पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर लगाया 25 हजार का फाइन

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पटना हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

पटना (एहतेशाम अहमद) : आपराधिक मामले में न्यायालय द्वारा बरी किये जाने के बावजूद बिहार पुलिस के कांस्टेबल को बगैर सबूतों के नौकरी से बर्खास्त करने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 25 हजार रूपये का फाइन लगाया है. हाईकोर्ट ने जुर्माने की राशि को 4 सप्ताह के भीतर विधिक सेवा प्राधिकार में जमा करने का निर्देश दिया है. आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने से नाराज हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर यह अर्थदंड लगाया है.

जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी एवं जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खण्डपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर एलपीए (अपील) पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. गौरतलब है कि उक्त मामला बिहार पुलिस में कांस्टेबल के पद पर वर्ष 2000 में बहाल कौशल कुमार तिवारी का है. वह एक बास्केटबाॅल खिलाड़ी था. बहाली के बाद उन्हें बीएमपी-5 में डेपुटेशन पर भेजा गया. जहां वह बीएमपी-5 के बास्केटबाॅल टीम के खिलाड़ी के रूप में चयनित हुआ. 25 जनवरी 2004 को शास्त्राी नगर थाना कांड संख्या 65/2004 में आर्म्स एक्ट सहित अन्य भादवि की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके बद बीएमपी-5 ने उसे बास्केटबाॅल टीम से बाहर निकालकर वापस पुलिस विभाग में भेज दिया. जिसके बाद पुलिस विभाग द्वारा 11 फरवरी 2004 से उसे निलंबित कर दिया गया.

वहीं निचली अदालत द्वारा 31 जुलाई 2004 को उसे जमानत मिल गयी. जिसके बाद उसने पटना पुलिस बल के कार्यालय में नियुक्ति  दी. वहीं विभाग द्वारा 23 सितम्बर 2004 को उसका निलंबन वापस ले लिया गया. परंतु बाद में उसे एक कारण बताओं नोटिस जारी किया गया, जिसका उसने सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया. 09 फरवरी  2006 और 19 अप्रैल 2006 को जांच अधिकारी द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया और  उसके आधार पर 06 अक्तूबर 2007 को अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. जबकि
जांच रिपोर्ट में यह तथ्य आया था कि उसके विरूद्ध किसी भी प्रकार का साक्ष्य नहीं हासिल हुआ है.

साथ ही साथ निचली अदालत द्वारा भी उसे आपराधिक मामले से बरी कर दिया गया. जिसके बाद उसने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और अनुशासनिक अधिकारी द्वारा 6. अक्तूबर 2007, 31 मार्च 2008 और 18 सितम्बर 2008 के आदेश को निरस्त करने की मांग की. जिसपर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट जस्टिस एस.एन. हुसैन की एकलपीठ ने 18 मार्च 2013 को पुलिस विभाग के आदेश को निरस्त करते हुए कौशल कुमार तिवारी को निलंबन की तिथि से नियुक्ति देने और सभी बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था. बावजूद इसके अदालती आदेश का अनुपालन नहीं किया गया और एकलपीठ के आदेश के विरूद्ध अपील दायर की गयी. अदालत ने इसे एक गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार पर 25 हजार रूपये का जुर्माना लगाया.

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वाद के निपटारे तक शिक्षा विभाग के प्रधानसचिव बने रहेंगे आर. के. महाजन

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर. के. महाजन का स्थानान्तरण तब तक नहीं किया जाय, जब तक कि वाद का निपटारा न हो जाय. पटना हाईकोर्ट ने उक्त आदेश वर्ष 1988 से लंबित पडे जीव विज्ञान और गणित के शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं किये जाने के मामले में नाराजगी व्यक्त करते हुए दिया. अदालत ने शिक्षा विभाग को चार सप्ताह की मोहलत देते हुए स्पष्ट कहा कि इतने दिनों में हर हाल में बहाली प्रक्रिया पूर्ण करने के अदालती आदेश का अनुपालन हो.

जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी एवं जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खण्डपीठ ने रविकांत कुमार सौरभ एवं अन्य की ओर से दायर अवमाननावाद पर शुक्रवार को एकसाथ सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. गौरतलब है कि वर्ष 1988 में विभिन्न विषयों के शिक्षकों की बहाली हेतु विज्ञापन निकाला गया था. परंतु जहां अन्य विषयों के शिक्षकों को बहाल कर लिया गया वहीं जीव विज्ञान  के 407 और गणित के 268 पदों पर बहाली आज तक नहीं की गयी है.

इस मामले में वर्ष 2001 में ही पटना हाईकोर्ट ने अपना आदेश पारिल कर दिया. जिसके विरूद्ध राज्य सरकार ने मामले को उच्चतम न्यायालय के समक्ष रखा. जिसपर सुनवाई के पश्चात उच्चतम न्यायालय ने भी पटना हाईकोर्ट के आदेश को यथावत रखा था. बावजूद इसके बहाली की प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गयी. इस मामले में शिक्षा विभाग द्वारा 28 सितम्बर 2016 को ही अदालत को आश्वस्त किया था कि वह बहाली प्रक्रिया पूर्ण कर लेगी. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने अदालत को बताया था कि इस सम्बंध में प्रस्ताव बनाकर सम्बंधित शिक्षा मंत्री के पास भेजा जा चुका है जिसे कैबिनेट में पास होना है.

परंतु 15 फरवरी को पुनः 8 सप्ताह के समय की मांग अदालत से की गयी थी. इसके बाद 23 जून 2017 को पुनः 3 सप्ताह के समय की मांग की गयी. शिक्षा विभाग के बार-बार समय की मांग पर पिछली सुनवाई में अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को अदालत तलब करते हुए कहा था कि क्या शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारियों के आश्वासन का कोई अर्थ नहीं है. शुक्रवार की सुनवाई के क्रम में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अदालत में उपस्थित हुए और बहाली प्रक्रिया से सम्बंधित कार्रवाइयों का ब्यौरा अदालत
के समक्ष रखा. अदालत ने शिक्षा विभाग को 4 सप्ताह का अंतिम मौका देते हुए अदालती आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया.