वकीलों को बड़ी राहत, अब हर साल नहीं देना होगा एफिडेविट

पटना (एहतेशाम अहमद) : पटना हाईकोर्ट में वकालत कर रहे करीब 10 हजार अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बडी राहत प्रदान की है. हाईकोर्ट ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसके तहत ‘एडवोकेट आन रिकार्ड’ (AOR) अधिवक्ता को प्रतिवर्ष शपथ पत्र देकर यह घोषणा करनी थी कि वह क्रियाशील अधिवक्ता हैं. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने पटना हाईकोर्ट के तीनों एसोसियेशनों की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने हाईकोर्ट के सभी AOR वकीलों को प्रत्येक वर्ष अपना वेरिफीकेशन फॉर्म जमा करने का आदेश दिया था. जिससे कि यह ज्ञात हो सके कि वह वकालत के पेशे में क्रियाशील रूप से कार्यरत हैं. एकलपीठ के उक्त आदेश को चुनौती देते हुए खण्डपीठ में याचिका दायर की गयी थी. जिसपर मंगलवार को सुनवाई हुई.

प्रभुनाथ सिंह की याचिका पर फैसला सुरक्षित

महाराजगंज के राजद के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की ओर से भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के विरुद्ध दायर चुनाव याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी करते हुए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. अदालत इस मामले में अपना फैसला 8 अगस्त को सुनाएगी. न्यायाधीश मुंगेश्वर साहू की एकलपीठ ने प्रभुनाथ सिंह की ओर से दायर चुनाव याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी करते हुए उक्त निर्देश दिया.

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गौरतलब है कि पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह ने चुनाव याचिका में यह शिकायत की थी कि भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अपने विरुद्ध आपराधिक मामलों की जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी थी, जो नियमानुसार गलत है. काफी लंबी चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने गवाह का बयान कलमबंद किया. साथ ही इस मामले के तकनीकी पक्षों पर भी विस्तृत रोशनी डाली गयी. अदालत ने मंगलवार को सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

BMP-5 पर राज्य सरकार से जवाब तलब

बिहार मिलिट्री पुलिस-5 (BMP-5) के जवानों को मिल रहे एसीपी में कटौती के आदेश पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश ज्योतिशरण की एकलपीठ ने विनोद कुमार सिंह एवं अन्य कई ओर से दायर रिट याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि BMP-5 के कमांडेंट द्वारा एक अधिसूचना निर्गत की गयी, जिसके तहत BMP के पुलिसकर्मियों को 2009 में दिए गए एसीपी लाभ को 2011 में वित्त विभाग के पत्रांक 5301 द्वारा कटौती करने का आदेश निर्गत किया गया तथा कटौती भी शुरु कर दी गयी.

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