मोस्ट वांटेड दुर्गेश शर्मा को चलती ट्रेन में पकड़ा STF ने, बात-बात पर करा देता था खून

पटना : जिस कुख्‍यात दुर्गेश शर्मा को पटना की पुलिस पिछले कई सालों से तलाश रही थी, वो अब एसटीएफ के कब्‍जे में है. उसे बख्तियारपुर से गिरफ्तार किया गया है! गिरफ्तारी के बाद कुछ समय के लिए दुर्गेश शर्मा को बख्तियारपुर रेल थाने में रखा गया. वहां के बाद एसटीएफ की टीम दुर्गेश को लेकर पटना आ गई.

सोर्स की मानें तो उसे बीएमपी एरिया में फिलहाल रखा गया है. वहां पर उससे एसटीएफ के अधिकारी पूछताछ करने में जुटे हैं. पिछले 6 साल से ये कुख्‍यात फरार चल रहा था. सोर्स की मानें तो पिछले कई महीने से एसटीएफ की टीम दुर्गेश शर्मा खंगालने और उसे पकड़ने में लगी हुई थी. सोर्स बताते हैं कि इस ऑपरेशन को आईजी कुंदन कृष्‍णन ने खुद अंजाम दिया. दुर्गेश को पकड़ने के लिए उन्‍होंने अपना हुलिया तक बदल दिया था.

फर्जी बेल पेपर दिखा हुआ था फरार

बात साल 2011 की है. उस वक्‍त दुर्गेश शर्मा पटना के बेउर जेल में बंद था. पटना पुलिस की टीम उसे दिल्‍ली से गिरफ्तार करके लाई थी. जेल से बाहर आने के लिए इसने अपने शातिराना अंदाज में एक फुल प्रूफ प्‍लान तैयार किया. जेल में बंद अपने आका के आदेश पर इसके गुर्गों ने एक फर्जी बेल पेपर बनवाया. उसी फर्जी बेल पेपर के आधार पर वो जेल से बाहर आ गया. जब तक इस बात का पता जेल प्रशासन, पुलिस और कोर्ट को हुआ, तब तक काफी देर हो चुकी थी. कुख्‍यात दुर्गेश शर्मा अंडर ग्राउंड हो चुका था. तब से पुलिस की टीम उसे तलाश रही थी.

सोनार की हत्‍या के बाद फिर आया था चर्चा में

16 जनवरी 2016 को एसके पुरी थाना के तहत मैनपुरा इलाके में अपराधियों ने सोनाली ज्‍वेलर्स के मालिक रविकांत प्रसाद की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी. वारदात के चंद घंटों के बाद ही पुलिस की इंवेस्टिगेशन में ये साफ हो गया था कि रविकांत की हत्‍या दुर्गेश शर्मा के इशारे पर की गई है. बतौर रंगदारी दुर्गेश ने रविकांत से 10 भरी सोना और 2 लाख रुपए की डिमांड की थी. हत्‍या के इस वारदात को दुर्गेश के गुर्गे करमू राय, गणेश, मुनचुन और पगला विक्रम ने मिलकर दिया था. हालांकि रविकांत की हत्‍या मामले में पटना पुलिस दुर्गेश को तो नहीं पकड़ सकी, लेकिन उसके 9 गुर्गों को जरूर अरेस्‍ट किया था.

50 हजार का था इनाम

फरारी के दौरान दुर्गेश लगातार अपना लोकेशन बदल रहा था. जिस कारण पटना पुलिस की टीम उसे पकड़़ नहीं पा रही थी. पिछले साल पटना के एसएसपी मनु महाराज ने दुर्गेश को पकड़ने के लिए 50 हजार रुपए के ईनाम रखने की सिफारिश की थी. जिसके बाद सरकार की ओर से ईनाम रख भी दिया गया. लेकिन इसके लिए एसटीएफ की टीम को लगा दिया गया. तब से एसटीएफ की टीम लगी हुई थी.

सुल्‍तान मियां का था शार्प शूटर

कुख्‍यात दुर्गेश शर्मा उर्फ विक्‍की मूल रूप से आरा का रहने वाला है. अपराध की दुनिया में इसने अपनी गहरी पैठ बनाई. एक टाईम में दुर्गेश कुख्‍यात अपराधी सुल्‍तान मियां राइट हैंड हुआ करता था. उस गैंग का ये शार्प शूटर था. लेकिन बाद में इसने खुद का एक गैंग बना डाला. बोरिंग रोड, राजापुर पुल और मैनपुरा सहित राजधानी के कई इलाकों में इसने अपना वर्चस्‍व कायम कर रखा था. पटना के अलग-अलग थानों में इसके खिलाफ हत्‍या और रंगदारी के दो दर्जन से भी अधिक एफआईआर दर्ज हैं.

शॉपिंग कॉम्प्‍लेक्स बनवाने में पार्टनर कर रहा था मदद

रविकांत प्रसाद के हत्‍या मामले में पटना पुलिस ने 17 जनवरी 2016 को पगला वि‍क्रम, भोला उर्फ रंजीत, जितेन्‍द्र और पप्‍पू को अरेस्‍ट किया था. उस दौरान हुए पूछताछ में विक्रम ने एक बड़ा खुलासा किया था. फरार होने के बावजूद दुर्गेश राजापुर पुल इलाके में एक शॉपिंग कॉम्‍प्‍लेक्‍स बनवा रहा था. इसमें उसका एक पार्टनर मदद कर रहा था. अपराध की दुनिया के जरिए वो करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर चुका है. रंगदारी की रकम वसूलने के लिए उसने अपराधियों का अलग-अलग वींग बना रखा था.

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