना ही बात हमको बताना था..
पत्रकार- ठीक है.
कुणाल सिंह-जी धन्यवाद..
इतना कहने के बाद कुणाल सिंह फोन डिसकनेक्ट कर देता है.  यहां बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर यह कौन है जिसने खुद ही फोन करके इस घटना की जिम्मेदारी ली है. इस ऑडियो क्लिप में कितनी सच्चाई है?
क्या सच में हत्या के गुनहगार ये लोग ही हैं,या अपना खौफ फैलाने का यह महज स्टंट है. ऐसे कई सवाल अभी हवा में तैर रहे हैं. हालांकि यह ऑडियो क्लिप धीरे-धीरे वायरल हो रही है.
इस ऑडियो क्लिप में कितनी सच्चाई है यह तो आने वाला समय ही बताएगा,लेकिन फिलहाल पुलिस बबलू दूबे की कोर्ट में हुई हत्या को लेकर छापेमारी कर रही है. बता दें कि इस हत्याकांड के तार मोतिहारी सेंट्रल जेल से जुड़ने के बाद शनिवार को मोतिहारी एसपी के नेतृत्व में जेल में छापेमारी भी की गई.
पांच सेलफोन एक चार्जर सहित कई आपत्तिजनक सामान मिले.मोतिहारी पुलिस अधीक्षक जितेंद्र राणा ने बताया कि घटना के तार जेल से जुड़ने की सूचना पर छापेमारी की गई.
शातिर राहुल के वार्ड से 3 सेलफोन एक चार्जर राजन सहनी के वार्ड के पास से एक सेल फोन तथा मुकेश पटेल के वार्ड के पास से एक सेल फोन व कुछ आपत्तिजनक चीजें मिली
.इधर इस घटना की जिम्मेवारी लेने वाले कोर्ट परिसर से फरार पीपराकोठी के कुड़िया निवासी कुणाल सिंह की गिरफ्तारी के लिए उसके पैतृक गांव के अतिरिक्त कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई. इस मामले में अब तक पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है.
BETTIAH
पुलिस टीम ने पिपराकोठी, रघुनाथपुर, बंजरिया,पीपरा सहित कई जगहों पर छापेमारी की. इस मामले में रघुनाथपुर के प्रिंस की खोज है. उसके आवास व अन्य ठिकानों को भी खंगाला गया.
बता दें कि इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस की चूक मानते हुए डीआईजी ने बबलू दुबे की सुरक्षा में लगे पुलिस टीम को सस्पेंड कर दिया. इस टीम में  हवलदार लोहड़ी साव व तुलसी यादव समेत सिपाही उपेंद्र यादव,ओम किशोर कुमार और रंजीत कुमार का नाम शामिल है.
फिलहाल पुलिस की टीम अपराधियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है.\
लेकिन अभी इस हत्याकांड से पर्दा उठना अभी बाकी है.