बचपन में नरसंहार देखा, फैमिली ने दिल्ली जाने से रोका, गौरव ने पटना से ही किया UPSC क्रैक

लाइव सिटीज डेस्क : 1997  में भीषण नरसंहार झेल चुका अरवल स्थित लक्ष्मणपुर बाथे गांव जहां 58 लोगों की हत्या कर दी गई थी. आज इसी गांव का लाल गौरव कुमार (789) ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर गांव के दाग को धोते हुए बिहार का नाम पूरे देश में रौशन कर दिया.

दूसरे प्रयास में ही सिविल सेवा की परीक्षा पास करने वाले गौरव कुमार गुरुवार को लाइव सिटीज के ऑफिस आये. जहां उनसे उनके संघर्ष और सफलता से जुड़े सभी पहलुओं पर बातें की गई.  

ये रहे बातचीत के मुख्य अंश…

गौरव कुमार ने बताया कि सिविल सेवा का शौक उन्हें बचपन से था. उन्होंने कहा कि जब वो सुनते थे कि डीएम ने बढती गर्मी को देखते हुए स्कूल को बंद करने का आदेश दिया. तो यह बात उन्हें बार- बार इस ओर खींचती थी कि डीएम के पास इतना अधिकार है कि वो प्रशासनिक फैसले ले सकता है.

यह बात उसके दिमाग घर कर गई थी. खैर यह बचपन की बातें थी. उन्होंने बताया कि बारहवीं के बाद उन्होंने ठान लिया था कि उन्हें सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी है. फिर वो तैयारी में लग गए. और बस दूसरे प्रयास में ही वो सिविल सेवा में अपना परचम लहरा दिया.  

गौरव बहुत ही साधारण फैमिली बैकग्राउंड से आते हैं. अरवल के नरसंहार पीड़ित गांव में गौरव के माता-पिता के अलावा उनकी दो बहन भी है. गौरव के पिता संजीव कुमार एक किसान हैं. गांव के प्राइमरी स्कूल से सातवीं की पढाई करने के बाद गौरव पटना आ गए. यहां उन्होंने कदमकुआं स्थित देवी दयाल हाई स्कूल से अपनी बारहवीं की पढाई पूरी की. फिर पटना साइंस कॉलेज से जियोलॉजी में ग्रेजुएशन किया.

आर्थिक तंगी के बावजूद पटना में रहने को लेकर गौरव बताते हैं कि वो अपनी तैयारी के साथ- साथ कुछ जगहों पर कोचिंग क्लासेज भी देते थे. जिससे कुछ आय उन्हें हो जाती थी. इस सफलता में गौरव अपने चाचा के सपोर्ट को बहुत ही अहमियत देते हैं. गौरव के चाचा विजय शर्मा को उनमें शुरू से ही आईएएस की झलक दिखती थी. वो चाहते थे कि गौरव सिविल सेवा में आगे बढे. लेकिन परिवार से लगातार बैंकिंग, रेलवे इत्यादि के फॉर्म भर कोई नौकरी कर लेने का दबाव मिलता रहा. लेकिन गौरव अपने लक्ष्य से नहीं हिले.

UPSC की तैयारी को लेकर गौरव बताते हैं कि इसकी पढाई का कोई हार्ड रूल नहीं है. जरूरी नहीं कि 18 घंटे की पढाई ही की जाए, दाढ़ी बढ़ा ली जाए, खुद को कमरे में बंद कर लिया जाए. ऐसा नहीं है. आज दुनिया स्मार्ट हो गई है. आप कहीं भी रहें जरूरत है स्मार्ट स्टडी की. स्मार्ट स्टडी और सही स्ट्रेटेजी से अगर तैयारी की जाए तो 5 घंटे की रोजाना पढाई भी बहुत है.

पटना में ही रह कर पूरी तैयारी करने वाले गौरव बताते हैं कि अगर आपके पास इंटरनेट की सुविधा है तो ऑनलाइन आजकल सारा स्टडी मटेरियल उपलब्ध है. सेल्फ स्टडी से बेहतर कोई चीज़ नहीं है. सो, इसके लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर का  हौआ दिमाग से निकालना होगा. गौरव बताते हैं कि UPSC की पीटी और मैन्स से ज्यादा चुनौतीपूर्ण इसका साक्षात्कार होता है. इसके लिए कैंडिडेट को सही से तैयारी करनी चाहिए.  

गौरव सिविल सेवा में 789 रैंक लाये हैं. गौरव ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय से इस परीक्षा में अपना परचम लहराया है. वे रैंकिंग सुधार के लिए होने वाले 18 जून की परीक्षा में भी बैठेंगे. गौरव बताते हैं कि उनका उद्देश्य समाज में बदलाव लाने का है. अपनी प्रशासनिक क्षमता का वे सही उपयोग करना चाहते हैं. गौरव अपने गांव लक्ष्मणपुर बाथे गांव की सूरत बदलना चाहते हैं. वे बिहार में हो रहे पलायन और गिरती शिक्षा व्यवस्था को बदलना चाहते हैं.

गौरव ने अपने शौक को लेकर बताया कि UPSC निकालना मेरा उद्देश्य जरूर था. लेकिन कभी इसके लिए कोई समझौता नहीं किया. न कभी दोस्तों से दूर हुआ. न कभी स्ट्रेस लिया. खेल कूद हर चीज़ में गौरव ने भाग लिया. लेकिन पढाई अपनी रणनीति के हिसाब से करता रहा. अंततः गौरव ने सिविल सेवा की परीक्षा पास कर बिहार का सम्मान बढ़ा दिया.

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