साम्प्रदायिक सद्भाव की इस मिसाल को शत—शत सलाम!

लाइव सिटीज डेस्क: शनिवार की रात उडुपी श्री कृष्ण मंदिर में आयोजित इफ्तार पार्टी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिरकत की. इतिहास में यह एक बड़ी मिसाल है. मुस्लिम समुदाय के 150 से भी ज्यादा सदस्य ईद की पूर्व संध्या पर मंदिर के अन्न ब्रह्मा डायनिंग हॉल में जुटे और भोजन सौहार्द्र उपाहार समागम  (हार्मोनी ब्रेकफास्ट मीट)  में शामिल हुए.

इस कार्यक्रम का आयोजन पर्याय पेजावर मठ के विश्वेश तीर्थ स्वामी ने किया था, जो वर्तमान में पंचम पर्याय हैं.
तमाम मुस्लिम रोजेदार भाई वहां भोजन हॉल में एकत्रित हुए और शाम 6.59 बजे रोजा तोड़ा. उनके इफ्तार के लिए वहां केले, सेब, खजूर, तरबूज और काजू की भरपूर व्यवस्था की गई थी. साथ ही काली मिर्च से तैयार एक पेय ‘कश्य’ की भी व्यवस्था की गई थी. डाइनिंग हॉल में तमाम रोजेदार मुस्लिम भाइयों के सामने स्वयं विश्वेश तीर्थ स्वामी ने इसे पूरे सम्मान के साथ अपने हाथों से उनके सामने परोसा. इस पूरे आयोजन के पीछे मूल भावना यह थी कि कर्नाटक के लोग आपस में शांति और सद्भाव के साथ जीवन व्यतीत करें.

विश्वेश तीर्थ स्वामी ने कहा, ‘तमाम धर्म के लोगों को अनिवार्यत: सहिष्णु होना चाहिए और उन्हें शांतिपूर्वक साथ—साथ जीने की कला आनी चाहिए. मंगलुरू, कासरगोड और भटकल में मुसलमान भाइयों ने मेरे प्रति अगाध सम्मान का भाव प्रदर्शित किया है. उन्होंने पर्याय महोत्सव के दौरान मेरे प्रति अपनी शुभेच्छाएं व्यक्त की हैं और सम्मान प्रकट किया है. गौरतलब है कि यह भाव विश्वेश तीर्थ स्वामी नामक उस संत ने प्रकट किया है जो दक्षिणपंथी हिंदूवादी संगठन विश्व हिंदू परिषद से करीबी तौर पर जुड़े हुए हैं. स्वामी जी ने आगे कहा, ‘हम सभी एक ही परमात्मा की संतान हैं. कर्नाटक, विशेषतौर पर इसके जो तटीय इलाके हैं, इन इलाकों को अनिवार्य रूप से शांति का क्षेत्र बनना होगा और साथ ही राज्य में इसे सहिष्णुता की मिसाल भी पेश करना होगा.’

ध्यान देने वाली बात है कि 30 वर्ष पूर्व आयोजित तृतीय पर्याय के मौके पर स्वामी ने उडुपी के राजांगन हॉल में ईद के मौके पर हिंदू—मुस्लिम सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इतिहास में यह पहला मौका था जब मुस्लिम समुदाय के लोग किसी हिंदू मंदिर परिसर में एकत्रित हुए थे और पवित्र रमजान के महीने में रोजा खोला था.  स्वामी जी कहते हैं,’ समस्त मानव के लिए परमात्मा एक है. हिंदू और मुसलमानों को आपस में मिलजुल कर रहना चाहिए. श्री कृष्ण मंदिर पर जब आक्रमण के प्रयास किए गए तो इसकी रक्षा में मुसलमान आगे आए थे.

उडुपी में हिंदू और मुसलमान के शांतिपूर्वक साथ—साथ रहने की एक सुदीर्घ ऐतिहासिक परंपरा रही है. कर्नाटक के लोगों के लिए यह परंपरा मिसाल बन चुकी है.’ आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मुस्लिम भाइयों ने जब अपना रोजा खोल लिया तो वहां नमाज की भी व्यवस्था थी. डाइनिंग हॉल वाली इमारत के दूसरे तल पर अंजुमन मस्जिद के इमाम मौलाना इनायतुल्लाह की अगुवाई में रोजदारों ने नमाज अदा की. अंजुमन मस्जिद के खतीब एमए गफूर जो कि कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के चेयरमेन भी हैं, कहते हैं,’ उडुपी से शांति और सद्भाव के जिस संदेश की शुरूआत है, उसे पूरे विश्व में प्रसारित किया जाना चाहिए.


इस इफ्तार पार्टी के आयोजन में श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ, जूनियर पेजावर स्वामी जी, भाजपा अल्पसंख्यक सेल के रहीम उचिल, भाजपा के गुर्मे सुरेश शेट्टी, कर्नाटक रक्षा वेदिके के अंसार अहमद और कांग्रेस पार्टी के अबिद अली भी उपस्थित थे. एमए गफूर ने इस पूरे आयोजन पर खुशी प्रकट की. उन्होंने कहा, ‘पेजावर मठ द्वारा मंदिर परिसर में इफ्तार एवं नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को आमंत्रित करने का फैसला न केवल ऐतिहासिक है बल्कि साम्प्रदायिक सौहार्द्र कायम करने की अद्भूत मिसाल है.’

वाकई ऐसे आयोजनों से तमाम देशवासियों एवं राजनीतिक—धार्मिक नेताओं को सीख लेने की जरूरत है. ऐसे तमाम प्रयासों को सलाम!