हरनौत नगर पंचायत के वार्ड गठन पर रोक, छपरा नगर निगम चुनाव पर DM को नोटिस

पटना (एहतेशाम अहमद) : नालंदा के हरनौत नगर पंचायत के गठन के मामले में वार्ड गठन पर पटना हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए 3 सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब हलफनामा दायर करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है. न्यायाधीश एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने विजय कुमार सिंह एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

क्या है मामला

याचिका में कहा गया है कि नगर पंचायत के गठन के लिए फरवरी 2016 में एक रिपोर्ट भेजी गयी थी. इसपर कोई काररवाई नहीं की गयी और इसी बीच जून 2016 में पंचायत का चुनाव करा लिया गया. 1 जुलाई 2016 को नगर विकास विभाग द्वारा नगर पंचायत के गठन के लिए ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर दी और आपत्ति की मांग की गयी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब चुनाव हो गया तो इसका गठन पांच वर्ष बाद होगा. जिसके बाद दो पंचायत के लोगों द्वारा आमसभा का आयोजन कर नगर पंचायत का विरोध किया गया. जिसके बाद सरकार और नालंदा के जिलाधिकारी को अपनी आपत्ति भेज दी गयी.

सरकार की ओर से जिलाधिकारी को जांच कर निर्देश भेजने का निर्देश जारी किया गया. डीएम ने पांच सदस्यीय कमिटी का गठन कर जांच करने का निर्देश दिया. जिसमें कमिटी को ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों से बातचीत कर रिपोर्ट भेजनी थी. परंतु कमिटी द्वारा ऐसा ना कर स्वयं ही सरकार के पक्ष में रिपोर्ट भेज दी. जिसपर सितम्बर 2016 में नगर पंचायत का अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गयी. सरकार के इस अंतिम अधिसूचना को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी. जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने वार्ड गठन पर अंतरिक रोक लगा दी है.

वार्डों के पुनर्गठन पर छपरा DM तलब

छपरा नगर निगम चुनाव में वार्डों के पुनर्गठन में निर्धारित मापदंडों का अनुपालन नहीं किये जाने से नाराज पटना हाईकोर्ट ने सारण के जिलाधिकारी को 13 जुलाई को अदालत में हाजिर होकर जवाब देने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने कृष्ण प्रसाद यादव एवं अन्य की ओर से दायर रिट याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

यह है मामला

मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा अदालत को बताया गया कि छपरा नगर परिषद, नगर निगम बनने के बाद पहली बार हो रहे नगर निगम चुनाव में 45 वार्डों का पुनर्गठन होना था. वार्डों के पुनर्गठन में जनसंख्या और हदबंदी का ख्याल रखा जाना था, जबकि ऐसा नहीं किया गया. चुनाव आयोग द्वारा भी निर्धारित मैप के तहत औसत जनसंख्या 4497 रखना था, जिसमें अधिकतम 5497 तथा न्यूनतम 3497 होना चाहिए था. मगर 13 वार्डों में निर्धारित मापदंडों का उल्लंघन पाया गया.

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याचिकाकर्ता की इस दलील को सही पाते हुए अदालत ने यह माना कि इन 13 वार्डों में अधिकतम और न्यूनतम जनसंख्या में भिन्नता पाई गई है. मंगलवार को सुनवाई के क्रम में अदालत ने भी स्पष्ट किया कि वार्डों के पुनर्गठन में पूरी तरह से क्षेत्र के हदबंदी और समान जनसंख्या का अनुपालन करना है. अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के जवाब से असंतुष्ट होकर सारण के डीएम को अगली सुनवाई में स्वयं अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है.

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